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आराधना मिश्रा मोना: संगठन में पद महत्वपूर्ण नहीं, हम सभी कांग्रेस के ईमानदार और मजबूत सिपाही, हमारा लक्ष्य एक
Mon, 05 Oct 2026 12:59 PM IST
Sharukh Khan
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Sharukh Khan
Updated Mon, 05 Oct 2026 12:59 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की नई ज़िम्मेदारी मिलने पर आराधना मिश्रा 'मोना' ने कहा, "संगठन में पद महत्वपूर्ण नहीं है, संगठन महत्वपूर्ण है। कल कोई और अध्यक्ष था; आज मैं हूं, और कल कोई और होगा। लेकिन हम सभी कांग्रेस के ईमानदार और मज़बूत सिपाही हैं, और हमारा लक्ष्य एक ही है।
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Aradhana Mishra Mona
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद की नई जिम्मेदारी संभालने के बाद आराधना मिश्रा 'मोना' ने अपनी प्राथमिकताओं पर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन में किसी व्यक्ति का पद महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि संगठन स्वयं सर्वोपरि है। मोना ने कहा कि पार्टी को मजबूत करना और 2027 में गठबंधन सरकार बनाना उनका मुख्य लक्ष्य है।
अपनी नियुक्ति के बाद उन्होंने दिल्ली में मीडिया से बातचीत की। मोना ने कहा कि अध्यक्ष का पद अस्थायी होता है। उन्होंने बताया कि आज वह इस जिम्मेदारी पर हैं, कल कोई और इसे संभालेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता ईमानदार और मजबूत सिपाही हैं।
इन सभी सिपाहियों का एक ही साझा लक्ष्य है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर पार्टी के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। उनका मानना है कि सामूहिक प्रयास से ही पार्टी अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सकती है।
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अपनी नियुक्ति के बाद उन्होंने दिल्ली में मीडिया से बातचीत की। मोना ने कहा कि अध्यक्ष का पद अस्थायी होता है। उन्होंने बताया कि आज वह इस जिम्मेदारी पर हैं, कल कोई और इसे संभालेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता ईमानदार और मजबूत सिपाही हैं।
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इन सभी सिपाहियों का एक ही साझा लक्ष्य है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर पार्टी के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। उनका मानना है कि सामूहिक प्रयास से ही पार्टी अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सकती है।
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2027 के लिए गठबंधन सरकार का लक्ष्य
मोना ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की रणनीति भी बताई। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य राज्य में गठबंधन सरकार बनाना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह लक्ष्य राहुल गांधी की सभी कार्यकर्ताओं से अपेक्षा है। मोना ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सामूहिक प्रयासों से यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
मोना ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की रणनीति भी बताई। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य राज्य में गठबंधन सरकार बनाना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह लक्ष्य राहुल गांधी की सभी कार्यकर्ताओं से अपेक्षा है। मोना ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सामूहिक प्रयासों से यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
रीता बहुगुणा के बाद फिर महिला दांव
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में प्रतापगढ़ के रामपुर खास से विधायक और आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप कर बड़ा सियासी दांव खेला है। इस राजनीतिक बदलाव के बीच सबसे खास पहलू उनका शैक्षिक बैकग्राउंड और महिला नेतृत्व के तौर पर उनकी उभार है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और एमबीए की डिग्री हासिल कर चुकीं आराधना मिश्रा की पहचान सूबे की पढ़ी-लिखी और मुखर महिला राजनेताओं में होती है।
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में प्रतापगढ़ के रामपुर खास से विधायक और आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप कर बड़ा सियासी दांव खेला है। इस राजनीतिक बदलाव के बीच सबसे खास पहलू उनका शैक्षिक बैकग्राउंड और महिला नेतृत्व के तौर पर उनकी उभार है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और एमबीए की डिग्री हासिल कर चुकीं आराधना मिश्रा की पहचान सूबे की पढ़ी-लिखी और मुखर महिला राजनेताओं में होती है।
पार्टी सूत्रों का मानना है कि उनकी यह अकादमिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक समझ उन्हें अन्य नेताओं से अलग खड़ा करती है। कांग्रेस हाईकमान ने इस नियुक्ति के जरिए एक बार फिर उत्तर प्रदेश में महिला नेतृत्व पर बड़ा भरोसा जताया है। इससे पहले प्रो. रीता बहुगुणा जोशी भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल चुकी हैं, हालांकि पिछले कई वर्ष से वह भाजपा में है। फिलहाल कांग्रेस ने अब एक बार फिर पार्टी ने महिला चेहरे को आगे कर सियासी समीकरण साधने की कोशिश की है।
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस की यह रणनीति बेहद सधी हुई मानी जा रही है। आराधना मिश्रा के जरिए पार्टी की नजर सूबे की आधी आबादी (महिलाओं) और ब्राह्मण मतों पर टिकी है। वह राज्यसभा सांसद और दिग्गज ब्राह्मण नेता प्रमोद तिवारी की पुत्री हैं। ऐसे में इस नियुक्ति से पार्टी सवर्ण खासकर ब्राह्मण मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश देने की जुगत में है।
सड़क से सदन तक संघर्ष का रहा है इतिहास
प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी और प्रवक्ता हसीब अहमद ने नेतृत्व के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि आराधना मिश्रा ने हमेशा से प्रदेश में ब्राह्मणों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक जोरदार लड़ाई लड़ी है।
प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी और प्रवक्ता हसीब अहमद ने नेतृत्व के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि आराधना मिश्रा ने हमेशा से प्रदेश में ब्राह्मणों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक जोरदार लड़ाई लड़ी है।
पार्टी नेताओं का मानना है कि उनकी यह आक्रामक शैली और सुशिक्षित छवि आगामी चुनावों में कांग्रेस को एक नई धार देगी। शीर्ष नेतृत्व के इस फैसले के बाद प्रयागराज समेत पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। जल्द ही जिला और शहर कमेटियों के गठन की भी घोषणा होने की संभावना है।