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दो साल में 7.56 करोड़ का चारा खा गए ‘संरक्षित’ मवेशी
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उन्नाव। छुट्टा मवेशियों को लेकर प्रदेश सरकार कितनी प्रतिबद्ध है इसका अंदाजा योगी सरकार द्वारा पिछले दो साल में जनपद को जानवरों के भरण-पोषण के लिए दी गई धनराशि से पता चलता है। शासन द्वारा मवेशियों के चारे के लिए अब तक 7.56 करोड़ दिए जा चुके हैं। जिन्हें पशुपालन विभाग ब्लॉकों में देने का दावा कर रहा है।
विकासखंडाें में मनरेगा से गोशालाएं खोलने के लिए जमीन चिह्नित करके 7 जनवरी 2019 को विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित से शिलान्यास कराया गया था। इसके बाद गोवंश आश्रयस्थलों में छुट्टा मवेशियों को पहुंचाने का काम शुरू किया गया था। फिर प्रदेश सरकार ने संरक्षित पशुओं के भरण-पोषण के लिए धनराशि देनी शुरू की। 5 फरवरी 2019 को पहली किस्त के रूप में जिलाधिकारी के खाते में 1 करोड़ रुपये भेजे गए। फिर 25 मई को 20 लाख और 31 अगस्त को 69 लाख रुपये और दिए गए।
पशुपालन विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, अब तक पशुओं का पेट भरने के लिए 7.56 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। यानि दो साल में इतनी धनराशि का भूसा मवेशी खा गए हैं। हालांकि शासनादेश के मुताबिक, मवेशियों को हरा चारा दिया जाना चाहिए लेकिन अधिकांश गोशालाओं में बंद मवेशियों को सूखा भूसा ही दिया जा रहा है। जिले में अस्थायी व स्थायी 162 गोशालाएं संचालित हैं। इसमें 8143 पशु संरक्षित हैं।
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ब्लॉकवार दी गई धनराशि
सिकंदरपुर सरोसी-73.18 लाख, सिकंदरपुर कर्ण-63.17 लाख, सफीपुर-51.91 लाख, औरास-61.59 लाख, बीघापुर-45.34 लाख, फतेहपुर चौरासी-25.34 लाख, असोहा-71.74 लाख, हिलौली-56.80 लाख, नवाबगंज-26.30 लाख, हसनगंज-39.63 लाख, गंजमुरादाबाद-1.08 करोड़, मियागंज-62.95 लाख, बिछिया-35.99 लाख और बांगरमऊ-34.73 लाख।
भूसे के लिए दी जाने वाली धनराशि का होता है ऑडिट
प्रदेश सरकार गोशालाओं में बंद मवेशियों का पेट भरने के लिए जो धनराशि देती है, उसका ऑडिट भी कराती है। पिछले साल जो धनराशि दी गई थी उसका शासन ने ऑडिट कराया था। इसमें असोहा, औरास व पुरवा ब्लॉकों में काफी गड़बड़ी मिली थी। इन ब्लॉकों में भूसा खरीद के कागज नहीं मिल पाए थे। हालांकि सीवीओ का कहना है कि 5 हजार तक की भूसा खरीद के लिए रसीदी टिकट लगा सामान्य पेपर भी स्वीकार कर लिया जाता है।
30 रुपये प्रति गोवंश के चारे के लिए दी गई है धनराशि
शासनादेश के अनुसार, गोवंशस्थल में बंद मवेशियों के चारे के लिए 30 प्रति रुपये प्रति मवेशी के हिसाब से 7.56 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई थी। इसमें से 7.35 करोड़ का उपभोग प्रमाणपत्र मिल चुका है। अब शासन से 1.35 करोड़ रुपये और मिले हैं। जिसे ब्लॉकों को आवंटित किया जा रहा है।
-डॉ. पीके सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, उन्नाव।
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विकासखंडाें में मनरेगा से गोशालाएं खोलने के लिए जमीन चिह्नित करके 7 जनवरी 2019 को विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित से शिलान्यास कराया गया था। इसके बाद गोवंश आश्रयस्थलों में छुट्टा मवेशियों को पहुंचाने का काम शुरू किया गया था। फिर प्रदेश सरकार ने संरक्षित पशुओं के भरण-पोषण के लिए धनराशि देनी शुरू की। 5 फरवरी 2019 को पहली किस्त के रूप में जिलाधिकारी के खाते में 1 करोड़ रुपये भेजे गए। फिर 25 मई को 20 लाख और 31 अगस्त को 69 लाख रुपये और दिए गए।
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पशुपालन विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, अब तक पशुओं का पेट भरने के लिए 7.56 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। यानि दो साल में इतनी धनराशि का भूसा मवेशी खा गए हैं। हालांकि शासनादेश के मुताबिक, मवेशियों को हरा चारा दिया जाना चाहिए लेकिन अधिकांश गोशालाओं में बंद मवेशियों को सूखा भूसा ही दिया जा रहा है। जिले में अस्थायी व स्थायी 162 गोशालाएं संचालित हैं। इसमें 8143 पशु संरक्षित हैं।
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ब्लॉकवार दी गई धनराशि
सिकंदरपुर सरोसी-73.18 लाख, सिकंदरपुर कर्ण-63.17 लाख, सफीपुर-51.91 लाख, औरास-61.59 लाख, बीघापुर-45.34 लाख, फतेहपुर चौरासी-25.34 लाख, असोहा-71.74 लाख, हिलौली-56.80 लाख, नवाबगंज-26.30 लाख, हसनगंज-39.63 लाख, गंजमुरादाबाद-1.08 करोड़, मियागंज-62.95 लाख, बिछिया-35.99 लाख और बांगरमऊ-34.73 लाख।
भूसे के लिए दी जाने वाली धनराशि का होता है ऑडिट
प्रदेश सरकार गोशालाओं में बंद मवेशियों का पेट भरने के लिए जो धनराशि देती है, उसका ऑडिट भी कराती है। पिछले साल जो धनराशि दी गई थी उसका शासन ने ऑडिट कराया था। इसमें असोहा, औरास व पुरवा ब्लॉकों में काफी गड़बड़ी मिली थी। इन ब्लॉकों में भूसा खरीद के कागज नहीं मिल पाए थे। हालांकि सीवीओ का कहना है कि 5 हजार तक की भूसा खरीद के लिए रसीदी टिकट लगा सामान्य पेपर भी स्वीकार कर लिया जाता है।
30 रुपये प्रति गोवंश के चारे के लिए दी गई है धनराशि
शासनादेश के अनुसार, गोवंशस्थल में बंद मवेशियों के चारे के लिए 30 प्रति रुपये प्रति मवेशी के हिसाब से 7.56 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई थी। इसमें से 7.35 करोड़ का उपभोग प्रमाणपत्र मिल चुका है। अब शासन से 1.35 करोड़ रुपये और मिले हैं। जिसे ब्लॉकों को आवंटित किया जा रहा है।
-डॉ. पीके सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, उन्नाव।