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UP Election 2022: वृंदावन के नाविकों का छलका दर्द, कहा- जान पर खेलकर बचाते हैं लोगों की जान, पर सरकार नहीं करती कोई मदद

Sun, 28 Nov 2021 11:10 AM IST
मुकेश कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sun, 28 Nov 2021 11:10 AM IST
सार

'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' मथुरा में है। 'चाय पर चर्चा' के बाद हमारी टीम ने वृंदावन के सबसे प्राचीन केशी घाट पर नाविकों से बातचीत की। इस दौरान नाविकों ने अपनी आपबीती सुनाई। पढ़िए किसने क्या कहा?
 

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UP Assembly Election 2022 Mathura vrindavan discussion with sailors at keshi ghat Coverage News Updates In Hindi
वृंदावन के केशी घाट पर नाविकों से चर्चा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली है। यहां कई मंदिर और एतिहासिक स्थाल मौजूद हैं। यहां हर साल अनेकों धार्मिक उत्सव मनाए जाते हैं। यहां पर देश ही नहीं विदेशी श्रद्धालुओं का आगमन होता है। 'सत्ता का संग्राम' कार्यक्रम के तहत हमारी टीम वृंदावन के सबसे प्राचीन केशी घाट पर नाविकों से बातचीत की। इस दौरान नाविकों ने अपनी आपबीती सुनाई और सरकार से यह मांग की...

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राधे नाम के एक नाविक ने कहा कि यह हमारा पुश्तैनी काम है। मेरे बाबा के बाबा भी नाव चलाने का काम करते थे। हम लोगों को जान बचाने का काम करते हैं पर हमें कुछ नहीं मिलता। यहां करीब 100 नावें चलती हैं। राधे ने कहा कि सरकार से यही चाहते हैं कि सरकार हमें रोजगार दे, हमें नौकरी पर रखे। नहीं नौकरी तो कम से कम संविदा पर भी रखे।  
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गुलाब सिंह ने कहा कि सरकार चाहे, डीएम साहब चाहे तो हमारे लिए बहुत कुछ हो सकता है। हम जान पर खेलकर इंसानों की जान बचाते हैं, पर हमें क्या मिलता? इसके लिए हमने सबसे इसकी अर्जी लगाई। प्रशासन आश्वासन तो देता है लेकिन कुछ नहीं करता। अगर हमारे परिवार के साथ कुछ हो जाता है तो कैसे क्या होगा? पूरण नाम के एक नाविक ने रोजगार की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें नौकरी मिले। 100-200 रुपये मिलते हैं उससे क्या होगा? वहीं, ओम प्रकाश ने कहा कि पहले से कुछ नहीं बदला है। 
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काम के नाम पर अधिकारी लगा जाते हैं 'गोता' 
रामप्रदेश ने कहा कि यहां गोताखोरों के लिए बड़ी समस्या है। 20 साल हो गए ये काम करते करते पर सरकार की तरफ से आज तक कुछ नहीं मिला और न मिल रहा है। हम चाहते हैं कि गोताखोरों को काम मिले। हमें नौकरी नहीं तो कम से कम संविदा पर ही रखे जाएं। हमारे पास तमाम कागजात हैं। हमें कइयों की जान बचाई है। हमारे पास तमाम कागजात है। हमलोगों को पैसा मिलना चाहिए।


उन्होंने प्रशासन पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन को हमारी जरूरत पड़ती है तो वो हमने काम करा लेते हैं लेकिन हमारे लिए कुछ करते नहीं हैं। हमने मंत्री श्रीकांत शर्मा से लेकर तमाम बड़े अधिकारियों से अपनी अर्जी लगा चुके हैं लेकिन सब आश्वासन देते हैं लेकिन काम के नाम पर वो भी 'गोता' लगा जाते हैं। 

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