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31 साल बाद न्याय मिला तो फफक पड़ीं अफसर बिटिया
लखनऊ/बहराइच/ब्यूरो
Updated Sat, 06 Apr 2013 12:16 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : डेमो
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सीओ केपी सिंह की बेटी व बहराइच की डीएम किंजल सिंह सीबीआई अदालत का फैसला सुनने के लिए शुक्रवार को खुद कोर्ट रूम में पति अभय सिंह (आईएएस) के साथ मौजूद थीं।
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किंजल के लिए ये बेहद भावुक क्षण थे। फैसला सुनने के बाद वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और फफक पड़ीं। पति ने उन्हें संभाला।
किंजल ने कहा कि जज के शब्द तो वे जरूर सुन रही थीं, लेकिन जहन में मां की तस्वीर बार-बार उभर रही थी। उन्होंने कहा, अदालत के फैसले से इंसाफ के प्रति मेरा भरोसा बढ़ा है।
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इस लंबी लड़ाई के दौरान कई बार इंसाफ को लेकर मेरा विश्वास डगमगाया, लेकिन आज ऐसा लगता है कि हम सभी को सिस्टम में विश्वास रखना चाहिए।
किंजल ने कहा, हम सबके लिए इंसाफ की यह लड़ाई बेहद कठिन रही है। जब मेरे पिता की हत्या हुई थी तो मैं केवल पांच महीने की थी और छोटी बहन का तो जन्म भी नहीं हुआ था।
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मेरी मां ने इंसाफ की बहुत लंबी लड़ाई लड़ी। हम छोटे थे। मां से अपने पिता के बारे में पूछती तो वे कहती थीं, ‘पिताजी चांद मामा के पास गए हैं, जब आ जाएंगे तो तुम खुद ही मिल लेना।’
वे लगातार अदालत के चक्कर काटती थीं। फिर कैंसर ने उन्हें घेर लिया। हमारे लिए बहुत कठिन वक्त था। हमने एक बार मां को बहुत समझाया था कि पिताजी तो नहीं हैं, अब तुम्हीं हमारे लिए सब कुछ हो।
इस घटना के तीन साल बाद उनका देहांत हो गया। हम दोनों बहनों ने एक ही साथ आईएएस परीक्षा पास की, लेकिन इस खुशी को सेलिब्रेट करने के लिए तब मां थीं न पिता।
सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका
बलिया जनपद की मूल निवासी किंजल सिंह के पिता केपी सिंह की गोंडा में डीएसपी के पद पर तैनाती के दौरान 12 मार्च 1982 को हत्या कर दी गई थी।
किंजल ने बताया कि वह समझने लायक हुईं, तो मां विभा सिंह ने पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया था। मां की कही हर बात आज भी याद है। मां ने ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
इसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की। हालांकि फैसले के इंतजार में मां चली गई। उन्होंने कहा कि फैसला आने में समय जरूर लगा है, लेकिन यह पहला केस था जिसमें पुलिस के फर्जी एनकाउंटर में पुलिस वालों को सजा हुई है।