{"_id":"5ab170394f1c1b8c778b6ca9","slug":"121521578041-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर से डेयरियां हटाने पर हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी0","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर से डेयरियां हटाने पर हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी0
Updated Wed, 21 Mar 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद, वाराणसी। शहर में घूमने वाले आवारा पशुओं और दूध की डेयरियों को नगरीय सीमा से बाहर ले जाने को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से जानकारी मांगी है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि 2016 मेें भी इसी मामले में कोर्ट ने मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा था। क्या मुख्य सचिव ने हलफनामा दाखिल कर दिया है। यदि नहीं किया है तो यह आदेश की अवहेलना है, जो अवमानना की श्रेणी में आता है। याचिका
शहर के विनय कुमार चौधरी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ सुनवाई कर रही है।
याचिका में बनारस शहर में घूमने वाले आवारा पशुओं से हो रही दुघर्टनाओं की रोक थाम के लिए कदम उठाने तथा दूध की डेयरियों को शहर से बाहर किए जाने की मांग की गई है। याची के अधिवक्ता रंजीत सक्सेना का कहना था कि सरकार इस मामले में पहले ही शासनादेश जारी कर चुकी है। मगर इस पर आज तक किसी भी शहर में अमल नहीं हो पाया है। सुप्रीमकोर्ट ने इस मामले में आदेश दिया है जिसका पालन किया जाना चाहिए। आवारा पशुओं और शहर में डेयरियों के होने से ट्रैफिक जाम और दुघर्टनाएं होती हैं इसलिए इनको शहर से बाहर करना आवश्यक है। जबकि इस मामले को लेकर नगर आयुक्त ने बताया है कि छुट्टा पशुओं को रखने के लिए गौशालों का निर्माण कार्य टेंडर प्रक्रिया में हैं। निर्माण पूरा होते ही शहर के इन पशुओं को पकड़कर उसमें रखा जाएगा, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
विज्ञापन
शहर के विनय कुमार चौधरी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ सुनवाई कर रही है।
याचिका में बनारस शहर में घूमने वाले आवारा पशुओं से हो रही दुघर्टनाओं की रोक थाम के लिए कदम उठाने तथा दूध की डेयरियों को शहर से बाहर किए जाने की मांग की गई है। याची के अधिवक्ता रंजीत सक्सेना का कहना था कि सरकार इस मामले में पहले ही शासनादेश जारी कर चुकी है। मगर इस पर आज तक किसी भी शहर में अमल नहीं हो पाया है। सुप्रीमकोर्ट ने इस मामले में आदेश दिया है जिसका पालन किया जाना चाहिए। आवारा पशुओं और शहर में डेयरियों के होने से ट्रैफिक जाम और दुघर्टनाएं होती हैं इसलिए इनको शहर से बाहर करना आवश्यक है। जबकि इस मामले को लेकर नगर आयुक्त ने बताया है कि छुट्टा पशुओं को रखने के लिए गौशालों का निर्माण कार्य टेंडर प्रक्रिया में हैं। निर्माण पूरा होते ही शहर के इन पशुओं को पकड़कर उसमें रखा जाएगा, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
विज्ञापन