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नीट : टॉप टेन में काशी के आर्यन का परचम
Updated Sat, 24 Jun 2017 02:07 AM IST
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वाराणसी। होनहार आर्यन राज ने एक बार फिर काशी को फख्र करने का मौका दिया है। नीट में ऑल इंडिया नौंवी रैंक हासिल कर आर्यन राज सिंह सूबे में अव्वल रहे। दिल्ली पब्लिक स्कूल वाराणसी के छात्र आर्यन ने हाल ही में घोषित एम्स 2017 की प्रवेश परीक्षा में भी 11वीं रैंक हासिल की थी। आर्यन की सफलता पर न सिर्फ माता-पिता निहाल हैं बल्कि उसके साथियों की खुशियां भी आसमान छू रही हैं।
बीएचयू के संयुक्त कुलसचिव (विकास) संजय कुमार के बेटे आर्यन राज ने 720 में 690 अंक हासिल कर ऑल इंडिया टॉप टेन में नौंवे स्थान पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। फिलहाल आर्यन एम्स नई दिल्ली से एमबीबीएस करेंगे। 12वीं में भी आर्यन ने 96.2 प्रतिशत अंक हासिल कर माता-पिता को गौरवान्वित किया है। आर्यन ने बताया कि 12-13 घंटे की रोजाना की पढ़ाई से उन्हें यह सफलता मिली है। यही नहीं, इसके पहले भी आर्यन ने एनटीएससी स्कॉलरशिप पाई है। किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना में भी 14वां स्थान प्राप्त कर चुके हैं।
ह्यूमन जीनोम पर रिसर्च करना चाहते हैं आर्यन : आर्यन का कहना है कि चूंकि पिछले 15 साल से एम्स लगातार टॉप पर है इसलिए वे एम्स में अच्छी फैकल्टी और अच्छे बैच के साथ शोध के बेहतर और नए आयाम तलाशेंगे। चिकित्सा की किस विधा में आगे बढ़ना है, आर्यन ने अभी यह तो तय नहीं किया है लेकिन वे ह्यूमन जीनोम व जेनेटिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रिसर्च करना चाहते हैं।
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बीएचयू के संयुक्त कुलसचिव (विकास) संजय कुमार के बेटे आर्यन राज ने 720 में 690 अंक हासिल कर ऑल इंडिया टॉप टेन में नौंवे स्थान पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। फिलहाल आर्यन एम्स नई दिल्ली से एमबीबीएस करेंगे। 12वीं में भी आर्यन ने 96.2 प्रतिशत अंक हासिल कर माता-पिता को गौरवान्वित किया है। आर्यन ने बताया कि 12-13 घंटे की रोजाना की पढ़ाई से उन्हें यह सफलता मिली है। यही नहीं, इसके पहले भी आर्यन ने एनटीएससी स्कॉलरशिप पाई है। किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना में भी 14वां स्थान प्राप्त कर चुके हैं।
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ह्यूमन जीनोम पर रिसर्च करना चाहते हैं आर्यन : आर्यन का कहना है कि चूंकि पिछले 15 साल से एम्स लगातार टॉप पर है इसलिए वे एम्स में अच्छी फैकल्टी और अच्छे बैच के साथ शोध के बेहतर और नए आयाम तलाशेंगे। चिकित्सा की किस विधा में आगे बढ़ना है, आर्यन ने अभी यह तो तय नहीं किया है लेकिन वे ह्यूमन जीनोम व जेनेटिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रिसर्च करना चाहते हैं।
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