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Unnao News: बयान से मुकरी महिला, दर्ज होगा प्रकीर्ण वाद
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उन्नाव। युवक पर दुष्कर्म की कोशिश का मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला ने अदालत में अपना बयान बदल दिया। महिला ने बताया कि उसने पुलिस के दबाव में यह आरोप लगाया था। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया। मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने पर महिला के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
सफीपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने एसपी को शिकायत देकर बताया कि 30 मार्च 2025 काे वह गांव के बाहर गई थी। लौटते समय रास्ते में जटपुरवा गांव निवासी सुरेश ने दुष्कर्म की कोशिश की। शोर मचाने पर ग्रामीणों को आते देखकर आरोपी भाग निकला था। वह थाना पहुंची लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी। एसपी के आदेश पर पुलिस ने आपराधिक बल प्रयोग, दुष्कर्म का प्रयास समेत कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था। विचारण के दौरान पीड़िता और मुख्य गवाह रणविजय अदालत में पेश हुए और अभियोजन पक्ष के आरोप का समर्थन नहीं किया। महिला ने बताया कि घटना के समय अंधेरा था और हमलावर का चेहरा ढका था। इस कारण वह उसकी पहचान नहीं कर सकी। छेड़छाड़ व गलत हरकत करने से भी इन्कार किया। बताया कि पूर्व में पुलिस के दबाव में बयान दिया था। अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को साबित न कर पाने पर अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी रवि प्रकाश साहू ने सुरेश को दोषमुक्त कर दिया।
न्यायाधीश ने मिथ्या साक्ष्य देने की आरोपी महिला को बीएनएसएस की धारा 383 के तहत नोटिस भेजकर प्रकीर्ण वाद दर्ज कराने का आदेश दिया है। मिथ्या साक्ष्य देने में तीन माह की कैद, एक हजार रुपये अर्थदंड जैसी सजा का प्रावधान है।
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सफीपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने एसपी को शिकायत देकर बताया कि 30 मार्च 2025 काे वह गांव के बाहर गई थी। लौटते समय रास्ते में जटपुरवा गांव निवासी सुरेश ने दुष्कर्म की कोशिश की। शोर मचाने पर ग्रामीणों को आते देखकर आरोपी भाग निकला था। वह थाना पहुंची लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी। एसपी के आदेश पर पुलिस ने आपराधिक बल प्रयोग, दुष्कर्म का प्रयास समेत कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था। विचारण के दौरान पीड़िता और मुख्य गवाह रणविजय अदालत में पेश हुए और अभियोजन पक्ष के आरोप का समर्थन नहीं किया। महिला ने बताया कि घटना के समय अंधेरा था और हमलावर का चेहरा ढका था। इस कारण वह उसकी पहचान नहीं कर सकी। छेड़छाड़ व गलत हरकत करने से भी इन्कार किया। बताया कि पूर्व में पुलिस के दबाव में बयान दिया था। अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को साबित न कर पाने पर अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी रवि प्रकाश साहू ने सुरेश को दोषमुक्त कर दिया।
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न्यायाधीश ने मिथ्या साक्ष्य देने की आरोपी महिला को बीएनएसएस की धारा 383 के तहत नोटिस भेजकर प्रकीर्ण वाद दर्ज कराने का आदेश दिया है। मिथ्या साक्ष्य देने में तीन माह की कैद, एक हजार रुपये अर्थदंड जैसी सजा का प्रावधान है।
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