{"_id":"5c2a8727bdec2256c93f80f4","slug":"11546290983-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एटीएस ने चार महीने में 12.90 लाख के जाली नोट बरामद किए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एटीएस ने चार महीने में 12.90 लाख के जाली नोट बरामद किए
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। एटीएस की वाराणसी इकाई ने अक्तूबर में जिले सहित चंदौली, मऊ और आजमगढ़ से जाली नोटों के साथ चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। तब से अब तक एटीएस 12 लाख 90 हजार के जाली नोट बरामद कर चुकी है।
एटीएस के निरीक्षक शैलेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि गिरफ्त में आया नवीन पूर्व में गिरफ्तार किए गए आरोपियों के गिरोह से ही जुड़ा हुआ है। गिरोह की जड़ें बिहार और पश्चिम बंगाल तक में हैं। नवीन गिलट बाजार में किससे मिलने आया था और उसके संपर्क में अन्य कौन लोग हैं, इस संबंध में उससे मिली जानकारियों के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी। यह गिरोह चीन निर्मित प्रिंटर के सहारे स्टाम्प पेपर की मदद से जाली नोट बनाने में भी एक्सपर्ट है। पहाड़ी, जंगली क्षेत्रों के साथ ही जनपद मुख्यालयों से दूरदराज के गांवों में जाली नोट आसानी से चल जाते हैं। जाली नोटों के धंधे से जुड़े स्लीपिंग मॉड्यूल्स को चिह्नित करना आसान नहीं है, क्योंकि इनका मुख्य पेशा कुछ और होता है। मुख्य पेशे की आड़ में ये जाली नोटों को लाने, बेचने और खपाने का काम करते हैं।
एटीएस की वाराणसी इकाई के अनुसार बांग्लादेश से संचालित जाली नोटों का यह धंधा पूर्वांचल, मध्य प्रदेश के बघेलखंड और बुंदेलखंड के साथ महाराष्ट्र के पुणे समेत कई इलाकों तक फैला है। यह अंतरराष्ट्रीय गिरोह है, जिसके सदस्य पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश से लेकर दक्षिण एशिया के कई देशों में हैं। गिरोह के सदस्य व्हाट्स ऐप कॉल और विशिष्ट कोडयुक्त ई-मेल के सहारे आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
एटीएस के निरीक्षक शैलेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि गिरफ्त में आया नवीन पूर्व में गिरफ्तार किए गए आरोपियों के गिरोह से ही जुड़ा हुआ है। गिरोह की जड़ें बिहार और पश्चिम बंगाल तक में हैं। नवीन गिलट बाजार में किससे मिलने आया था और उसके संपर्क में अन्य कौन लोग हैं, इस संबंध में उससे मिली जानकारियों के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी। यह गिरोह चीन निर्मित प्रिंटर के सहारे स्टाम्प पेपर की मदद से जाली नोट बनाने में भी एक्सपर्ट है। पहाड़ी, जंगली क्षेत्रों के साथ ही जनपद मुख्यालयों से दूरदराज के गांवों में जाली नोट आसानी से चल जाते हैं। जाली नोटों के धंधे से जुड़े स्लीपिंग मॉड्यूल्स को चिह्नित करना आसान नहीं है, क्योंकि इनका मुख्य पेशा कुछ और होता है। मुख्य पेशे की आड़ में ये जाली नोटों को लाने, बेचने और खपाने का काम करते हैं।
विज्ञापन
एटीएस की वाराणसी इकाई के अनुसार बांग्लादेश से संचालित जाली नोटों का यह धंधा पूर्वांचल, मध्य प्रदेश के बघेलखंड और बुंदेलखंड के साथ महाराष्ट्र के पुणे समेत कई इलाकों तक फैला है। यह अंतरराष्ट्रीय गिरोह है, जिसके सदस्य पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश से लेकर दक्षिण एशिया के कई देशों में हैं। गिरोह के सदस्य व्हाट्स ऐप कॉल और विशिष्ट कोडयुक्त ई-मेल के सहारे आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
विज्ञापन