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स्वस्थ व्यक्ति ही सशक्त राष्ट्र का कर सकता है निर्माण
Updated Sat, 13 Jan 2018 02:09 AM IST
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वाराणसी। स्वास्थ्य का धन सभी के लिए बहुत जरूरी है। जिस तरह जीवन में हर प्राणी के लिए भोजन आवश्यक है, उसी तरह स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम करना भी आवश्यक है। स्वस्थ व्यक्ति ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। अगर पूरे देश का कल्याण चाहते हैं तो हर घर में गीता बेहद जरूरी है। उक्त बातें स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने शुक्रवार को अर्दली बाजार स्थित अखाड़ा जिम में आयोजित सत्संग में कहीं।
उन्होंने कहा कि सत्य ही धर्म है और यही सनातन है। अनन्य भाव से भगवान का स्मरण करने वाला कभी भी परेशान नहीं रहता है। यह बात भगवान श्री कृष्ण ने भागवत गीता में कही है। गीता जीवन एवं अध्यात्म का जीवंत रूप है। इसके अध्ययन एवं पाठ से व्यक्ति के अंदर जबरदस्त बदलाव होता है। लोगों में यह भ्रांतियां पैदा की गईं कि महाभारत न पढ़ना, घर में न रखना अन्यथा झगड़ा हो जाएगा, महाभारत हो जाएगा। श्रद्धावश जब लोगों ने महाभारत के मर्म अर्थात श्रीमद्भागवत गीता को अलग निकाल लिया तो कहा जाने लगा कि इसे घर में मत रखना वरना बच्चे साधु हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि गीता में हमारे धर्म का सार तत्व है। गीता के माध्यम से ही हमारे सभी संकट दूर होंगे और भारत पुन: विश्व गुरु के सिंहासन पर विराजमान हो जाएगा। साधु-संतों की सेवा और भंडारा कभी व्यर्थ नहीं जाता है। वह पुण्य हमारे जीवन में फलित होता है और आगे बढ़ने में मदद करता है। सत्संग के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सत्संग के उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन अखाड़ा जिम के निदेशक प्रशांत कुमार सिंह, डब्बू ने किया। इस अवसर पर सुरेंद्र सिंह सीओ, राममूर्ति सिंह त्रिमूर्ति सिंह, ओमप्रकाश सिंह, बाबा सिंह, विपिन सिंह, अलक्षेंद्र, रुद्र आदि मौजूद रहे। इसके पूर्व बाबतपुर एयरपोर्ट का स्वामी अड़गड़ानंद का भक्तों ने स्वागत किया।
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उन्होंने कहा कि सत्य ही धर्म है और यही सनातन है। अनन्य भाव से भगवान का स्मरण करने वाला कभी भी परेशान नहीं रहता है। यह बात भगवान श्री कृष्ण ने भागवत गीता में कही है। गीता जीवन एवं अध्यात्म का जीवंत रूप है। इसके अध्ययन एवं पाठ से व्यक्ति के अंदर जबरदस्त बदलाव होता है। लोगों में यह भ्रांतियां पैदा की गईं कि महाभारत न पढ़ना, घर में न रखना अन्यथा झगड़ा हो जाएगा, महाभारत हो जाएगा। श्रद्धावश जब लोगों ने महाभारत के मर्म अर्थात श्रीमद्भागवत गीता को अलग निकाल लिया तो कहा जाने लगा कि इसे घर में मत रखना वरना बच्चे साधु हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि गीता में हमारे धर्म का सार तत्व है। गीता के माध्यम से ही हमारे सभी संकट दूर होंगे और भारत पुन: विश्व गुरु के सिंहासन पर विराजमान हो जाएगा। साधु-संतों की सेवा और भंडारा कभी व्यर्थ नहीं जाता है। वह पुण्य हमारे जीवन में फलित होता है और आगे बढ़ने में मदद करता है। सत्संग के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सत्संग के उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन अखाड़ा जिम के निदेशक प्रशांत कुमार सिंह, डब्बू ने किया। इस अवसर पर सुरेंद्र सिंह सीओ, राममूर्ति सिंह त्रिमूर्ति सिंह, ओमप्रकाश सिंह, बाबा सिंह, विपिन सिंह, अलक्षेंद्र, रुद्र आदि मौजूद रहे। इसके पूर्व बाबतपुर एयरपोर्ट का स्वामी अड़गड़ानंद का भक्तों ने स्वागत किया।
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