{"_id":"60bf67498ebc3e6d4827a672","slug":"up-retired-ias-had-targeted-the-cm-over-the-dead-bodies-floating-in-ganga","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी: रिटायर्ड आईएएस ने गंगा में बहती लाशों को लेकर सीएम पर साधा था निशाना, बोले मेरी भी गाड़ी पलटा सकती है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: रिटायर्ड आईएएस ने गंगा में बहती लाशों को लेकर सीएम पर साधा था निशाना, बोले मेरी भी गाड़ी पलटा सकती है
Tue, 08 Jun 2021 06:19 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 08 Jun 2021 06:19 PM IST
विज्ञापन
सूर्य प्रताप सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
रिटायर्ड आईआएस सूर्य प्रताप सिंह के गंगा मे बहती लाशों की सात साल पहले की फोटो को अभी का बता कर ट्वीट करने के मामले में दर्ज हुए मुकदमें में मंलगवार को उनसे पूछताछ हुई। पुलिस से नोटिस मिलने के बाद सोहरामऊ थाने मे मंगलवार दोपहर विवेचक को जवाब देने पहुचे रिटायर्ड आईआएस सूर्य प्रताप सिंह ने कहाकि ट्वीट का मकसद सरकार को आईना दिखाना था। हिंदू रितिरिवाज के अनुसार शवो का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए था।
जांच अधिकारी के सवाल-जवाब
आईओ- ट्वीट आपके एकांउट से आपके द्वारा पोस्ट हुआ
रिटायर्ड आईएएस - हां
आईओ – फोटो पेस्ट करने का मकसद क्या था
रिटायर्ड आईएएस- वायरल फोटो 2014 का बलिया जिले का था। जो कि पोस्ट करते समय प्रतीकात्मक लिखा था,वैसे भी गंगा मे लाशो के उतराने का सिलसिला जारी था, इसको लेकर कई बड़े अखबारो व चैनलो ने खबरे भी प्रकाशित की है। किसी की भावना को ठेस पहुंचाना मकसद नही था। फिर भी सरकार को ऐसा लगा तो वायरल ट्वीट को डिलीट कर दिया था। कहाकि ट्वीट को मकसद सरकार को आईना दिखाना था। हिंदू रितिरिवाज के अनुसार शवो का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए था।
मैं पिछले पांच सालो से सोशल मीडिया के माध्यम से सरकारो को जगाने काकाम कर रहा हूं। मेरा कोई व्यक्तिगत मकसद नही था। मै अखिलेश सरकार मे भी जनहित से जुड़ी कई पोस्ट वायरल कर चुका हूं। लेकिन इस सरकार मे मेरे ऊपर लखनऊ मे 2,कानपुर में 1,वाराणसी मे 1,कासगंज में 1 व उन्नाव में 1 कुल मेरे पूर्व 6 मुकदमे लाद दिए गए। वैसे मुकदम से डरने वाला नही हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन
जांच अधिकारी के सवाल-जवाब
आईओ- ट्वीट आपके एकांउट से आपके द्वारा पोस्ट हुआ
रिटायर्ड आईएएस - हां
आईओ – फोटो पेस्ट करने का मकसद क्या था
रिटायर्ड आईएएस- वायरल फोटो 2014 का बलिया जिले का था। जो कि पोस्ट करते समय प्रतीकात्मक लिखा था,वैसे भी गंगा मे लाशो के उतराने का सिलसिला जारी था, इसको लेकर कई बड़े अखबारो व चैनलो ने खबरे भी प्रकाशित की है। किसी की भावना को ठेस पहुंचाना मकसद नही था। फिर भी सरकार को ऐसा लगा तो वायरल ट्वीट को डिलीट कर दिया था। कहाकि ट्वीट को मकसद सरकार को आईना दिखाना था। हिंदू रितिरिवाज के अनुसार शवो का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए था।
विज्ञापन
मैं पिछले पांच सालो से सोशल मीडिया के माध्यम से सरकारो को जगाने काकाम कर रहा हूं। मेरा कोई व्यक्तिगत मकसद नही था। मै अखिलेश सरकार मे भी जनहित से जुड़ी कई पोस्ट वायरल कर चुका हूं। लेकिन इस सरकार मे मेरे ऊपर लखनऊ मे 2,कानपुर में 1,वाराणसी मे 1,कासगंज में 1 व उन्नाव में 1 कुल मेरे पूर्व 6 मुकदमे लाद दिए गए। वैसे मुकदम से डरने वाला नही हूं।
विज्ञापन
समाजहित के लिए लड़ाई जारी रहेगी।कहाकि 5करोड़ युवा बेरोजगार घूम रहा हैं। शिक्षामित्रो व शिक्षको की समस्याओ का समाधान नही किया गया। 10लाख पद रिक्त उन्हे क्यो नही भरा जा रहा है। कोविड के आकड़े गलत बताए जाते है। 1500 शिक्षको की मौत को मात्र तीन मौते कोविड से बताकर मुआवजे का कोरम पूरा किया जाता है। अनाथ बच्चो की पालिसी लाई गई,उन्हे जांच के नाम पर अब तक लाभ नही दिया गया। 40पत्रकारो पर सच्चाई लिखने पर रिपोर्ट दर्ज कर दी गई।
गाड़ी पलट सकती है
बार-बार जांच के दौरान थाने बदलने पर उन्होने बगैर नाम लिए सरकार पर बिकरु कांड की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनकी भी गाड़ी पलटाई जा सकती है। आखिर क्यो जांच के नाम पर थाने क्यो बदले जाते है।
यह था मामला
रिटायर्ड आईआएस सूर्य प्रताप सिंह ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर लिखा था कि 67 शवों को योगी सरकार ने गंगा के तट पर जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया। शवों का अंतिम संस्कार हिन्दू रीति-रिवाज से न करना हिंदुओ के लिए कलंक जैसा है। यह ट्वीट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।
इसके बाद उनके खिलाफ 15 मई को मुकदमा आईटी एक्ट के तहत सदर कोतवाली मे मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना की जा रही है। रिटायर्ड आइएएस सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि वह प्रशासनिक सेवा से जुड़े रहे थे,कानून भी जानते हैं।जांच अधिकारी से निष्पक्ष जांच के लिए आग्रह किया।
गाड़ी पलट सकती है
बार-बार जांच के दौरान थाने बदलने पर उन्होने बगैर नाम लिए सरकार पर बिकरु कांड की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनकी भी गाड़ी पलटाई जा सकती है। आखिर क्यो जांच के नाम पर थाने क्यो बदले जाते है।
यह था मामला
रिटायर्ड आईआएस सूर्य प्रताप सिंह ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर लिखा था कि 67 शवों को योगी सरकार ने गंगा के तट पर जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया। शवों का अंतिम संस्कार हिन्दू रीति-रिवाज से न करना हिंदुओ के लिए कलंक जैसा है। यह ट्वीट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।
इसके बाद उनके खिलाफ 15 मई को मुकदमा आईटी एक्ट के तहत सदर कोतवाली मे मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना की जा रही है। रिटायर्ड आइएएस सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि वह प्रशासनिक सेवा से जुड़े रहे थे,कानून भी जानते हैं।जांच अधिकारी से निष्पक्ष जांच के लिए आग्रह किया।