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लछिमन होहु धरम के नेगी
Updated Sun, 21 Oct 2018 01:53 AM IST
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रामनगर। बहुत प्रकार के आभूषण पहनाकर सीता जी को सुखों के धाम रामजी के पास लेकर दासियां आती हैं। भगवान कहते हैं तुम्हें अग्नि से निकलना होगा। यह सुनकर सभी विषाद करते हैं। मगर प्रभु की लीला जानकर चुप हैं। सीता जी लक्ष्मण से कहती हैं कि है लक्ष्मण मेरे धर्म के सहायक बनो और तुरंत अग्नि तैयार करो।
रामनगर की रामलीला में शनिवार को अग्निपरीक्षा और रामसीता मिलन की लीला हुई। पिता के वचन से बंधा होने के कारण श्री राम नगर तक नहीं जाते हैं। सीताजी को पालकी से लाया जाता है। श्रीराम कहते हैं कि सीताजी को पैदल लाओ ताकि वानर-भालू भी उनके दर्शन कर सकें। सीताजी के कहने पर लक्ष्मण अग्नि तैयार करते हैं। अग्निदेव प्रकट होकर स्वयं सीताजी का हाथ प्रभु को सौंपते हैं। देवतागण पुष्पवर्षा करते हैं।
विभीषण पुष्पक विमान लेकर आते हैं। सभी उसमें सवार होकर अयोध्या के लिए चल देते हैं। पुष्पक विमान निषादराज के आश्रम पहुंचता है। प्रभुराम उन्हें गले लगाते हैं। यहीं पर आरती के साथ लीला को विश्राम दिया जाता है।
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रामनगर की रामलीला में शनिवार को अग्निपरीक्षा और रामसीता मिलन की लीला हुई। पिता के वचन से बंधा होने के कारण श्री राम नगर तक नहीं जाते हैं। सीताजी को पालकी से लाया जाता है। श्रीराम कहते हैं कि सीताजी को पैदल लाओ ताकि वानर-भालू भी उनके दर्शन कर सकें। सीताजी के कहने पर लक्ष्मण अग्नि तैयार करते हैं। अग्निदेव प्रकट होकर स्वयं सीताजी का हाथ प्रभु को सौंपते हैं। देवतागण पुष्पवर्षा करते हैं।
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विभीषण पुष्पक विमान लेकर आते हैं। सभी उसमें सवार होकर अयोध्या के लिए चल देते हैं। पुष्पक विमान निषादराज के आश्रम पहुंचता है। प्रभुराम उन्हें गले लगाते हैं। यहीं पर आरती के साथ लीला को विश्राम दिया जाता है।
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