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Unnao News: किशोर शिक्षा कार्यक्रम से छात्रों को देंगे बदलती संरचना का ज्ञान
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उन्नाव। किशोर शिक्षा कार्यक्रम के तहत छात्रों को बदलती संरचना का ज्ञान दिया जाएगा। माध्यमिक स्तर से संचालित स्कूलों में किशोर शिक्षा कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। पढ़ाई कर 10 से 19 साल तक के छात्रों को इसमें शारीरिक परिवर्तनों के साथ प्रजनन व्यवस्था, एचआईवी से बचाव और जीवन कौशल की जानकारी दी जाएगी, ताकि उन्हें समय पर मानसिक विकास के साथ भावनात्मक बदलावों को समझने में आसानी हो सके।
किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम (एईपी) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) का उद्देश्य 10-19 वर्ष के किशोरों को स्वास्थ्य, पोषण, यौन शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन कौशल की जानकारी देना है। समय पर किशोरों को जानकारी होने से आगे आने वाली समस्याएं दूर हो सकती हैं। इसलिए सरकार ने माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ किशोर शिक्षा कार्यक्रम का भी संचालन करने के निर्देश दिए हैं। डीआईओएस सुनीलदत्त ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरों को शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों के प्रति जागरूक करना और उन्हें जीवन कौशल की सीख देना है। यह शिक्षा कक्षा 8 से 12 तक के छात्र-छात्राओं को दी जाएगी।
यह हैं मुख्य विषय
बढ़ती उम्र की प्रक्रिया: शारीरिक और हार्मोनल बदलाव।
यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य: जानकारी और सुरक्षा।
एचआईवी/एड्स की रोकथाम।
नशीली दवाओं के दुरुपयोग से बचाव।
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किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम (एईपी) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) का उद्देश्य 10-19 वर्ष के किशोरों को स्वास्थ्य, पोषण, यौन शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन कौशल की जानकारी देना है। समय पर किशोरों को जानकारी होने से आगे आने वाली समस्याएं दूर हो सकती हैं। इसलिए सरकार ने माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ किशोर शिक्षा कार्यक्रम का भी संचालन करने के निर्देश दिए हैं। डीआईओएस सुनीलदत्त ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरों को शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों के प्रति जागरूक करना और उन्हें जीवन कौशल की सीख देना है। यह शिक्षा कक्षा 8 से 12 तक के छात्र-छात्राओं को दी जाएगी।
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यह हैं मुख्य विषय
बढ़ती उम्र की प्रक्रिया: शारीरिक और हार्मोनल बदलाव।
यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य: जानकारी और सुरक्षा।
एचआईवी/एड्स की रोकथाम।
नशीली दवाओं के दुरुपयोग से बचाव।