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ध्रुपद महोत्सव में छिड़ी ‘काशी राग’ की तान
Updated Wed, 14 Feb 2018 02:16 AM IST
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वाराणसी। अपनी समृद्ध सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत के दम पर दुनिया में अलग पहचान बनाने वाली काशी की झलक आपको नजर आएगी गीत-संगीत की खुशबू के बीच तुलसी घाट पर। यहां काशी की इस समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, ध्रुपद महोत्सव। गंगा किनारे सजे इस महोत्सव में संगीत की कर्णप्रिय स्वरलहरियां हैं और उन स्वरलहरियों का रंगों-रेखाओं से भी एक रिश्ता है। यह रिश्ता इतना गहरा और खास है कि इसका साक्षी बनने जम्मू और मध्य प्रदेश से कलाकार आए हैं, जो यहां रंगों और संगीत के रिश्ते की डोर को मजबूत कर रहे हैं।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय से बीएफए और एमएफए करने वाले चार छात्र-छात्राओं ने चार साल पहले ध्रुपद महोत्सव के दौरान चित्रकला प्रदर्शनी लगाई थी। काशी, यहां के घाट, मंदिर, गलियों के साथ ही संगीत के प्रणय बंधन कैनवास पर उतारकर उन्हें प्रदर्शनी का रूप देना शुरू किया। बीते साल इनमें से दो छात्राओं दीपिका शर्मा और पूजा शाह केंद्रीय विद्यालय में बतौर कला शिक्षिका नियुक्ति हो गईं। दीपिका मध्य प्रदेश के सागर में केवी ढाना और पूजा शाह केवी पुलवामा जम्मू में पढ़ा रही हैं। दोनों छुट्टी लेकर ध्रुपद महोत्सव में शामिल हुई हैं, अपनी तीन साल पुरानी परंपरा को जारी रखा है और प्रदर्शनी लगाई है। उनका कहना है कि आगे भी अपनी इस परंपरा को जारी रखेंगी। उनके साथ अनामिका सिंह और आशीष गुप्ता की भी पेंटिंग्स प्रदर्शनी में शामिल हैं। उन्होंने काशी नरेश पंडित विभूति नारायण सिंह, पंडित अमरनाथ मिश्र, प्रो. वीरभद्र मिश्र और लालमनी मिश्र की भी कृति तैयार की है जो कि ध्रुपद महोत्सव के संस्थापक रहे हैं।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय से बीएफए और एमएफए करने वाले चार छात्र-छात्राओं ने चार साल पहले ध्रुपद महोत्सव के दौरान चित्रकला प्रदर्शनी लगाई थी। काशी, यहां के घाट, मंदिर, गलियों के साथ ही संगीत के प्रणय बंधन कैनवास पर उतारकर उन्हें प्रदर्शनी का रूप देना शुरू किया। बीते साल इनमें से दो छात्राओं दीपिका शर्मा और पूजा शाह केंद्रीय विद्यालय में बतौर कला शिक्षिका नियुक्ति हो गईं। दीपिका मध्य प्रदेश के सागर में केवी ढाना और पूजा शाह केवी पुलवामा जम्मू में पढ़ा रही हैं। दोनों छुट्टी लेकर ध्रुपद महोत्सव में शामिल हुई हैं, अपनी तीन साल पुरानी परंपरा को जारी रखा है और प्रदर्शनी लगाई है। उनका कहना है कि आगे भी अपनी इस परंपरा को जारी रखेंगी। उनके साथ अनामिका सिंह और आशीष गुप्ता की भी पेंटिंग्स प्रदर्शनी में शामिल हैं। उन्होंने काशी नरेश पंडित विभूति नारायण सिंह, पंडित अमरनाथ मिश्र, प्रो. वीरभद्र मिश्र और लालमनी मिश्र की भी कृति तैयार की है जो कि ध्रुपद महोत्सव के संस्थापक रहे हैं।
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