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शुद्ध पेयजल को शहरी 2021 तक करें इंतजार
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शहर के छोटा चौराहा के पास अमृत योजना की भूमिगत पाइप लाइन डालती जेसीबी।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। दूषित व फ्लोराइड युक्त पेयजल की समस्या झेल रहे उन्नाव शहर और शुक्लागंज की 6 लाख आबादी को शुद्ध पेयजल के लिए 2021 तक इंतजार करना होगा। 253 करोड़ की अमृत (अटल मिशन फॉर रिजूवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन) योजना को जुलाई 2020 तक पूरा करना था। लेकिन कोरोना के कारण काम रुकने और बजट मिलने से देरी होने से योजना को पूरा करने की समय सीमा 6 महीने बढ़ा दी गई है। अभी तक फेज-1 का 55 और फेज-2 का 45 फीसदी ही काम हो पाया है। मालूम हो कि पूर्व में योजना को मार्च 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य था। लेकिन वित्तीय अड़चनों के चलते समय सीमा बढ़ाकर जुलाई 2020 कर दी गई थी।
उन्नाव और शुक्लागंज नगर पालिका के आसपास औद्योगिक विकास के साथ ही भूगर्भ जल में प्रदूषण व फ्लोराइड की मात्रा घातक स्तर पर है। भारत सरकार ने उन्नाव और शुक्लागंज में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए अमृत योजना के तहत 253 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। वर्ष 2018 में जलनिगम के प्रस्ताव पर शुक्लागंज (गंगाघाट) के 28 और उन्नाव नगर पालिका के 32 वार्डों में आरओ प्लांट से गंगाजल को शुद्ध करके जलापूर्ति की योजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दी। योजना के तहत शुक्लागंज में प्रतिदिन 150 एमएलडी पानी को साफ करने वाला बड़ा ट्रीटमेंट प्लांट, शुक्लागंज और शहर में भूमिगत पाइप लाइन बिछाने, 12 नए ओवर हेड व भूमिगत टैंक बनाए जाने हैं। लेकिन कभी प्रोजेक्ट तैयार होने तो कभी बजट मिलने में हुई देरी से योजना एक साल लेट हो गई। कोरोना ने एक बार फिर योजना को पीछे कर दिया है। तीन महीने काम बंद रहने और समय पर बजट न मिलने से योजना को 6 महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। फेज-1 के काम को जुलाई 2020 तक पूरा करना था। उसमें अभी 55 फीसदी और अगस्त 2020 तक पूरे होने वाले फेज-2 का काम अभी 45 फीसदी ही हो सका है।
जलनिगम के एक्सईएन केके कटियार ने बताया कि लॉकडाउन के कारण बीच में काम बंद रहा। इन दिनों फिर तेजी से काम पूरा किया जा रहा है। शहर में भूमिगत पाइप लाइन बिछाने और खोदी गई सड़कों की मरम्मत का काम तेजी से पूरा कराया जा रहा है।
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यह है योजना
अमृत योजना के तहत उन्नाव शहर को 12 जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन में एक पानी की टंकी और एक अंडर ग्राउंट वाटर टैंक बनाया जा रहा है। शुक्लागंज गंगा बैराज के पास बनाए गए ट्रीटमेंट प्लांट से गंगाजल को साफ करके पाइप लाइन के जरिए अंडर ग्राउंट वाटर टैंकों में पहुंचाया जाएगा। इसके बाद मोटर पंप से पानी को ओवरहेड टैंक में भरने के बाद घरों तक सप्लाई किया जाएगा।
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उन्नाव और शुक्लागंज नगर पालिका के आसपास औद्योगिक विकास के साथ ही भूगर्भ जल में प्रदूषण व फ्लोराइड की मात्रा घातक स्तर पर है। भारत सरकार ने उन्नाव और शुक्लागंज में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए अमृत योजना के तहत 253 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। वर्ष 2018 में जलनिगम के प्रस्ताव पर शुक्लागंज (गंगाघाट) के 28 और उन्नाव नगर पालिका के 32 वार्डों में आरओ प्लांट से गंगाजल को शुद्ध करके जलापूर्ति की योजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दी। योजना के तहत शुक्लागंज में प्रतिदिन 150 एमएलडी पानी को साफ करने वाला बड़ा ट्रीटमेंट प्लांट, शुक्लागंज और शहर में भूमिगत पाइप लाइन बिछाने, 12 नए ओवर हेड व भूमिगत टैंक बनाए जाने हैं। लेकिन कभी प्रोजेक्ट तैयार होने तो कभी बजट मिलने में हुई देरी से योजना एक साल लेट हो गई। कोरोना ने एक बार फिर योजना को पीछे कर दिया है। तीन महीने काम बंद रहने और समय पर बजट न मिलने से योजना को 6 महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। फेज-1 के काम को जुलाई 2020 तक पूरा करना था। उसमें अभी 55 फीसदी और अगस्त 2020 तक पूरे होने वाले फेज-2 का काम अभी 45 फीसदी ही हो सका है।
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जलनिगम के एक्सईएन केके कटियार ने बताया कि लॉकडाउन के कारण बीच में काम बंद रहा। इन दिनों फिर तेजी से काम पूरा किया जा रहा है। शहर में भूमिगत पाइप लाइन बिछाने और खोदी गई सड़कों की मरम्मत का काम तेजी से पूरा कराया जा रहा है।
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यह है योजना
अमृत योजना के तहत उन्नाव शहर को 12 जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन में एक पानी की टंकी और एक अंडर ग्राउंट वाटर टैंक बनाया जा रहा है। शुक्लागंज गंगा बैराज के पास बनाए गए ट्रीटमेंट प्लांट से गंगाजल को साफ करके पाइप लाइन के जरिए अंडर ग्राउंट वाटर टैंकों में पहुंचाया जाएगा। इसके बाद मोटर पंप से पानी को ओवरहेड टैंक में भरने के बाद घरों तक सप्लाई किया जाएगा।