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पीएमओ को भी कर दिया गया गुमराह
Updated Mon, 09 Jul 2018 02:32 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू में शिक्षकों की नियुक्तियों में अनियमितताओं पर हाईकोर्ट की ओर से कुलपति को दो महीने में अपने स्तर से कार्रवाई के आदेश के बाद भी गड़बड़ियां जारी हैं।
ताजा मामला भू-भौमिकी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद को लेकर पीएमओ पोर्टल पर दी गई जानकारी से जुड़ा है। यहां विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक को गलत जानकारी दे दी है। विभाग के ओबीसी संवर्ग में पोस्ट कोड 30037 के चार पदों पर नियुक्ति के लिए 37 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। 10 सितंबर, 17 को चयन समिति ने उपस्थित हुए 28 आवेदकों में से जिन चार का चयन किया, उसमें एक पीएचडी डिग्री धारक को नंबर कम होने के बावजूद नियुक्ति के लिए अर्ह घोषित कर दिया।
दरअसल, इस पद पर दो आवेदक एक ही नाम के थे। डॉ. आलोक कुमार का चयन हो गया। उनके नंबर 54 थे, जबकि आलोक कुमार का 65 नंबर हासिल करने के बावजूद चयन नहीं किया गया। पिशाच मोचन निवासी विनीत श्रीवास्तव ने आरटीआई में हुई अनियमितता के खुलासे के बाद इसकी शिकायत पीएमओ पोर्टल पर 10 अप्रैल, 2018 को की थी। दो जुलाई, 2018 को चयन समिति के दो सदस्यों की ओर से भेजे गए जवाब में आलोक कुमार और डॉ. आलोक कुमार को एक ही व्यक्ति बताने के साथ-साथ डॉ. आलोक कुमार को 65 नंबर मिलने की बात कही हई है।
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पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर से प्रोफेसर के 215 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। इसमें विज्ञान संकाय में अनियमितता के मामले अधिक हैं। हाईकोर्ट ने कुलपति को इससे जुड़े प्रत्यावेदन मिलने की तिथि से दो महीने के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। विश्वविद्यालय की ओर से पहले आरटीआई के जवाब में दिए गए कागजातों से अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं।
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ताजा मामला भू-भौमिकी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद को लेकर पीएमओ पोर्टल पर दी गई जानकारी से जुड़ा है। यहां विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक को गलत जानकारी दे दी है। विभाग के ओबीसी संवर्ग में पोस्ट कोड 30037 के चार पदों पर नियुक्ति के लिए 37 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। 10 सितंबर, 17 को चयन समिति ने उपस्थित हुए 28 आवेदकों में से जिन चार का चयन किया, उसमें एक पीएचडी डिग्री धारक को नंबर कम होने के बावजूद नियुक्ति के लिए अर्ह घोषित कर दिया।
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दरअसल, इस पद पर दो आवेदक एक ही नाम के थे। डॉ. आलोक कुमार का चयन हो गया। उनके नंबर 54 थे, जबकि आलोक कुमार का 65 नंबर हासिल करने के बावजूद चयन नहीं किया गया। पिशाच मोचन निवासी विनीत श्रीवास्तव ने आरटीआई में हुई अनियमितता के खुलासे के बाद इसकी शिकायत पीएमओ पोर्टल पर 10 अप्रैल, 2018 को की थी। दो जुलाई, 2018 को चयन समिति के दो सदस्यों की ओर से भेजे गए जवाब में आलोक कुमार और डॉ. आलोक कुमार को एक ही व्यक्ति बताने के साथ-साथ डॉ. आलोक कुमार को 65 नंबर मिलने की बात कही हई है।
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पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर से प्रोफेसर के 215 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। इसमें विज्ञान संकाय में अनियमितता के मामले अधिक हैं। हाईकोर्ट ने कुलपति को इससे जुड़े प्रत्यावेदन मिलने की तिथि से दो महीने के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। विश्वविद्यालय की ओर से पहले आरटीआई के जवाब में दिए गए कागजातों से अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं।