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शिव बारात में नजर आएगी देश की सरहद
Updated Wed, 07 Feb 2018 02:28 AM IST
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वाराणसी। देवाधिदेव महादेव शिव की नगरी काशी महाशिवरात्रि पर सज जाएगी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर सहित शहर के सभी शिवालयों में विशेष शृंगार और पूजन का आयोजन किया गया है। शहर में निकलने वाली परंपरागत शिव बारातों में भारत-पाकिस्तान की सीमा पर फैले तनाव समेत कई सामाजिक मुद्दों पर झांकिया निकालने की तैयारी की जा रही है। शिव बारात में महादेव की 16 फीट की ऊंची प्रतिमा आकर्षण का केंद्र होगी।
काशी में 13 फरवरी को ही पर्व मनाए जाने के कारण रुद्राभिषेक, शिव बारात आदि की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मुख्य बारात दारानगर से निकाली जाती है और इसके अलावा तिलभाण्डेश्वर महादेव, लालकुटी व्यायामशाला नईबस्ती लक्सा, रोहनिया के भास्करा कला, चांदपुर इंडस्ट्रीयल इस्टेट एवं त्रिलोचन महादेव, गायघाट से भी बारात निकाली जाएगी। दारानगर की प्राचीन महाशिवरात्रि बारात समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस बार झांकियों के विषय अभी तय नहीं हुए हैं लेकिन दो-तीन बिंदुओं पर चर्चा चल रही है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव को विषय बनाया जा सकता है। यह भी चर्चा है कि विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण पर भी केंद्रित झांकी हो सकती है। उसका शीर्षक विश्वनाथ की नगरी में अनाथ रखा जाएगा।
शिव बारात समिति, लक्सा के अध्यक्ष अजय वर्मा ने बताया कि इस बार की बारात में 16 फीट ऊंची भगवान शिव और गुफा में बैठी देवी की मूर्ति मुख्य आकर्षण रहेगी। इसके अलावा करीब 20 लाग विमान होंगे। बारात शाम पांच बजे से लक्सा स्थित नईबस्ती के लालकुटी अखाड़ा से निकाली जाएगी। तिलभांडेश्वर समिति की बारात में इस बार भगवान शिव को अघोरी रूप में दिखाया जाएगा। समिति के अध्यक्ष रामबाबू यादव ने बताया कि तिलभांडेश्वर महादेव स्वयंभू स्वरूप में दिखेंगे। काशी विश्वनाथ महाकाल डमरु दल आगे आगे चलेगा। तिलभांडेश्वर मंदिर परिसर में दो दिवसीय संगीत महोत्सव भी होगा।
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काशी में 13 फरवरी को ही पर्व मनाए जाने के कारण रुद्राभिषेक, शिव बारात आदि की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मुख्य बारात दारानगर से निकाली जाती है और इसके अलावा तिलभाण्डेश्वर महादेव, लालकुटी व्यायामशाला नईबस्ती लक्सा, रोहनिया के भास्करा कला, चांदपुर इंडस्ट्रीयल इस्टेट एवं त्रिलोचन महादेव, गायघाट से भी बारात निकाली जाएगी। दारानगर की प्राचीन महाशिवरात्रि बारात समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस बार झांकियों के विषय अभी तय नहीं हुए हैं लेकिन दो-तीन बिंदुओं पर चर्चा चल रही है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव को विषय बनाया जा सकता है। यह भी चर्चा है कि विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण पर भी केंद्रित झांकी हो सकती है। उसका शीर्षक विश्वनाथ की नगरी में अनाथ रखा जाएगा।
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शिव बारात समिति, लक्सा के अध्यक्ष अजय वर्मा ने बताया कि इस बार की बारात में 16 फीट ऊंची भगवान शिव और गुफा में बैठी देवी की मूर्ति मुख्य आकर्षण रहेगी। इसके अलावा करीब 20 लाग विमान होंगे। बारात शाम पांच बजे से लक्सा स्थित नईबस्ती के लालकुटी अखाड़ा से निकाली जाएगी। तिलभांडेश्वर समिति की बारात में इस बार भगवान शिव को अघोरी रूप में दिखाया जाएगा। समिति के अध्यक्ष रामबाबू यादव ने बताया कि तिलभांडेश्वर महादेव स्वयंभू स्वरूप में दिखेंगे। काशी विश्वनाथ महाकाल डमरु दल आगे आगे चलेगा। तिलभांडेश्वर मंदिर परिसर में दो दिवसीय संगीत महोत्सव भी होगा।
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