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Unnao News: टोल बचाने के लिए खनिज वाहन चालकों ने खोजे चोर रास्ते
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फोटो-18-अजगैन-मोहान मार्ग जिसपर भारी वाहनों से अक्सर होते हैं हादसे। संवाद
उन्नाव। टोल टैक्स बचाने और अधिकारियों की नजर से बचकर निकलने के लिए खनिज परिवहन करने वाले वाहन चालकों ने ग्रामीण रास्तों के रूप में चोर रास्ते खोज लिए हैं। गांव के इन संकरे रास्तों पर भारी वाहनों का दिन-रात आवागमन होने से हादसे बढ़े हैं। इतना ही नहीं इन पर 40 से 100 टन माल लादकर चलने वाले इन ओवरलोड भारी वाहनों का भार ग्रामीण मार्ग नहीं उठा पा रहे हैं। ग्रामीण मार्ग 20 से 25 टन की भार क्षमता वाले वाहनों के लिहाज से बनाए जाते हैं। इससे यह मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इनमें बक्सर-बिहार मार्ग, पुरवा-मौरावां मोहनलालगंज मार्ग, कालूखेड़ा-सोहरामऊ मार्ग, नवाबगंज-लखनापुर मार्ग, अजगैन-मोहान आदि प्रमुख हैं।
फोटो-18-- अजगैन-मोहान मार्ग जिसपर भारी वाहनों से अक्सर होते हैं हादसे। संवाद
सड़क-एक
अजगैन-मोहान मार्ग भारी वाहनों से दो महीने में तीन बार टूटा
हसनगंज। अजगैन-मोहान मार्ग से रोजाना औसतन 200 भारी वाहनों का आवागमन होता है। यह मार्ग कानपुर-लखनऊ हाईवे को लखनऊ-कन्नौज मार्ग और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को भी जोड़ता है। टोल बचाने के लिए चालक टोल प्लाजा से सात किलोमीटर पहले इस मार्ग से मुड़कर मलिहाबाद, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी आदि जिलों को जाते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही से मार्ग कुछ ही साल में क्षतिग्रस्त हो जाता है। वर्ष 2017 में इस 18 किलोमीटर लंबे मार्ग के पैचवर्क पर 2.90 करोड़ रुपये खर्च किए थे लेकिन सड़क सात महीने में ही ध्वस्त हो गई थी। कई साल इंतजार के बाद जनवरी 24 में शासन ने मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए 25.51 करोड़ स्वीकृत किए तो सड़क का निर्माण और चौड़ीकरण कराया गया। भारी वाहनों की दिन-रात आवाजाही से हादसे बढ़े और सड़क फिर टूटने लगी तो एक महीने पहले तहसील और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त रूप से कदम उठाते हुए नवई गांव के पास हाइटगेज बैरियर लगवाया। भारी वाहनों ने टक्कर मार कर इसे दो महीने में तीन बार तोड़ दिया। क्षेत्र के रमेश, विनोद, राम पाल आदि ने बताया कि खनिज लदे वाहन लगातार निकल रहे हैं। एसडीएम प्रज्ञा पांडेय ने बताया कि परिवहन विभाग के माध्यम से कार्रवाई कराई जाएगी। (संवाद)
फोटो-19-
नवाबगंज-लखनापुर मार्ग पर निकल रहे भारी वाहन। संवाद
सड़क-दो
चार साल में टूट गई 20 करोड़ की सड़क
नवाबगंज। टोल कर बचाने के लिए भारी व ओवरलोड ट्रक-डंपर चालकों ने लखनऊ जाने के लिए नवाबगंज-लखनापुर मार्ग को रास्ता बना लिया है। अजगैन-मोहान मार्ग को जोड़ने वाला यह मार्ग आठ किलोमीटर लंबा है। वर्ष 2022 में 20 करोड़ से मार्ग का नवनिर्माण हुआ था। दावा किया गया था कि पांच साल तक सड़क में एक भी गड्ढा नहीं होगा। हालांकि दावे तीन साल में ही हवा हो गए। वर्तमान में रोजाना औसतन 150 भारी वाहन इस मार्ग से निकलते हैं। लखनापुर निवासी अजय कुमार, शिवशंकर, दिनेश कुमार, सावित्री आदि ने बताया कि भारी वाहनों की दिन-रात आवाजाही से आए दिन हादसे होते हैं और सड़क भी क्षतिग्रस्त हो रही है। (संवाद)
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फोटो-20-बक्सर-बिहार दो लेन मार्ग, जिससे रोज निकलते हैं एक हजार वाहन। संवाद
