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नए डिजाइन की बारीकियों से रूबरू हुए छात्र 00
Updated Fri, 23 Mar 2018 02:15 AM IST
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वाराणसी।
बीएचयू दृश्य कला संकाय और डिजाइन इनोवेशन सेंटर के तत्वावधान में चलने वाले तीन दिवसीय डिजाइन पिकनिक का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। इस दौरान डिजाइन पर काम करने वाले अलग-अलग विद्वानों ने इससे जुड़ी बारीकियां बताई। इसके साथ ही युवा कलाकारों के सवालों का जवाब देकर उनकी मन की जिज्ञासा भी शांत की।
संकाय में खुले आसमान के नीचे पिकनिक का उद्घाटन गुवाहाटी, लखनऊ आदि जगहों से आए विद्वानों ने किया। बतौर मुख्य वक्ता ग्राफिक डिजाइन और भारतीय रुपये के प्रतीक चिह्न के निर्माता डॉ. डी उदय कुमार ने छात्रों को सबसे पहले रुपये के प्रतीक चिन्ह की डिजाइन के बारे में बताया। आईआईटी गुवाहाटी में शिक्षक डॉ. उदय कुमार ने बताया कि इस चिन्ह को तैयार करने में उन्हें दो से तीन माह का समय लगा। आरबीआई की ओर से कराई गई एक प्रतियोगिता में उनका यह प्रयास रंग लाया और अधिकारियों ने इसका चयन करते हुए इसे लागू किया। कहा कि विजुअल कम्यूनिकेशन का दैनिक जीवन में बहुत महत्व है। लखनऊ विश्वविद्यालय से आए संजय ओझा और ड्राइंग रूम कंपनी के संस्थापक शीतल वर्मा ने इलस्ट्रेशन के प्रयोग की जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. हीरालाल प्रजापति ने कहा कि डिजाइन इस समय सभी की जरूरत बन गया है। आयोजन सचिव डॉ. मनीष अरोरा ने तीन दिवसीय पिकनिक के बारे में बताया कि यहां लखनऊ, दिल्ली, चंडीगढ़, आगरा, हैदराबाद, कोलकाता आदि जगहों से 200 प्रतिभागी शामिल हैं। इस दौरान डॉ. शांति स्वरूप सिन्हा, विजय सिंह, अमित कुमार, सौरभ सिंह आदि मौजूद रहे।
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बीएचयू दृश्य कला संकाय और डिजाइन इनोवेशन सेंटर के तत्वावधान में चलने वाले तीन दिवसीय डिजाइन पिकनिक का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। इस दौरान डिजाइन पर काम करने वाले अलग-अलग विद्वानों ने इससे जुड़ी बारीकियां बताई। इसके साथ ही युवा कलाकारों के सवालों का जवाब देकर उनकी मन की जिज्ञासा भी शांत की।
संकाय में खुले आसमान के नीचे पिकनिक का उद्घाटन गुवाहाटी, लखनऊ आदि जगहों से आए विद्वानों ने किया। बतौर मुख्य वक्ता ग्राफिक डिजाइन और भारतीय रुपये के प्रतीक चिह्न के निर्माता डॉ. डी उदय कुमार ने छात्रों को सबसे पहले रुपये के प्रतीक चिन्ह की डिजाइन के बारे में बताया। आईआईटी गुवाहाटी में शिक्षक डॉ. उदय कुमार ने बताया कि इस चिन्ह को तैयार करने में उन्हें दो से तीन माह का समय लगा। आरबीआई की ओर से कराई गई एक प्रतियोगिता में उनका यह प्रयास रंग लाया और अधिकारियों ने इसका चयन करते हुए इसे लागू किया। कहा कि विजुअल कम्यूनिकेशन का दैनिक जीवन में बहुत महत्व है। लखनऊ विश्वविद्यालय से आए संजय ओझा और ड्राइंग रूम कंपनी के संस्थापक शीतल वर्मा ने इलस्ट्रेशन के प्रयोग की जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. हीरालाल प्रजापति ने कहा कि डिजाइन इस समय सभी की जरूरत बन गया है। आयोजन सचिव डॉ. मनीष अरोरा ने तीन दिवसीय पिकनिक के बारे में बताया कि यहां लखनऊ, दिल्ली, चंडीगढ़, आगरा, हैदराबाद, कोलकाता आदि जगहों से 200 प्रतिभागी शामिल हैं। इस दौरान डॉ. शांति स्वरूप सिन्हा, विजय सिंह, अमित कुमार, सौरभ सिंह आदि मौजूद रहे।
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