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48 घंटे पहले देनी थी सूचना, दी 10 घंटे पहले

Sat, 13 Jan 2018 02:01 AM IST
Updated Sat, 13 Jan 2018 02:01 AM IST
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48 घंटे पहले देनी थी सूचना, दी 10 घंटे पहले
वाराणसी। रमचंदीपुर गांव में हुए बालू खनन के मामले में प्रशासन फंसता जा रहा है। हाईकोर्ट की ओर से भेजी गई जांच कमेटी के समक्ष 26 में से किसी भी याचिकाकर्ता के मौके पर न पहुंचने के मामले में प्रशासनिक अमले की भूमिका सवालों के घेरे में है। प्रशासन ने हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी कर मिलीभगत को अंजाम देने के लिए याचिकाकर्ताआें को देर रात दस घंटे पहले जानकारी दी। मामले को लेकर प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है।
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हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश था कि 11 जनवरी को जांच टीम रमचंदीपुर जाएगी। इसके 48 घंटे पूर्व सभी 26 याचिकाकर्ताओं को मौके पर पहुंचने संबंधी जानकारी दे दी जाए। खनन विभाग ने हाईकोर्ट के इस आदेश को दबा लिया। खानापूरी के लिए महज दस घंटे पहले बुधवार रात 12 बजे के बाद जाल्हूपुर चौकी इंचार्ज और सदर तहसील के कर्मचारियों ने याचिकाकर्ताओं को टीम के आने के बारे में जानकारी दी।
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मामले में रमचंदीपुर के चंद्रिका यादव समेत 26 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि प्रशासन ने ढाब क्षेत्र में खनन का पट्टा दिया है। इसकी जांच के लिए हाईकोर्ट ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण की टीम रमचंदीपुर में 11-12 जनवरी को भेजने का फैसला किया। चार जनवरी को जिला प्रशासन को इसकी सूचना भी दे दी गई। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रशासन ने हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को चार जनवरी को आदेश का फैक्स भेज दिया। आदेश में लिखा था कि केंद्रीय टीम के पहुंचने से 48 घंटे पूर्व याचिकाकर्ताओं को इसकी सूचना दे दी जाए। जांच के लिए टीम के आगमन संबंधी कागजात जिला खनन अधिकारी की फाइल में रख दिया गया। इसी दौरान जिला खनन अधिकारी अनिल सिंह सात जनवरी को छुट्टी पर चले और 10 जनवरी की देर शाम लौटे।
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11 जनवरी को केंद्रीय टीम आने वाली थी इसलिए 10 जनवरी की शाम को हाईकोर्ट के कागजात खंगाले जाने लगे। फाइल एडीएम प्रशासन एमएन उपाध्याय के पास पहुंची। तब पता चला कि याचिकाकर्ताओं को अब तक इसकी जानकारी ही नहीं दी गई है। यही वजह रही कि जांच के दौरान एक भी याचिकाकर्ता रमचंदीपुर नहीं पहुंचा। उनके अधिवक्ता ने पहले से बताया था कि नोटिस 48 घंटे पहले देनी थी जो नहीं दी गई। वहीं खनन अधिकारी अपनी बेपरवाही से फिर डीएम योगेश्वर राम मिश्र के रडार पर हैं। उनके खिलाफ पूर्व में ही कार्रवाई की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
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