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प्रधान, लेखपाल से तंग बुजुर्ग ने की आत्महत्या
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रोहनिया। वंदेपुर गांव निवासी प्रेमशंकर गौड़ (60) बुधवार की सुबह अपने घर के पीछे बैर के पेड़ की टहनी के सहारे रस्सी के फंदे के सहारे लटके मिले। बुजुर्ग के पास से मिले सुसुाइड नोट में ग्राम प्रधान, क्षेत्रीय लेखपाल सहित छह को आत्महत्या के लिए विवश करने का कसूरवार ठहराया गया है। पुलिस ने बुजुर्ग के बेटे रतनलाल की तहरीर पर छह के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने और एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया।
रतनलाल ने बताया कि वो बीएसएफ में नौकरी करता है और दस दिन पहले छुट्टी पर घर आया है। गांव के मानिक चंद्र मिश्र से उसके पिता का जमीन संबंधी विवाद चल रहा था। इसके साथ ही ग्राम प्रधान राजबिहारी पटेल, क्षेत्रीय लेखपाल विनोद भारती, मानिकचंद मिश्रा, मो. नईम, मो. लाल हुसैन और शिव आधार पटेल उसके पिता का मानसिक उत्पीड़न करते थे। मंगलवार की रात खाना खाकर सभी लोग सोने चले गए। सुबह प्रेमशंकर अपने कमरे में नहीं मिले तो उनकी खोजबीन शुरू की गई। थोड़ी देर बाद पता लगा कि प्रेमशंकर घर के पीछे स्थित बैर के पेड़ से लटके हुए हैं।
शौचालय से जाति संवर्ग तक का विवाद
सुसाइड नोट के अनुसार ग्राम प्रधान राजबिहारी पटेल शौचालय बनाने में विरोध करता था। राजबिहारी, मो. नईम, मो. लाल और शिव आधार पटेल उनके परिवार को जीने-खाने में काफी बाधा डाल रहे थे। वहीं, रतनलाल का कहना था कि आरोपियों ने हम लोगों के खिलाफ प्रशासन को शिकायती पत्र दिया था कि हम अनुसूचित जाति संवर्ग में नहीं आते हैं। उधर, ग्राम प्रधान राजबिहारी पटेल ने कहा कि जाति संबंधी जांच पूर्व प्रधान के समय में हुई थी और हमसे रिपोर्ट मांगी गई थी तो दी थी। मामले में रंजिशन फंसाया जा रहा है।
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रतनलाल ने बताया कि वो बीएसएफ में नौकरी करता है और दस दिन पहले छुट्टी पर घर आया है। गांव के मानिक चंद्र मिश्र से उसके पिता का जमीन संबंधी विवाद चल रहा था। इसके साथ ही ग्राम प्रधान राजबिहारी पटेल, क्षेत्रीय लेखपाल विनोद भारती, मानिकचंद मिश्रा, मो. नईम, मो. लाल हुसैन और शिव आधार पटेल उसके पिता का मानसिक उत्पीड़न करते थे। मंगलवार की रात खाना खाकर सभी लोग सोने चले गए। सुबह प्रेमशंकर अपने कमरे में नहीं मिले तो उनकी खोजबीन शुरू की गई। थोड़ी देर बाद पता लगा कि प्रेमशंकर घर के पीछे स्थित बैर के पेड़ से लटके हुए हैं।
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शौचालय से जाति संवर्ग तक का विवाद
सुसाइड नोट के अनुसार ग्राम प्रधान राजबिहारी पटेल शौचालय बनाने में विरोध करता था। राजबिहारी, मो. नईम, मो. लाल और शिव आधार पटेल उनके परिवार को जीने-खाने में काफी बाधा डाल रहे थे। वहीं, रतनलाल का कहना था कि आरोपियों ने हम लोगों के खिलाफ प्रशासन को शिकायती पत्र दिया था कि हम अनुसूचित जाति संवर्ग में नहीं आते हैं। उधर, ग्राम प्रधान राजबिहारी पटेल ने कहा कि जाति संबंधी जांच पूर्व प्रधान के समय में हुई थी और हमसे रिपोर्ट मांगी गई थी तो दी थी। मामले में रंजिशन फंसाया जा रहा है।
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