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फ्लोराइड पीड़ितों की सुधि नहीं-SONBHADRA

Wed, 20 Feb 2019 11:14 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 20 Feb 2019 11:14 PM IST
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फ्लोराइड पीड़ितों की सुधि नहीं-SONBHADRA
सोनभद्र/विंढमगंज। आदिवासी बहुल जिले में फ्लोराइड प्रभावित एरिया के हजारों बाशिंदे जिंदगी-मौत से जूझने के लिए छोड़ दिए गए हैं। यहां का पानी ही इनके लिए जहर बन गया है। इससे राहत के लिए स्थापित 1054 फ्लोराइड रिमूवल प्लांटों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। जो रिमूवल प्लांट चालू हैं उनकी भी हालत ठीक नहीं है। ऐसे में यहां युवावस्था में बुढ़ापे की स्थिति और ऐंठते शरीर के साथ तिल-तिल कर मरने की पीड़ा लोगोें को झेलनी पड़ रही है। जिले के चार ब्लाक दुद्धी, चोपन, बभनी और म्योरपुर के 269 गांव फ्लोराइड की अधिकता से प्रभावित हैं। इसमें म्योरपुर ब्लाक के कुसुम्हा, रासपहरी, गंभीरपुर, गोविंदपुर, जरहा, महुली और दुद्धी ब्लाक के मनबसा, कटौली, मझौली, जोरूखांड़, जामपानी, झारोकला तथा चोपन ब्लाक के पिपरहवा, नई बस्ती, झिरगाडंडी, रोहनियादामर, निरुइयादामर, कचनरवा, कुड़वा व बभनी ब्लाक के नवाटोला, आसनडीह, बिछियारी, चकचपकी, भवंर सहित 24 से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां की बड़ी आबादी विकलांगता का अभिशाप झेल रही है। 2001 में सेंटर फार साइंस एनवायरमेंट संस्था की तरफ से इस मामले को उठाया गया, तब सरकार थोड़ी गंभीर हुई। वर्ष 2013 में एनजीटी में याचिका दाखिल हुई, तब प्रभावित गांवों में फ्लोराइड की अधिकता वाले हैंडपंपों को चिह्नित कर फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाने का काम शुरू हुआ। 2013-14 और 2014-15 में 1054 हैंडपंपों में रिमूवल प्लांट लगाए गए। इसमें से अब तक 800 प्लांटों के संचालन का ठेका खत्म हो चुका है। शेष की भी अवधि जल्द समाप्त होने वाली है। अत्यधिक प्रभावित गांवों के पानी में प्रति लीटर फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिग्रा के मुकाबले 14 होने के चलते प्रभावी राहत नहीं मिल पाई। लेकिन रिमूवल प्लांटों के संचालन-रख-रखाव में उदासीनता के चलते सवाल उठते रहे हैं। अब बजट न होने की बात कहकर नोडल विभाग (जल निगम एक्सईएन शाखा) रख-रखाव, संचालन की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। प्रशासन की तरफ से भी कोई पहल सामने नहीं आई है। जबकि एनजीटी प्रदूषण प्रभावित इलाके में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का निर्देश दे चुकी है। गत दो दिसंबर को ओवरसाइट कमेटी के दौरे में भी यह मसला प्रमुख था।
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फ्लोरोसिस और इसके नुकसान
सोनभद्र। शरीर में फ्लोराइड की अधिकता से फ्लोरोसिस रोग होता है। यह दंत और कंकालीय दो तरह का होता है। प्रति मिली लीटर दो से तीन मिलीग्राम मात्रा रहने पर दांत पर असर दिखता है। इससे ज्यादा मात्रा बढ़ने पर इसका सीधा असर शरीर की हड्डियों और प्रतिरोधक क्षमता पर दिखता है। इसके चलते जहां जिले में कई परिवार तीन पीढ़ी से विकलांगता की मार झेल रहे हैँ। वहीं इससे होने वाली मौत असहनीय दर्द के चलते काफी पीड़ादायी होती है।
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सभी रिमूवल प्लांटों के संचालन का ठेका पांच साल के लिए दिया गया था। इसमें अधिकांश का खत्म हो चुका है। आगे के लिए शासन से कोई बजट नहीं मिला है। डीएम के निर्देश पर ठप पड़े 550 प्लांटों के बजट के लिए डीपीआरओ के यहां माह भर पूर्व ही पत्र भेज दिया था, जिसका अभी कोई उत्तर नहीं आया है।
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हिमांशु यादव, एक्सईएन जल निगम यूनिसेफ शाखा।

प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर पत्र आता है तो उचित कार्यवाही की जाएगी।
आरके भारती, डीपीआरओ सोनभद्र।
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