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असफल नहीं होती पूर्ण समर्पण से की गई आराधना
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फ तेहपुर चौरासी। पूर्ण समर्पण एवं दृढ़ विश्वास के साथ की गयी आराधना कभी असफ ल नहीं होती है। ईश्वर भी अपने भक्तों की परीक्षा तो अवश्य लेते हैं, वहीं भक्त की पुकार पर रक्षा भी करते हैं।
यह सदुपदेश कस्बे में मां शीतला देवी मंदिर पर हो रही श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर कुमारी सुनीता शास्त्री ने दिए। उन्होंने कहा कि नि:स्वार्थ व सच्चे मन से की गई सेवा ही सार्थक होती है। छल कपट के साथ की गई सेवा भी निष्प्रभावी होती है। अश्वत्थामा द्वारा जब धोखे से पांच पांडव के वध की जगह पांडव के पांच पुत्रों की हत्या हो गई। तब सभी पांडव अश्वत्थामा को इस अक्षम्य अपराध का दंड देने के लिए तत्पर हुए। अश्वत्थामा ने पांडव के वध के लिए ब्रह्मास्त्र चला दिया। अर्जुन ने भी अपने बचाव में कृष्ण के कहने पर ब्रह्मास्त्र चला दिया। दोनों अमोघ अस्त्र के चलने से सृष्टि पर संकट छा गया। परिणामस्वरूप सृष्टि की रक्षा के लिए वेदव्यास ने न केवल दोनों अमोघ अस्त्रों को रोका बल्कि अर्जुन व अश्वत्थामा से अपने अस्त्र वापस लेने के लिए कहा। अर्जुन ने वापस ले लिया।
वहीं अश्वत्थामा ने इस अस्त्र को वापस लेने में असमर्थता व्यक्त करते हुए ब्रह्मास्त्र की दिशा बदल कर उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ दिया। पांडव वंश को समाप्त होते देख अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने कृष्ण से गर्भ में बच्चे की सुरक्षा की पुकार लगाई। भक्त की पुकार पर कन्हैया न केवल उत्तरा के गर्भ में प्रवेश कर ब्रह्मास्त्र को निस्तेज किया बल्कि गर्भस्थ शिशु को भी जीवनदान दिया। शास्त्री ने कहा कि अधर्म चाहे जितना प्रभावशाली हो जाए अंत में विजय धर्म की ही होती है। इसलिए हम सभी को धर्म का अनुसरण करना चाहिए। आयोजक नगर पंचायत अध्यक्ष अनिल अवस्थी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अतुल मिश्रा व जुगुल किशोर ने सभी भक्तों को भागवत कथा श्रवण के लिए आमंत्रित किया है।
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यह सदुपदेश कस्बे में मां शीतला देवी मंदिर पर हो रही श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर कुमारी सुनीता शास्त्री ने दिए। उन्होंने कहा कि नि:स्वार्थ व सच्चे मन से की गई सेवा ही सार्थक होती है। छल कपट के साथ की गई सेवा भी निष्प्रभावी होती है। अश्वत्थामा द्वारा जब धोखे से पांच पांडव के वध की जगह पांडव के पांच पुत्रों की हत्या हो गई। तब सभी पांडव अश्वत्थामा को इस अक्षम्य अपराध का दंड देने के लिए तत्पर हुए। अश्वत्थामा ने पांडव के वध के लिए ब्रह्मास्त्र चला दिया। अर्जुन ने भी अपने बचाव में कृष्ण के कहने पर ब्रह्मास्त्र चला दिया। दोनों अमोघ अस्त्र के चलने से सृष्टि पर संकट छा गया। परिणामस्वरूप सृष्टि की रक्षा के लिए वेदव्यास ने न केवल दोनों अमोघ अस्त्रों को रोका बल्कि अर्जुन व अश्वत्थामा से अपने अस्त्र वापस लेने के लिए कहा। अर्जुन ने वापस ले लिया।
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वहीं अश्वत्थामा ने इस अस्त्र को वापस लेने में असमर्थता व्यक्त करते हुए ब्रह्मास्त्र की दिशा बदल कर उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ दिया। पांडव वंश को समाप्त होते देख अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने कृष्ण से गर्भ में बच्चे की सुरक्षा की पुकार लगाई। भक्त की पुकार पर कन्हैया न केवल उत्तरा के गर्भ में प्रवेश कर ब्रह्मास्त्र को निस्तेज किया बल्कि गर्भस्थ शिशु को भी जीवनदान दिया। शास्त्री ने कहा कि अधर्म चाहे जितना प्रभावशाली हो जाए अंत में विजय धर्म की ही होती है। इसलिए हम सभी को धर्म का अनुसरण करना चाहिए। आयोजक नगर पंचायत अध्यक्ष अनिल अवस्थी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अतुल मिश्रा व जुगुल किशोर ने सभी भक्तों को भागवत कथा श्रवण के लिए आमंत्रित किया है।
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