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Unnao News: 16 साल बाद एक और टाउनशिप
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उन्नाव। जमीन न होने से 16 साल से किसी नई आवासीय योजना पर काम नहीं कर पा रहे उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण को मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना का सहारा मिला है।
शासन से योजना के तहत 58.43 करोड़ रुपये स्वीकृत होने से शहर को एक और टाउनशिप अटलपुरम का रास्ता साफ हो गया है। करोवन-सरोसी मार्ग पर चौरा व मैनीखेड़ा गांव के बीच 27.806 हेक्टेयर जमीन पर एक हजार आवासीय भूखंड उपलब्ध होंगे।
डीएम घनश्याम मीना की पहल पर उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण लंबे समय बाद किसी आवासीय योजना का खाका खींचा था और इसे मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
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2002 में प्रियदर्शनी नगर और 2010 में निराला नगर फेज एक को विकसित करने के बाद प्राधिकरण ने 2012 में निराला नगर फेज दो योजना लांच की थी। हालांकि कुछ भूमि मालिकों के जमीन देने से इन्कार और बाद में न्यायालय में जाने से योजना अबतक धरातल पर नहीं उतर सकी।
जमीन (लैंड बैंक) न होने से प्राधिकरण किसी नई योजना पर काम नहीं कर पाया। पुरानी संपत्तियों की बिक्री और टैक्स आदि से होने वाली आमदनी के सहारे काम चला रहा है।
अब प्राधिकरण को मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना का सहारा मिला है। इसके लिए कुल 27.806 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। इसमें किसानों की 26.32 हेक्टेयर और सरकारी (ग्राम समाज) की 1.47 हेक्टेयर जमीन शामिल है।
शासन से बजट स्वीकृत और पहली किस्त जारी होने के बाद अब प्राधिकरण ने किसानों की जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजा तय करने की प्रक्रिया पूरी करने में जुट गया है। अटलपुरम के नाम से विकसित होने वाली टाउनशिप पर होने वाले खर्च का पचास फीसदी बजट सरकार और पचास प्रतिशत रकम प्राधिकरण को देनी है।
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शासन से योजना के तहत 58.43 करोड़ रुपये स्वीकृत होने से शहर को एक और टाउनशिप अटलपुरम का रास्ता साफ हो गया है। करोवन-सरोसी मार्ग पर चौरा व मैनीखेड़ा गांव के बीच 27.806 हेक्टेयर जमीन पर एक हजार आवासीय भूखंड उपलब्ध होंगे।
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डीएम घनश्याम मीना की पहल पर उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण लंबे समय बाद किसी आवासीय योजना का खाका खींचा था और इसे मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
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2002 में प्रियदर्शनी नगर और 2010 में निराला नगर फेज एक को विकसित करने के बाद प्राधिकरण ने 2012 में निराला नगर फेज दो योजना लांच की थी। हालांकि कुछ भूमि मालिकों के जमीन देने से इन्कार और बाद में न्यायालय में जाने से योजना अबतक धरातल पर नहीं उतर सकी।
जमीन (लैंड बैंक) न होने से प्राधिकरण किसी नई योजना पर काम नहीं कर पाया। पुरानी संपत्तियों की बिक्री और टैक्स आदि से होने वाली आमदनी के सहारे काम चला रहा है।
अब प्राधिकरण को मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना का सहारा मिला है। इसके लिए कुल 27.806 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। इसमें किसानों की 26.32 हेक्टेयर और सरकारी (ग्राम समाज) की 1.47 हेक्टेयर जमीन शामिल है।
शासन से बजट स्वीकृत और पहली किस्त जारी होने के बाद अब प्राधिकरण ने किसानों की जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजा तय करने की प्रक्रिया पूरी करने में जुट गया है। अटलपुरम के नाम से विकसित होने वाली टाउनशिप पर होने वाले खर्च का पचास फीसदी बजट सरकार और पचास प्रतिशत रकम प्राधिकरण को देनी है।