Varanasi: मारपीट के मामले में यूपी कॉलेज के पूर्व महामंत्री व पूर्व उपाध्यक्ष समेत 10 छात्रों को मिली जमानत
वाराणसी स्थित यूपी कॉलेज में चुनावी रंजिश को लेकर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रत्याशी से मारपीट करने के मामले में अदालत ने पूर्व महामंत्री व पूर्व उपाध्यक्ष समेत 10 छात्रों नेताओं को जमानत दे दी।
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वाराणसी स्थित यूपी कॉलेज में चुनावी रंजिश को लेकर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रत्याशी से मारपीट करने के मामले में अदालत ने पूर्व महामंत्री व पूर्व उपाध्यक्ष समेत 10 छात्रों नेताओं को जमानत दे दी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी कुमार की अदालत ने छात्र नेता प्रतीक सिंह परमार,पूर्व महामंत्री शिवम सिंह बाबू, पूर्व उपाध्यक्ष सचिन सिंह बिसेन, वीरेंद्र प्रताप रघुवंशी, शानू सिंह, श्रेष्ठ सोनकर, रवि प्रकाश चंदन, विकास राय, अर्जुन सिंह व विवेकानंद सिंह को 25 - 25 हजार रुपये की दो जमानत और व्यक्तिगत बंधपत्र देनें पर रिहा करने का आदेश दिया है।
अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विनीत कुमार सिंह, आकाश कुमार सिंह व पवन सिंह राजपूत ने पक्ष रखा। अभियोजन पक्ष के अनुसार यूपी कालेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रत्याशी वादी समीर सिंह ने 17 मार्च 2021 को कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
आरोप था कि 17 मार्च 2021 को वार्षिक चुनाव संपन्न होने के बाद करीब 4 बजे शाम विजयी प्रत्याशी महामंत्री शिवम सिंह को बधाई देने कार्यालय टकटकपुर जा रहा था। उस समय उसके साथ दुष्यंत सिंह और रिशु सिंह थे। अचानक से विरेन्द्र प्रताप रघुवंशी, विवेकानंद सिंह, शिवम सिंह बाबू, श्रेष्ठ सोनकर, रवि प्रकाश चंदन, विकास राय बिट्टू, शानू सिंह, सचिन सिंह विशेष, अर्जुन सिंह, प्रतीक सिंह परमार, विशाल सिंह, राजू सिंह व 10 से 15 लोग लाठी, डंडा, पिस्तौल, बम और रॉड से लैस होकर हम लोगों पर हमला बोल दिए और बुरी तरह से मारपीट कर असलहे से फायर किए।
आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के दोषी को 10 वर्ष की कैद
दिव्यांगों की हटाई गई गुमटियां स्थापित करने की मांग को लेकर दिव्यांगों को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने और पांच दिव्यांगों की गैर इरादतन हत्या के मामले में बुधवार को सजा का फैसला हुआ। विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्ट्राचार निवारण अधिनियम) रजत वर्मा की अदालत ने चंदुआ छित्तुपुरा निवासी अभियुक्त नमो उपाध्याय को दोषी करार देते हुए दस वर्ष की सजा सुनाई। अदालत ने 35 हजार रुपया जुर्माना भी लगाया।
एडीजीसी पवन कुमार जायसवाल के अनुसार 31 जुलाई 2007 को अतिक्रमण से हटाई गई गुमटियों को प्रतिस्थापित कराने को लेकर लक्सा थाना क्षेत्र में दिव्यांग धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। नमो उपाध्याय ने प्रशासन पर दबाव बनाने और नेतागिरी चमकाने के लिए दिव्यांगों को आत्महत्या करने के उत्प्रेरित किया और उन्हें खाने के लिए नशीला पदार्थ दिया। इससे पांच विकलांगों गुरुदीप, रामचंद्र, मंगरु प्रसाद, त्रिभुवन एवं राजेश मौर्य की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में नमो उपाध्याय और सतीश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
बाद में विवेचना के दौरान नाम प्रकाश में आने पर भरत लाल चौरसिया, नसीम, मो. मोहसिन और रविनाथ बनर्जी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दायर कर किया गया। इन चारों के खिलाफ आरोप साबित न होने पर अदालत ने सभी को दोषमुक्त कर दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियुक्त सतीश ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था।
धोखाधड़ी के मामले में जमानत अर्जी खारिज
प्रभारी सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) देवकांत शुक्ला की अदालत ने एक रियल इस्टेट कंपनी के निदेशक रविन्द्र कुमार मौर्य की 66 लाख रुपये के धोखाधड़ी के मामले में जमानत अर्जी खारिज कर दी। डीजीसी आलोक चंद्र शुक्ला व वादी के अधिवक्ता प्रेमप्रकाश सिंह गौतम के मुताबिक आरोपी रविन्द्र मौर्या पर रियल इस्टेट कंपनी के दो अन्य निदेशकों का फर्जी हस्ताक्षर व कूटरचित दस्तावेज के जरिये रथयात्रा स्थित स्टेट बैंक की शाखा में खाता खोलकर 66 लाख 83 हजार रुपए हड़पने का आरोप लगा था।