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रामकथा से मिट जाते हैं जीवन भर के क्लेश
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:12 AM IST
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सीतामढ़ी। महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली सीतामढ़ी में चल रहे सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण महाअनुष्ठान में श्री रामकथा की अमृतमयी वर्षा करते हुए शनिवार को स्वामी बृजेशानंद नंद ने कहा कि श्री रामकथा श्रवण से कई जन्मों की व्यथा मिट जाती है। इसके भी हृदय में भगवान श्रीराम बैठ जाएंगे तो उसके तीनों लोक हर्षित हो जाएंगे। कहा कि शास्त्रसम्मत जीवन ही धर्म है।
जीवन में धर्म के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा की धर्मशीलता से ही सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने भगवान शिव और पार्वती विवाह की भावपूर्ण कथा सुनाई। गंगा की महत्ता बताते हुए कहा कि जो गंगा शब्द का उच्चारण करता है, वह कभी भी दु:खी नहीं रहता। राजा बली की कथा विस्तृत रूप से सुनाई। कहा धर्म के चार चरण सत्य, दया, तप और दान हैं। जो मनुष्य एक भी चरण का पालन करता है, वह धर्म का पालन करता है। इस मौके पर कार्यक्रम के अध्यक्ष राहुल दूबे, रेनू पांडेय, विधान चंद्र दूबे, विंध्यवासिनी मिश्रा, बीडी मिश्रा, राजबहादुर यादव, मुन्ना लाल पांडेय, विमल मिश्रा, रामकृष्ण मिश्रा, ओम जी मिश्रा, डॉ. हौशिला प्रसाद मिश्रा, बसंत लाल गौड़, दुर्गेश तिवारी आदि रहे।
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जीवन में धर्म के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा की धर्मशीलता से ही सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने भगवान शिव और पार्वती विवाह की भावपूर्ण कथा सुनाई। गंगा की महत्ता बताते हुए कहा कि जो गंगा शब्द का उच्चारण करता है, वह कभी भी दु:खी नहीं रहता। राजा बली की कथा विस्तृत रूप से सुनाई। कहा धर्म के चार चरण सत्य, दया, तप और दान हैं। जो मनुष्य एक भी चरण का पालन करता है, वह धर्म का पालन करता है। इस मौके पर कार्यक्रम के अध्यक्ष राहुल दूबे, रेनू पांडेय, विधान चंद्र दूबे, विंध्यवासिनी मिश्रा, बीडी मिश्रा, राजबहादुर यादव, मुन्ना लाल पांडेय, विमल मिश्रा, रामकृष्ण मिश्रा, ओम जी मिश्रा, डॉ. हौशिला प्रसाद मिश्रा, बसंत लाल गौड़, दुर्गेश तिवारी आदि रहे।
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