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सितार के तारों पर गायकी अंग में जुलगबंदी
Updated Sat, 07 Oct 2017 01:47 AM IST
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वाराणसी। सितार के तारों पर बनारस घराने के गायकी अंग की जुगलबंदी शुक्रवार की रात संगीत प्रेमियों के लिए यादगार बन गई। सुरों की सरिता प्रवाहित हुई और ताल नाद से वातावरण रससिक्त हुआ। इसी के साथ तीन दिवसीय श्रीमठ संगीत महोत्सव का समापन हो गया।
नागरी नाटक मंडली के प्रेक्षागृह में शुरुआत हुई रेवती साकलकर के गायन से। राग यमन में निबद्ध रचना के बोल थे- मैं तो हरि गुन गाऊंगी...। इसके उपरांत राग चारुकेशी में निबद्ध दूसरी बंदिश के बोल थे-काहे रे वन खोजत जाई...। इसके बाद राग किरवानी में दादरा पेश किया। बोल थे तुम बिन नींद न आए ...। इसके साथ ही राग जोगिया में निबद्ध भजन -जब राम नाम कहीं गाएगा और कबीर के निर्गुण -कौन ठगवा नगरिया लूटल हो... की प्रस्तुति की। तबले पर पं कुबेर मिश्र, हारमोनियम पर पं जमुना बल्लभ गुजराती, वायलिन पर संजय मिश्रा ने संगत की। इनके बाद पं शिवनाथ मिश्र और उनके पुत्र पं. देवव्रत मिश्र की सितार जुगलबंदी आरंभ हुई। इन्होंने सितार पर राग झिंझोटी की अवतारणा की। अलाप, जोड़ के बाद विलंबित एकताल में निबद्ध गत की बेजोड़ प्रस्तुति की। इसके बाद मध्य धमार ताल में निबद्ध गत बजाई। द्रुत तीनताल में गत के साथ ही पारंपरिक बनारस की गायकी अंग में धुन बजाकर उन्होंने विदा ली। तबले पर संगत की प्रशांत मिश्र ने।संचालन प्रीतेश आचार्य ने किया।
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नागरी नाटक मंडली के प्रेक्षागृह में शुरुआत हुई रेवती साकलकर के गायन से। राग यमन में निबद्ध रचना के बोल थे- मैं तो हरि गुन गाऊंगी...। इसके उपरांत राग चारुकेशी में निबद्ध दूसरी बंदिश के बोल थे-काहे रे वन खोजत जाई...। इसके बाद राग किरवानी में दादरा पेश किया। बोल थे तुम बिन नींद न आए ...। इसके साथ ही राग जोगिया में निबद्ध भजन -जब राम नाम कहीं गाएगा और कबीर के निर्गुण -कौन ठगवा नगरिया लूटल हो... की प्रस्तुति की। तबले पर पं कुबेर मिश्र, हारमोनियम पर पं जमुना बल्लभ गुजराती, वायलिन पर संजय मिश्रा ने संगत की। इनके बाद पं शिवनाथ मिश्र और उनके पुत्र पं. देवव्रत मिश्र की सितार जुगलबंदी आरंभ हुई। इन्होंने सितार पर राग झिंझोटी की अवतारणा की। अलाप, जोड़ के बाद विलंबित एकताल में निबद्ध गत की बेजोड़ प्रस्तुति की। इसके बाद मध्य धमार ताल में निबद्ध गत बजाई। द्रुत तीनताल में गत के साथ ही पारंपरिक बनारस की गायकी अंग में धुन बजाकर उन्होंने विदा ली। तबले पर संगत की प्रशांत मिश्र ने।संचालन प्रीतेश आचार्य ने किया।
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