{"_id":"5be73f2dbdec2269871eef8b","slug":"121541881645-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सामाजिक जागरूकता से ही प्रदूषण का हल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सामाजिक जागरूकता से ही प्रदूषण का हल
Updated Sun, 11 Nov 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण...। गंगा प्रदूषण को लेकर बहुत हो हल्ला हुआ। हमारे शहर की आबोहवा चिंताजनक। प्रदूषण रोकने में सरकारी तंत्र तो नाकाम रह गया, गैर सरकारी तंत्र की कोशिशें भी सरकार को जगाने में कहीं कम रह गईं। अब तो जो हल निकलेगा वह सामाजिक जागरूकता से और हमारे आपके छोटे छोटे प्रयासों से। शनिवार को आयोजित अमर उजाला संवाद में शहर के विशिष्ट जनों ने प्रदूषण के मुद्दे पर कमोबेश अपनी यही राय रखी।
पिछले कुछ दिनों से शहर में वायु प्रदूषण की जो खतरनाक स्थिति है, उसकी समस्याओं पर तो बात हुई, उससे निपटने के, उसे कम करने के सुझाव भी इस मंच पर रखे गए। प्रदूषण कम करने में सरकारी तंत्र की क्या भूमिका है और हमारी अपनी क्या जिम्मेदारियां हैं, उस पर चर्चा हुई। बहुत हद तक प्रदूषण कम करने का दायित्व हमारा है लेकिन इसमें सरकारी तंत्र की भूमिका सबसे अहम है। अगर स्थिति खतरनाक है तो सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। दिल्ली जैसे हालात अगर बनारस में हैं तो यहां के सिस्टम को दुरुस्त करना शासन की जिम्मेदारी है। प्रदूषण नियंत्रण इकाई, पर्यावरणविद, पर्यावरण के मुद्दे पर काम करने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। नेशनल क्लीन एयर एक्शन प्लान का लागू किया जाना चाहिए। दिवाली के दौरान, स्मॉग की स्थिति में एडवाइजरी और हेल्थ एलर्ट जारी किए जाने चाहिए।
विज्ञापन
पिछले कुछ दिनों से शहर में वायु प्रदूषण की जो खतरनाक स्थिति है, उसकी समस्याओं पर तो बात हुई, उससे निपटने के, उसे कम करने के सुझाव भी इस मंच पर रखे गए। प्रदूषण कम करने में सरकारी तंत्र की क्या भूमिका है और हमारी अपनी क्या जिम्मेदारियां हैं, उस पर चर्चा हुई। बहुत हद तक प्रदूषण कम करने का दायित्व हमारा है लेकिन इसमें सरकारी तंत्र की भूमिका सबसे अहम है। अगर स्थिति खतरनाक है तो सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। दिल्ली जैसे हालात अगर बनारस में हैं तो यहां के सिस्टम को दुरुस्त करना शासन की जिम्मेदारी है। प्रदूषण नियंत्रण इकाई, पर्यावरणविद, पर्यावरण के मुद्दे पर काम करने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। नेशनल क्लीन एयर एक्शन प्लान का लागू किया जाना चाहिए। दिवाली के दौरान, स्मॉग की स्थिति में एडवाइजरी और हेल्थ एलर्ट जारी किए जाने चाहिए।
विज्ञापन