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अब बोतल में ली लीजिये यूरिया खाद
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500 मिली बोतल में आई इफको लिक्विड यूरिया।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। सहकारी संस्था इफको ने लिक्विड में यूरिया तैयार कराई है। संस्था का दावा है कि लिक्विड यूरिया दानेदार उर्वरक से सस्ती है। इससे मिट्टी एवं भूजल प्रदूषित भी प्रदूषित नहीं होगा। यह अगले माह से उपलब्ध होगा।
इफको (इंडियन फारमर्स फर्टीलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड) ने नैनो तकनीक से लिक्विड नैनो यूरिया विकसित करने का दावा है। इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक मानवेंद्र सिंह ने बताया कि लिक्विड यूरिया उर्वरक के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाएगी। 500 मिली लिक्विड यूरिया 45 किग्रा की बोरी के बराबर काम करेगी। 500 की बोतल का मूल्य 240 रुपये होगा है। यह 45 किग्रा की बोरी से 10 प्रतिशत कम है।
उन्होंने बताया कि 500 मिली की बोतल एक एकड़ के लिए पर्याप्त है। 500 मिली नैनो यूरिया को 125 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर दो बार छिड़काव करना होगा। पहला छिड़काव 25-30 दिन एवं दूसरा छिड़काव 45-50 दिन की अवधि में करना होगा। बताया कि अगले माह से लिक्विड यूरिया साधन सहकारी समितियों व इफको केंद्रों पर उपलब्ध हो जाएगी।
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मिट्टी और पर्यावरण के लिए है लाभदायक
क्षेत्र प्रबंधक के मुताबिक, लिक्विड यूरिया का छिड़काव मिट्टी एवं भू-जल को प्रदूषित नहीं करेगा। बताया कि दानेदार यूरिया में उपलब्ध नाइट्रोजन में से 30-40 प्रतिशत नाइट्रोजन ही पौधे उपयोग कर पाते हैं। जबकि लिक्विड यूरिया के छिड़काव होने के कारण पत्तियों पर उपलब्ध छिद्रों द्वारा आसानी से इसे अवशोषित कर लिया जाएगा। जिससे कुल उपलब्ध नाइट्रोजन का 80-90 प्रतिशत पौधे को प्राप्त हो जाता है। इससे फसल लागत में कमी आएगी और अधिक पैदावार मिलेगी। समितियों तक पहुंचने में भाड़ा भी कम खर्च होगा।
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इफको (इंडियन फारमर्स फर्टीलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड) ने नैनो तकनीक से लिक्विड नैनो यूरिया विकसित करने का दावा है। इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक मानवेंद्र सिंह ने बताया कि लिक्विड यूरिया उर्वरक के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाएगी। 500 मिली लिक्विड यूरिया 45 किग्रा की बोरी के बराबर काम करेगी। 500 की बोतल का मूल्य 240 रुपये होगा है। यह 45 किग्रा की बोरी से 10 प्रतिशत कम है।
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उन्होंने बताया कि 500 मिली की बोतल एक एकड़ के लिए पर्याप्त है। 500 मिली नैनो यूरिया को 125 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर दो बार छिड़काव करना होगा। पहला छिड़काव 25-30 दिन एवं दूसरा छिड़काव 45-50 दिन की अवधि में करना होगा। बताया कि अगले माह से लिक्विड यूरिया साधन सहकारी समितियों व इफको केंद्रों पर उपलब्ध हो जाएगी।
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मिट्टी और पर्यावरण के लिए है लाभदायक
क्षेत्र प्रबंधक के मुताबिक, लिक्विड यूरिया का छिड़काव मिट्टी एवं भू-जल को प्रदूषित नहीं करेगा। बताया कि दानेदार यूरिया में उपलब्ध नाइट्रोजन में से 30-40 प्रतिशत नाइट्रोजन ही पौधे उपयोग कर पाते हैं। जबकि लिक्विड यूरिया के छिड़काव होने के कारण पत्तियों पर उपलब्ध छिद्रों द्वारा आसानी से इसे अवशोषित कर लिया जाएगा। जिससे कुल उपलब्ध नाइट्रोजन का 80-90 प्रतिशत पौधे को प्राप्त हो जाता है। इससे फसल लागत में कमी आएगी और अधिक पैदावार मिलेगी। समितियों तक पहुंचने में भाड़ा भी कम खर्च होगा।