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Unnao News: बारिश से आलू और सरसों की फसल को भी नुकसान
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उन्नाव/अचलगंज। बारिश से सरसों के साथ आलू के नुकसान को लेकर किसान चिंतित हैं। इससे पहले धान की तैयार फसल को पहले ही नुकसान हो चुका है।
इस वर्ष देर तक हुई बारिश के चलते धान की फसल पकने में भी देरी हुई। अधिकांश खेतों में अभी भी कटाई नहीं हो पाई। जहां कटाई हुई है वहां मड़ाई नहीं हो पाई। इससे खेत में कटी पड़ी फसल पानी व तेज हवाओं से खराब हो गई है। इससे अच्छी उपज की उम्मीद लगाए किसान निराश दिख रहे हैं।
क्षेत्र में साठ प्रतिशत आलू बोया जा चुका है। इनमें अभी पौधे ही आ पाए हैं। ऐसे में बीज सड़ने की संभावना अधिक हो गई है। बोने के लिए बनाई गई नाली पानी से भर गई हैं। इससे बीज अंकुरण होने में दिक्कत आएगी। कहीं-कहीं दोबारा आलू बोने की नौबत भी आ सकती है। इसके अलावा जिन किसानों को सरसों बोने में देरी हुई है, उनके खेतों में पानी भर जाने से बीज दोबारा बोना पड़ सकता है।
इस बारिश किसानों को फायदा कम नुकसान अधिक हुआ है। जिला कृषि अधिकारी शशांक कुमार ने बताया कि सरसों का इस बार प्रस्तावित क्षेत्रफल 43702 हेक्टेयर है। इसमें करीब 40 प्रतिशत बुआई हो पाई है। अब बारिश होने से खेत में पानी भर गया है। ऐसे में किसानों को दोबारा बीज बोना पड़ सकता है। उधर, शुक्रवार को बारिश नहीं हुई। आसमान में बादलों की आवाजाही लगी रही। चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के मौसम विशेषज्ञ डॉ. सुनील पांडेय ने बताया कि मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार, अब आगे आसमान साफ़ होने के साथ धूप भी निकलने के आसार हैं।
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इस वर्ष देर तक हुई बारिश के चलते धान की फसल पकने में भी देरी हुई। अधिकांश खेतों में अभी भी कटाई नहीं हो पाई। जहां कटाई हुई है वहां मड़ाई नहीं हो पाई। इससे खेत में कटी पड़ी फसल पानी व तेज हवाओं से खराब हो गई है। इससे अच्छी उपज की उम्मीद लगाए किसान निराश दिख रहे हैं।
क्षेत्र में साठ प्रतिशत आलू बोया जा चुका है। इनमें अभी पौधे ही आ पाए हैं। ऐसे में बीज सड़ने की संभावना अधिक हो गई है। बोने के लिए बनाई गई नाली पानी से भर गई हैं। इससे बीज अंकुरण होने में दिक्कत आएगी। कहीं-कहीं दोबारा आलू बोने की नौबत भी आ सकती है। इसके अलावा जिन किसानों को सरसों बोने में देरी हुई है, उनके खेतों में पानी भर जाने से बीज दोबारा बोना पड़ सकता है।
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इस बारिश किसानों को फायदा कम नुकसान अधिक हुआ है। जिला कृषि अधिकारी शशांक कुमार ने बताया कि सरसों का इस बार प्रस्तावित क्षेत्रफल 43702 हेक्टेयर है। इसमें करीब 40 प्रतिशत बुआई हो पाई है। अब बारिश होने से खेत में पानी भर गया है। ऐसे में किसानों को दोबारा बीज बोना पड़ सकता है। उधर, शुक्रवार को बारिश नहीं हुई। आसमान में बादलों की आवाजाही लगी रही। चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के मौसम विशेषज्ञ डॉ. सुनील पांडेय ने बताया कि मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार, अब आगे आसमान साफ़ होने के साथ धूप भी निकलने के आसार हैं।
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