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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   105 years of BHU: draft to open Hindu University was prepared 116 years ago 

बीएचयू के 105 साल: 116 साल पहले तैयार हुआ था हिंदू विश्वविद्यालय खोलने का मसौदा

Sat, 13 Feb 2021 04:53 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 13 Feb 2021 04:53 PM IST
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105 years of BHU: draft to open Hindu University was prepared 116 years ago 
काशी हिंदू विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।

बीएचयू की स्थापना चार फरवरी 1916 को हुई थी। तब से लेकर हर साल बसंत पंचमी के दिन विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाया जाता है। आगामी 16 फरवरी को काशी हिंदू विश्वविद्यालय का 105 वां स्थापना दिवस मनाया जाएगा। विश्वविद्यालय के 105 साल का सफर ऐतिहासिक है। महामना मदन मोहन मालवीय के प्रयास से विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़े कई पहलुओं को अवगत कराने के उद्देश्य से अमर उजाला की ओर से खबरों की श्रृंखला प्रकाशित की जाएगी। पेश है पहली किस्त...

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बात 1905 की है, जब टाउनहाल में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 21वां अधिवेशन गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में आयोजित किया गया था। इसमें शामिल होने के लिए देश भर के कई वरिष्ठ नेता, जाने माने शिक्षाविद बनारस आए थे। इसी दौरान 31 दिसंबर 1905 को पंडित मदन मोहन मालवीय ने टाउनहाल में विशिष्ट शिक्षाविदों और कई प्रांतों से आए हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों की विशेष बैठक बुलाई। इसमें हिंदू विश्वविद्यालय की विवरण पुस्तिका जो लोगों को पहले ही भेजी जा चुकी थी, उस पर चर्चा की गई।
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इसी बैठक में विवरण पुस्तिका को अंतिम रूप देने और योजना को प्रोत्साहित करने के लिए एक अस्थायी समिति का भी गठन किया गया है। इस तरह कहा जा सकता है कि बीएचयू को खोलने का मसौदा भी टाउनहाल की बैठक में ही रखा गया था। इसके बाद 20 से 29 जनवरी 1906 तक कुंभ मेले के दौरान गोवर्धन मठ के परमहंस जगदगुरु शंकराचार्य की अध्यक्षता में सनातन धर्म महासभा की बैठक में भी इस योजना को प्रस्तुत किया गया। खास बात ये है कि इसी महासभा में धार्मिक और पंथनिरपेक्ष शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई संकल्प पारित किए गए।

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महासभा में पारित हुए थे ये संकल्प
-भारतीय विश्वविद्यालय के नाम से बनारस में एक हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना।
-इस विश्वविद्यालय में आयुर्वेदिक (चिकित्सा), वैदिक, कृषि, भाषा विज्ञान, अर्थशास्त्र, ललित कला महाविद्यालय और विभाग भी शामिल होंगे। 
-विश्वविद्यालय की योजना को मूर्त रूप देने के लिए समिति गठित की जाए। इसके सचिव महामना मदन मोहन मालवीय होंगे। 
-31 दिसंबर 1905 को टाउनहाल में हुई बैठक में गठित अस्थायी समिति के सदस्यों को इस समिति का सदस्य बनाए जाने का निर्णय लिया गया। 

12 मार्च 1906 को जारी हुई थी पहली विवरणिका
महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने त्रिवेणी संगम पर प्रस्तावित हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया। उस समय हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए एक करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई और यह प्रस्ताव पास किया गया कि जैसे ही तीस लाख रुपये जुट जाएंगे या एक लाख सालाना की आय सुनिश्चित हो जाएगी, विश्वविद्यालय की नींव पड़ जाएगी। जनवरी 1906 में सनातन धर्म महासभा की बैठक में लिए गए निर्णय को शामिल करते हुए महामना ने बतौर समिति के सचिव के रूप में 12 मार्च 1906 को विश्वविद्यालय की पहली विवरणिका जारी की। 

बीएचयू स्थापना के लिए भिखारी ने भी दिया था दान 
महामना ने हिंदू यूनिवर्सिटी बनाए जाने के लिए लोगों से धन संग्रह का अनुरोध किया था। सभी ने सहर्ष स्वीकार किया। बड़े-बड़े राजा, महाराजा आदि ने तो दान दिया ही था लेकिन यहां एक भिखारी भी ऐसा था, जिसने स्थापना के लिए अपनी पूरी दिन की मेहनत से मिले धन को भी दान में महामना मालवीय जी को दिया था। महामना के प्रपौत्र अवकाश प्राप्त जज गिरधर मालवीय का कहना है कि जिस भिखारी ने एक दिन का पैसा महामना को भेंट किया था, उसका नाम भी दानदाताओं की सूची में दर्ज है। महामना ने इसको कोट भी किया है।

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