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युवाओं में रंगमंच के प्रति रूझान और गंभीरता
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वाराणसी। सेतु सांस्कृतिक केंद्र के 16 वें राष्ट्रीय नाट्य आंदोलन के चौथे दिन शनिवार को पिपलानी कटरा स्थित योग ध्यान केंद्र में नाट्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। युवाओं में रंगमंच के प्रति रुझान एवं गंभीरता विषय पर बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि युवा गभीर तो है लेकिन आर्थिक संकट छा जा रहा है।
युवा रंगकर्मी प्रियंका मेहरोत्रा ने कहा कि आज का युवा रंगमंच के प्रति गंभीर है लेकिन जीविकोपार्जन का प्रश्न उसे इस से दूर ले जाता है। अगर रंगमंच हमें रोजी रोटी भी उपलब्ध करा दे तो युवा रंगकर्मी पूरे समर्पण के साथ काम कर सकेंगे
आकाश देवराज श्रीवास्तव ने कहा कि सिनेमा में जाने के लिए रंगकर्म को रास्ता बनाना सही नहीं है क्योंकि दोनों अलग विधाएं हैं जो दो तरह से काम करती हैं। रंगकर्म पूर्ण समर्पण मांगता ह।
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सत्यम मिश्रा ने कहा कि रंगकर्म करने के लिए सबसे पहले युवाओं को अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। राजलक्ष्मी मिश्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि अनुशासन बेहद जरूरी है। रंगकर्म में भी अनुशासन हमें परिपूर्ण बनाता है। संघर्ष प्रताप मौर्य ने माना कि वर्तमान में रंगमंच व्यवसायीकरण से दूर होने की वजह से युवाओं से भी दूर हो रहा है। इस अवसर पर वत्सल शर्मा, आशुतोष पांडे, चित्रा वर्मा, लक्ष्य वर्मा आदि ने भी अपने विचार रखे। गोष्ठी का संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया और गोष्ठी की अध्यक्षता सेतु के सचिव सलीम राजा ने की।
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युवा रंगकर्मी प्रियंका मेहरोत्रा ने कहा कि आज का युवा रंगमंच के प्रति गंभीर है लेकिन जीविकोपार्जन का प्रश्न उसे इस से दूर ले जाता है। अगर रंगमंच हमें रोजी रोटी भी उपलब्ध करा दे तो युवा रंगकर्मी पूरे समर्पण के साथ काम कर सकेंगे
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आकाश देवराज श्रीवास्तव ने कहा कि सिनेमा में जाने के लिए रंगकर्म को रास्ता बनाना सही नहीं है क्योंकि दोनों अलग विधाएं हैं जो दो तरह से काम करती हैं। रंगकर्म पूर्ण समर्पण मांगता ह।
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सत्यम मिश्रा ने कहा कि रंगकर्म करने के लिए सबसे पहले युवाओं को अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। राजलक्ष्मी मिश्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि अनुशासन बेहद जरूरी है। रंगकर्म में भी अनुशासन हमें परिपूर्ण बनाता है। संघर्ष प्रताप मौर्य ने माना कि वर्तमान में रंगमंच व्यवसायीकरण से दूर होने की वजह से युवाओं से भी दूर हो रहा है। इस अवसर पर वत्सल शर्मा, आशुतोष पांडे, चित्रा वर्मा, लक्ष्य वर्मा आदि ने भी अपने विचार रखे। गोष्ठी का संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया और गोष्ठी की अध्यक्षता सेतु के सचिव सलीम राजा ने की।