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गंगा तट पर आस्था और भक्ति का संगम
Updated Sat, 24 Feb 2018 01:16 AM IST
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सीतामढ़ी। धार्मिक और पौराणिक स्थली सीतामढ़ी में धर्म के क्षेत्र में एक नया इतिहास कायम हुआ है। उज्जैन के बाबा महाकाल को समर्पित सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण महाअनुष्ठान, श्री सीताराम महायज्ञ, वाल्मीकि रामायण पर श्री रामकथा, अखंड भंडारा, भजन, प्रभु संकीर्तन आदि धार्मिक महा अनुष्ठान का शुक्रवार को आस्था, भक्ति और विश्वास के संगम के बीच भव्य समापन हुआ।
मां जाह्नवी की अविरल धारा, उत्तर प्राचीन मंदिर में विराजमान जगत जननी माता सीता, पश्चिम में यज्ञ का भव्य मंडप और पूरब में श्मशान। इन सब के मध्य में महाअनुष्ठान स्थल जहां 11 दिनों तक श्रद्धा, आस्था, विश्वास के साथ एक अविष्मरणीय, मनोहारी, अद्भुत, आंतरिक आनंद के बीच शिवभक्तों ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण श्री राम कथा, भजन , मन्त्रोच्चार के बीच कर मंदाकिनी के पावन घाट पर स्वर्गिक छटा बिखेर दी। सायंकालीन बेला में पार्थिव शिवलिंगों का महाभिषेक, भष्मारती, और असंख्य दीयों से मां गंगा आरती और पार्थिव शिवलिंगों का पतित पावनी में विसर्जन सब कुछ अलौकिक रहा। महाअनुष्ठान के अधिष्ठाता स्वामी बृजेशानन्द जी महराज और कार्यक्रम के अध्यक्ष समाजसेवी राहुल दूबे ने सफल आयोजन के लिए श्रद्धालुओ को धन्यवाद दिया।
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मां जाह्नवी की अविरल धारा, उत्तर प्राचीन मंदिर में विराजमान जगत जननी माता सीता, पश्चिम में यज्ञ का भव्य मंडप और पूरब में श्मशान। इन सब के मध्य में महाअनुष्ठान स्थल जहां 11 दिनों तक श्रद्धा, आस्था, विश्वास के साथ एक अविष्मरणीय, मनोहारी, अद्भुत, आंतरिक आनंद के बीच शिवभक्तों ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण श्री राम कथा, भजन , मन्त्रोच्चार के बीच कर मंदाकिनी के पावन घाट पर स्वर्गिक छटा बिखेर दी। सायंकालीन बेला में पार्थिव शिवलिंगों का महाभिषेक, भष्मारती, और असंख्य दीयों से मां गंगा आरती और पार्थिव शिवलिंगों का पतित पावनी में विसर्जन सब कुछ अलौकिक रहा। महाअनुष्ठान के अधिष्ठाता स्वामी बृजेशानन्द जी महराज और कार्यक्रम के अध्यक्ष समाजसेवी राहुल दूबे ने सफल आयोजन के लिए श्रद्धालुओ को धन्यवाद दिया।
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