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500 शिल्पियों को मिलेगा सामूहिक बीमा का तोहफा
Updated Sun, 11 Feb 2018 02:00 AM IST
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वाराणसी। एमएसएमई मंत्रालय की संस्था उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (यूपीआईडी) की ओर से मार्च के अंतिम हफ्ते में अस्सी घाट पर अंतरराष्ट्रीय बुनकर कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। कॉन्क्लेव में विभिन्न देशों के नामी डिजाइनर शामिल होंगे, जो वाराणसी के शिल्प को देखने, परखने के साथ ही उनके लिए वैश्विक बाजार का आधार तैयार करेंगे। यूपीआईडी की ओर से कॉन्क्लेव में पांच सौ शिल्पियों, बुनकरों को मुफ्त सामूहिक बीमा का तोहफा दिया जाएगा। साथ ही, यूपीआईडी एप की लांचिंग की जाएगी। यह एप बुनकरों, शिल्पियों के लिए ऐसा मंच बनेगा, जहां डिजाइनर, उद्यमी और देश-विदेश के खरीदारों से वे सीधे जुड़ सकेंगे। उत्पाद के संबंध में सलाह, जरूरत और उन्हें बेचने, खरीदने की सुविधाएं इस एप के जरिए उन्हें मुहैया होंगी।
यह जानकारी शनिवार को यूपीआईडी की अध्यक्ष क्षिप्रा शुक्ला ने पत्रकारों से बातचीत में दी। बताया कि कॉन्क्लेव में वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े बुनकर और शिल्पी शामिल होंगे। हमारा उद्देश्य शिल्प से जुड़ी नई पीढ़ी को सुविधा और कौशल प्रदान करना है। इसके लिए यूपीआईडी एप के जरिए उन्हें एक ऐसा मंच मुहैया कराया जाएगा, जहां वह अपनी जरूरत के अनुरूप उत्पाद की डिजाइनिंग और मार्केटिंग से जुड़ी सुविधाएं आसानी से हासिल कर पाएंगे। बताया कि कॉन्क्लेव में स्थानीय शिल्पकारों के अलावा राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पियों को आमंत्रित किया जाएगा ताकि नए शिल्पकार उनके अनुभवों से सीख ले सकें। केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के सहयोग से बुनकरों के लिए मंडलवार शिविर लगाने की योजना भी बनाई जा रही है। यूपीआईडी अपने छात्र-छात्राओं को स्टार्टअप शुरू करने और उनके उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री में भी मदद करेगा।
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यह जानकारी शनिवार को यूपीआईडी की अध्यक्ष क्षिप्रा शुक्ला ने पत्रकारों से बातचीत में दी। बताया कि कॉन्क्लेव में वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े बुनकर और शिल्पी शामिल होंगे। हमारा उद्देश्य शिल्प से जुड़ी नई पीढ़ी को सुविधा और कौशल प्रदान करना है। इसके लिए यूपीआईडी एप के जरिए उन्हें एक ऐसा मंच मुहैया कराया जाएगा, जहां वह अपनी जरूरत के अनुरूप उत्पाद की डिजाइनिंग और मार्केटिंग से जुड़ी सुविधाएं आसानी से हासिल कर पाएंगे। बताया कि कॉन्क्लेव में स्थानीय शिल्पकारों के अलावा राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पियों को आमंत्रित किया जाएगा ताकि नए शिल्पकार उनके अनुभवों से सीख ले सकें। केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के सहयोग से बुनकरों के लिए मंडलवार शिविर लगाने की योजना भी बनाई जा रही है। यूपीआईडी अपने छात्र-छात्राओं को स्टार्टअप शुरू करने और उनके उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री में भी मदद करेगा।
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