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525 हैंडपंप बेपानी, बढ़ेगी परेशानी
Updated Wed, 31 Jan 2018 01:32 AM IST
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ज्ञानपुर। जिले के ग्रामीण अंचल में लगे 500 से अधिक हैंडपंप बेपानी हो गए हैं। मानक से कम बोरिंग कराने के कारण गर्मी से पहले ही इन हैंडपंपों ने पानी छोड़ दिया है। ग्राम प्रधानों को हैंडपंप रीबोर कराने का अधिकार मिला हुआ है, फिर भी वे अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। यदि समय रहते इन हैंडपंपों को दुरुस्त नहीं कराया गया तो गर्मी के मौसम में ग्रामीणों को पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा।
शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके तहत गांवों में पानी की टंकियां, सोलर पंप और हैंडपंप लगवाए गए हैं। जिले के सभी छह ब्लॉकों में विभिन्न निधियों से करीब दो दशक में 40 हजार से अधिक हैंडपंप लगाए गए लेकिन 50 फीसदी हैंडपंप कुछ ही महीनों बाद खराब हो गए। ठेकेदार पैसे बचाने के चक्कर में तय मानक 150 से 180 फीट की बजाए 120 से 130 फीट ही बोरिंग कराते हैं। इसके चलते गर्मी के मौसम में जलस्तर नीचे जाते ही हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में जिले में दो हजार से अधिक हैंडपंप रीबोर लायक मिले थे। विभाग इनमें 1500 हैंडपंपों को दुरुस्त कराने का दावा कर रहा है। अब भी गांवों में 525 हैंडपंप रीबोर नहीं कराए जा सके। मार्च से पहले हैंडपंप रीबोर नहीं हुए तो गर्मी में पेयजल समस्या गहराएगी। जिला पंचायतीराज अधिकारी अनिल कुमार त्रिपाठी का कहना है कि हैंडपंपों के रीबोर की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को दी गई है। एक साल पूर्व चिह्नित किए गए दो हजार हैंडंपपों में 1500 की मरम्मत हो चुकी है। गर्मी से पहले बाकी 525 हैंडपंपो को भी दुरुस्त करा लिया जाएगा।
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शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके तहत गांवों में पानी की टंकियां, सोलर पंप और हैंडपंप लगवाए गए हैं। जिले के सभी छह ब्लॉकों में विभिन्न निधियों से करीब दो दशक में 40 हजार से अधिक हैंडपंप लगाए गए लेकिन 50 फीसदी हैंडपंप कुछ ही महीनों बाद खराब हो गए। ठेकेदार पैसे बचाने के चक्कर में तय मानक 150 से 180 फीट की बजाए 120 से 130 फीट ही बोरिंग कराते हैं। इसके चलते गर्मी के मौसम में जलस्तर नीचे जाते ही हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में जिले में दो हजार से अधिक हैंडपंप रीबोर लायक मिले थे। विभाग इनमें 1500 हैंडपंपों को दुरुस्त कराने का दावा कर रहा है। अब भी गांवों में 525 हैंडपंप रीबोर नहीं कराए जा सके। मार्च से पहले हैंडपंप रीबोर नहीं हुए तो गर्मी में पेयजल समस्या गहराएगी। जिला पंचायतीराज अधिकारी अनिल कुमार त्रिपाठी का कहना है कि हैंडपंपों के रीबोर की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को दी गई है। एक साल पूर्व चिह्नित किए गए दो हजार हैंडंपपों में 1500 की मरम्मत हो चुकी है। गर्मी से पहले बाकी 525 हैंडपंपो को भी दुरुस्त करा लिया जाएगा।
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