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वाहन तो छोड़िए, पैदल निकलकर ही दिखाइए
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वाराणसी। फुटपाथ पर पहला हक पैदल चलने वालों का है, मगर शहर में फुटपाथ पर या तो दुकानें सजी रहती हैं या फिर बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े होते हैं। ऐसे में पैदल चलने वालों के लिए जगह ही नहीं बचती है। मजबूरी में उन्हें सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच चलना पड़ता है, जिससे वह असुरक्षित रहते हैं। सोमवार से शुरू हुए सड़क सुरक्षा सप्ताह में पैदल चलने वालों के लिए ऐसा कुछ नहीं किया गया, जिससे वह फुटपाथ पर आराम से निकल सकें। सड़क सुरक्षा सप्ताह सिर्फ रस्म अदायगी साबित हो रहा है।
एसपी ट्रैफिक सुरेश चंद्र रावत के अनुसार, शहर में प्रतिवर्ष 220 जुलूस निकलते हैं। 186 स्कूलों के 1500 वाहन हैं। पांच हजार से ज्यादा ऑटो और छह हजार से ज्यादा ई-रिक्शा हैं। 12 लाख अन्य प्रकार के वाहन चलते हैं और दो लाख वाहन रोजाना आते-जाते हैं। वाहनों के इन आंकड़ों को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि शहर की सड़कों पर पैदल चलना कितना जोखिम भरा काम है। इसके बावजूद कभी फुटपाथ को पैदल चलने योग्य बनाने का अभियान ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम और जिला प्रशासन के स्तर से नहीं किया गया। इन हालात में इस बार भी सड़क सुरक्षा सप्ताह कुछ बैठकों और कार्यशालाओें तक सीमित रह जाएगा और कोई सार्थक नतीजा नहीं निकलेगा।
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एसपी ट्रैफिक सुरेश चंद्र रावत के अनुसार, शहर में प्रतिवर्ष 220 जुलूस निकलते हैं। 186 स्कूलों के 1500 वाहन हैं। पांच हजार से ज्यादा ऑटो और छह हजार से ज्यादा ई-रिक्शा हैं। 12 लाख अन्य प्रकार के वाहन चलते हैं और दो लाख वाहन रोजाना आते-जाते हैं। वाहनों के इन आंकड़ों को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि शहर की सड़कों पर पैदल चलना कितना जोखिम भरा काम है। इसके बावजूद कभी फुटपाथ को पैदल चलने योग्य बनाने का अभियान ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम और जिला प्रशासन के स्तर से नहीं किया गया। इन हालात में इस बार भी सड़क सुरक्षा सप्ताह कुछ बैठकों और कार्यशालाओें तक सीमित रह जाएगा और कोई सार्थक नतीजा नहीं निकलेगा।
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