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Unnao News: रामपुर गढ़ौवा और इछौली के बच्चों ने बनाया हर्बल गुलाल
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फोटो- 10-रामपुर गढ़ौवा उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के साथ हर्बल गुलाल तैयार करती छात्रा
उन्नाव। इस बार होली के लिए बाजार से नहीं, प्रयोगशाला से गुलाल आएंगे। औरास के रामपुर गढ़ौवा और बिछिया के इछौली विद्यालयों के बच्चों ने हर्बल गुलाल बनाया है। उन्होंने विज्ञान को उत्सव से जोड़ते हुए यह अनूठा कार्य किया।
रामपुर में बच्चों और शिक्षिका शाहे खुबा, इछौली में हरिओम और अंजना मिश्र ने बच्चों संग एप्रन और कैप पहनकर पूरी वैज्ञानिक पद्धति से प्राकृतिक रंग तैयार किए। गेंदा, चुकंदर, पालक व अन्य पत्तेदार सब्जियों को बारीक से काटकर उबालने के बाद उनका अर्क निकाला गया। फिर उसे कॉर्न स्टार्च में मिलाकर सुखाया गया। तैयार हुआ गुलाल मुलायम त्वचा के लिए सुरक्षित रखने के साथ पर्यावरण के लिए अनुकूल है। पीले, गुलाबी, नारंगी और हरे रंग की सजी थालियां बच्चों की मेहनत और वैज्ञानिक समझ का सजीव उदाहरण बनीं।
छात्र-छात्राओं ने तैयार रंगों को पैक कर बाजार में उतारने की योजना बनाई है। पारदर्शी पैकों में गुलाल सलीके से भरा गया है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करती है। शिक्षकों ने बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए खुद चार-चार पैक खरीदे। प्रदीप वर्मा और हरिओम के मार्गदर्शन में कई बच्चों ने इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई। बच्चों ने प्राकृतिक गुलाल को रासायनिक रंगों से बेहतर बताया।
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रामपुर में बच्चों और शिक्षिका शाहे खुबा, इछौली में हरिओम और अंजना मिश्र ने बच्चों संग एप्रन और कैप पहनकर पूरी वैज्ञानिक पद्धति से प्राकृतिक रंग तैयार किए। गेंदा, चुकंदर, पालक व अन्य पत्तेदार सब्जियों को बारीक से काटकर उबालने के बाद उनका अर्क निकाला गया। फिर उसे कॉर्न स्टार्च में मिलाकर सुखाया गया। तैयार हुआ गुलाल मुलायम त्वचा के लिए सुरक्षित रखने के साथ पर्यावरण के लिए अनुकूल है। पीले, गुलाबी, नारंगी और हरे रंग की सजी थालियां बच्चों की मेहनत और वैज्ञानिक समझ का सजीव उदाहरण बनीं।
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छात्र-छात्राओं ने तैयार रंगों को पैक कर बाजार में उतारने की योजना बनाई है। पारदर्शी पैकों में गुलाल सलीके से भरा गया है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करती है। शिक्षकों ने बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए खुद चार-चार पैक खरीदे। प्रदीप वर्मा और हरिओम के मार्गदर्शन में कई बच्चों ने इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई। बच्चों ने प्राकृतिक गुलाल को रासायनिक रंगों से बेहतर बताया।
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