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वेटिंग फार गोदो ने दिखाई मध्यकाल के मानव की दुर्दशा0
Updated Fri, 23 Mar 2018 02:16 AM IST
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वाराणसी। बीसवीं सदी के मध्यकाल में यूरोप की मानव दुर्दशा पर वेटिंग फार गोदो ने सभी का ध्यान खींचा। थिएटर ओलंपिक की प्रस्तुति में नागरी नाटक मंडली पर राजस्थान के समूह अध्यात्म नाट्य अकादमी की प्रस्तुति दर्शकों के लिए यादगार बन गई। गुरुवार को सैमुअल बैकेट द्वारा लिखित नाटक वेटिंग फार गोदो में दो चरित्र ब्लादिमिर और एस्त्रागोन किसी गोदो नाम के व्यक्ति के आने की अंतहीन और व्यर्थ प्रतीक्षा करते हैं।
वेटिंग फार गोदो में चरित्रों के बारे में नाटक है। नाटक इस बारे में नहीं, कि उन चरित्रों के साथ क्या घटता है बल्कि, उनके बारे में, बिना किसी उत्तर या निश्चिंतताओं के, मनुष्यों का एक चित्रण था। क्या कोई गोदो है ? वो कैसा दिखाई, देता है ? वो कैसे व्यवहार करता है ? उसके लिए वो क्या करेगा ? क्या उन दोनों को उसमें अपनी आशाएं झोंक देनी चाहिए ? उनके पास कोई उत्तर नहीं है, सिवाय इसके कि वे एक बहुत फिसलन भरी जमीन पर खड़े हैं। अपनी आषाओं के लिए किसी ठोस आधार के अभाव में वे यथार्थ में जमीन पर गिरते रहते हैं। चरित्रों में व्लादिमिर नाटक की आत्मा और एस्त्रागोन देह हैं, जबकि पोजो पूरी स्पष्टता के साथ उनका मालिक है और लकी दास है। एस्त्रागोन की भूमिका में महमूद अली, ब्लादिमिर की भूमिका में उमेश वर्मा, पुष्कर शरद, योगेंद्र सिंह परमार, करणी सिंह चारण, रोहन सिंह ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। सहायक निर्देशक करणी सिंह चारण, मंच प्रबंधक आसिफ शेर खान, वेशभूषा संकेत, तकनीकी सहायता समरवीर सिंह, अंशुल अवस्थी, प्रकाश सक्षम, संकेत, रूपसज्जा प्रीति दूबे, दृश्यबंध राजा भाट, देव फौजदार की रही।
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वेटिंग फार गोदो में चरित्रों के बारे में नाटक है। नाटक इस बारे में नहीं, कि उन चरित्रों के साथ क्या घटता है बल्कि, उनके बारे में, बिना किसी उत्तर या निश्चिंतताओं के, मनुष्यों का एक चित्रण था। क्या कोई गोदो है ? वो कैसा दिखाई, देता है ? वो कैसे व्यवहार करता है ? उसके लिए वो क्या करेगा ? क्या उन दोनों को उसमें अपनी आशाएं झोंक देनी चाहिए ? उनके पास कोई उत्तर नहीं है, सिवाय इसके कि वे एक बहुत फिसलन भरी जमीन पर खड़े हैं। अपनी आषाओं के लिए किसी ठोस आधार के अभाव में वे यथार्थ में जमीन पर गिरते रहते हैं। चरित्रों में व्लादिमिर नाटक की आत्मा और एस्त्रागोन देह हैं, जबकि पोजो पूरी स्पष्टता के साथ उनका मालिक है और लकी दास है। एस्त्रागोन की भूमिका में महमूद अली, ब्लादिमिर की भूमिका में उमेश वर्मा, पुष्कर शरद, योगेंद्र सिंह परमार, करणी सिंह चारण, रोहन सिंह ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। सहायक निर्देशक करणी सिंह चारण, मंच प्रबंधक आसिफ शेर खान, वेशभूषा संकेत, तकनीकी सहायता समरवीर सिंह, अंशुल अवस्थी, प्रकाश सक्षम, संकेत, रूपसज्जा प्रीति दूबे, दृश्यबंध राजा भाट, देव फौजदार की रही।
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