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वादन व गायन से हुआ ध्रुपद महोत्सव का आगाज
Updated Tue, 30 Jan 2018 02:09 AM IST
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वाराणसी। श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में सोमवार को देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने गायन व वादन से तीन दिवसीय ध्रुपद महोत्सव का आगाज किया। पं. श्रीकांत मिश्र ध्रुपद फाउंडेशन एवं ध्रुपद संस्थान भोपाल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देखकर दर्शक भी देर रात तक स्वयं को संगीत के मोहपाश में बंधे बिना नहीं रह सके।
सोमवार को ध्रुपद महोत्सव का आगाज पुणे पखावज वादिक अनुजा बोरूडे ने किया। एकल पखावज वादन में अनुजा ने धमार से आरंभ किया। इसके तहत उन्होंने गणेश स्तुति, उठान परन, रेला, फरमाइशी चक्करदार और घरानेदार बंदिशें प्रस्तुत की। हारमोनियम पर काशी के भैयनजी ने संगत की। दूसरी प्रस्तुति में इंदौर के मनोज सर्राफ राम यमन में आलाप एवं झाला प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने धमार ताल में निबद्ध रचना केसर घोल के रंग बनो है...प्रस्तुत कर सभी को संगीत के रस में डुबो दिया। दूसरी प्रस्तुति में गणपति गणनायक...पेश कर भगवान गणेश का स्वरांजलि भेंट की। उनके साथ पखावज पर जापान से आए तेसियो कनिको ने संगत की।
तीसरी प्रस्तुति में काशी के ध्रुपद गायक ऋत्विक सान्याल ने राग पुरिया कल्याण आलाप एवं चार ताल में बंदिश तथा राग किरवानी में सूलताल की बंदिश में ध्रुपद गायन पेेश किया। पखावज पर उनके साथ भोपाल से आए अखिलेश गुंदेचा ने संगत की। कार्यक्रम का संचालन अनुराधा रतूड़ी ने किया। पं. कन्हैयालाल मिश्रा, शिखा त्रिपाठी एवं पूरन महाराज ने कलाकारों का स्वागत किया।
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सोमवार को ध्रुपद महोत्सव का आगाज पुणे पखावज वादिक अनुजा बोरूडे ने किया। एकल पखावज वादन में अनुजा ने धमार से आरंभ किया। इसके तहत उन्होंने गणेश स्तुति, उठान परन, रेला, फरमाइशी चक्करदार और घरानेदार बंदिशें प्रस्तुत की। हारमोनियम पर काशी के भैयनजी ने संगत की। दूसरी प्रस्तुति में इंदौर के मनोज सर्राफ राम यमन में आलाप एवं झाला प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने धमार ताल में निबद्ध रचना केसर घोल के रंग बनो है...प्रस्तुत कर सभी को संगीत के रस में डुबो दिया। दूसरी प्रस्तुति में गणपति गणनायक...पेश कर भगवान गणेश का स्वरांजलि भेंट की। उनके साथ पखावज पर जापान से आए तेसियो कनिको ने संगत की।
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तीसरी प्रस्तुति में काशी के ध्रुपद गायक ऋत्विक सान्याल ने राग पुरिया कल्याण आलाप एवं चार ताल में बंदिश तथा राग किरवानी में सूलताल की बंदिश में ध्रुपद गायन पेेश किया। पखावज पर उनके साथ भोपाल से आए अखिलेश गुंदेचा ने संगत की। कार्यक्रम का संचालन अनुराधा रतूड़ी ने किया। पं. कन्हैयालाल मिश्रा, शिखा त्रिपाठी एवं पूरन महाराज ने कलाकारों का स्वागत किया।
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