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ISS: भारतीय सांख्यिकी सेवा में बीएचयू के 10 मेधावी चयनित, आकाश को दूसरी रैंक; चैट जीपीटी से तैयार किए नोट्स

Sun, 05 Oct 2025 01:21 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 05 Oct 2025 01:21 PM IST
सार

ISS Exam: भारतीय सांख्यिकी सेवा की परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों में बीएचयू के छात्र-छात्राएं भी हैं। इनमें से कई लोगों ने यूट्यूब, चैटजीपीटी सहित विभिन्न सोशल साइट्स से अपनी पढ़ाई में सहयोग प्राप्त किया।

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10 meritorious students from BHU selected for Indian Statistical Service notes prepared using Chat GPT
एक कमरे में रहकर पढ़ाई करने वाले तीनों दोस्त- राहुल, आकाश और श्वेतांक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: बीएचयू के 10 छात्र और छात्राओं ने भारतीय सांख्यिकी सेवा 2025 के टॉप-26 में जगह बनाई है। ये सभी सांख्यिकी विभाग से हैं। संघ लोक सेवा आयोग की ओर से दो दिन पहले रिजल्ट जारी किया गया। इसमें 10 छात्रों ने बीएचयू से यूजी और पीजी किया है। इनमें कई नौकरीपेशा थे। 

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ऑल इंडिया लेवल पर बीएचयू से बीएससी कर चुके आकाश कुमार शर्मा को पहले प्रयास में ही दूसरी रैंक मिली है। वहीं आलोक सिंह को पांचवीं, एमएससी की विभा मिश्रा को आठवीं, श्वेतांक सिंह को 11वीं, शिवानी वर्मा को 12वीं, ऋषिका कुकरेजा को 15वीं, राहुल सिंह को 21वीं, शिवांगी शुक्ला को 23वीं, ऊषा कुमारी को 25वीं और अनुराग विमल वर्मा को 26वीं रैंक मिली है। आलोक, कुकरेजा, शिवांगी, ऊषा और अनुराग एमएससी कर चुके हैं।

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चैट जीपीटी से तैयार किए नोट्स
पांडेयपुर के भक्ति नगर के आकाश शर्मा ने बताया कि बीएचयू से बीएससी करने के बाद आईआईटी कानपुर से एमएससी किया और वहीं से प्लेसमेंट हो गया। ऑफिस में 9 घंटे काम करने के बाद शाम को पढ़ाई के लिए बैठ जाता था। चैट जीपीटी से नोट्स तैयार किए। आधे नोट्स हाथ और बाकी समय के अभाव में प्रिंट आउट कराकर पढ़ा। यूट्यूब से भी मदद ली। रोज पांडेयपुर से बीएचयू आने-जाने में करीब 25-30 किलोमीटर साइकिल चलानी पड़ती थी। ये समय का नुकसान नहीं बल्कि अनुशासन था। 

पिता का निधन हुआ तब छूटी पढ़ाई: आकाश ने बताया कि तैयारी शुरू ही की थी कि पिता का निधन हो गया। पढ़ाई तो फिर छोड़ ही दी थी। लेकिन नौकरी नहीं छोड़ी क्योंकि ये रिस्की हो जाता। जनवरी में फिर से खुद को रिस्टार्ट किया। मोटिवेशन जुटाया। दोस्त काफी मदद करते रहे। इंटरव्यू 25 मिनट तक चला था।

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तैयारी के लिए नहीं जाॅइन की नौकरी, पिता ने संभाला
बाबतपुर के पश्चिम पुर अहरा के निवासी राहुल सिंह बीएचयू से बीएससी कर चुके हैं। आईआईटी कानपुर से स्टैटस्टिक्स से एमटेक कर सीधे तैयारी शुरू कर दी। सेल्फ स्टडी की। दो साल घर पर रहे। दोस्त आए तो हम तीनों लखनऊ में शिफ्ट हो गए। तीनों ने एक ही कमरे में रहकर पढ़ाई शुरू की। पिता ने कहा कि कानपुर में जॉइन कर लो, लेकिन बातचीत कर बताया कि सरकारी काम को तरजीह देना है। दूसरे प्रयास में जीएस में तीन नंबर से चयन नहीं हुआ तो पिता ने ही समझाया और संभाला। फिर सेलेक्शन हो गया।

बिना नौकरी के तैयारी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया
उन्नाव के निवासी श्वेतांक ने बताया कि दोस्तों को देखकर पढ़ने का मूड हो जाता था। पिता किसानी करते हैं। इसलिए बिना नौकरी के तैयारी करने की हिम्मत नहीं जुट पा रहा था। दो साल नौकरी की और उसके बाद ब्रेक लेकर तैयारी की। दो साल में इतनी अच्छी सेविंग हो गई कि तैयारी के दौरान कोई दिक्कत ही नहीं हुई। 

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