सड़क-तीन
हर दिन निकलते हैं करीब एक हजार वाहन
पाटन। बीघापुर तहसील के बक्सर-बिहार मार्ग की लंबाई 23 किलोमीटर है। इस दो लेन मार्ग पर बुधवार को हुए हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी। मार्ग पर रोजाना औसतन एक हजार वाहनों की आवाजाही से रोज कोई न कोई हादसा होता है। यह वजह है कि इस दो लेन मार्ग की अक्तूबर 2024 में 24 करोड़ रुपये से मरम्मत कराई गई थी। इसके बाद यह फिर कई जगह उखड़ गया है। सड़क किनारे की कच्ची पटरी भी गायब है इससे भारी वाहनों को ओवरटेक करते समय अक्सर हादसे होते हैं। करीब 35 किलोमीटर की दूरी और चेकिंग व टोल शुल्क बचाने के लिए बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट, फतेहपुर आदि से खनिज लेकर लखनऊ जाने-आने के लिए कानपुर-लखनऊ हाईवे के बजाय इस मार्ग से प्रयागराज हाईवे पर चौडगरा चौराहा से बक्सर गंगा नदी पुल से ऊंचगांव, भगवंतनगर, मौरावां होते हुए मोहनलालगंज से लखनऊ जाते हैं।परिवहन विभाग के डिप्टी कमिश्नर राधेश्याम, आरटीओ प्रभात पांडेय ने बिहार बक्सर मार्ग पर हुए हादसे की जांच की थी। पाया कि मार्ग संकरा और अंधे मोड़ पर ओवरटेक के दौरान हादसा हुआ। इन जांच अधिकारियों ने दो लेन के इस बक्सर-बिहार मार्ग को खनिज वाहन चालकों द्वारा लखनऊ रूट के रूप में उपयोग को गलत पाया था। मार्ग पर वाहन चेकिंग कम होने और टोल बैरियर न होने से चालक इस मार्ग से निकलते हैं।
वर्जन...
खनिज लदे भारी वाहन दूसरे मार्गों से निकल जाने की वजह से टोल प्लाजा संचालन महंगा पड़ रहा है। रोज करीब 40 लाख रुपये का ठेका है लेकिन अक्सर इतना टैक्स जमा नहीं हो पाता। प्रशासन ग्रामीण व अन्य जिला मार्गों पर बैरियर लगाएं और परिवहन विभाग चेकिंग अभियान चलाए तो भारी वाहन हाईवे के रास्ते निकलेंगे। -दीपक यादव, टोल मैनेजर।
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हाईवे के बजाय अनुपयुक्त मार्गों से भारी वाहनों का आवागमन खतरनाक होने के साथ ही सड़कों को भी नुकसान पहुंचता है। इस संबंध में परिवहन विभाग और पीडब्ल्यूडी से रिपोर्ट ली जाएगी और जो भी आवश्यक होंगे कदम उठाए जाएंगे। हाईटगेज बैरियर लगाना ही समस्या का हल नहीं है। बड़े वाहनों से आने वाला माल न पहुंच पाने पर क्षेत्र में रहने वाले लोगों को समस्या होगी जो भी संभव होंगे प्रयास किए जाएंगे। -सुशील कुमार गोंड, एडीएम
जिले में सड़क हादसों पर एक नजर
वर्ष-हादसे-मौत-घायल
2022-875-510-557
2023-868-478-721
2024-919-537-778
2025-1045-631-778
2026-210-093-122
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फोटो-18
सड़क-एक
अजगैन-मोहान मार्ग भारी वाहनों से दो महीने में तीन बार टूटा
हसनगंज। अजगैन-मोहान मार्ग से रोजाना औसतन 200 भारी वाहनों का आवागमन होता है। यह मार्ग कानपुर-लखनऊ हाईवे को लखनऊ-कन्नौज मार्ग और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को भी जोड़ता है। टोल बचाने के लिए चालक टोल प्लाजा से सात किलोमीटर पहले इस मार्ग से मुड़कर मलिहाबाद, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी आदि जिलों को जाते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही से मार्ग कुछ ही साल में क्षतिग्रस्त हो जाता है। वर्ष 2017 में इस 18 किलोमीटर लंबे मार्ग के पैचवर्क पर 2.90 करोड़ रुपये खर्च किए थे लेकिन सड़क सात महीने में ही ध्वस्त हो गई थी। कई साल इंतजार के बाद जनवरी 24 में शासन ने मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए 25.51 करोड़ स्वीकृत किए तो सड़क का निर्माण और चौड़ीकरण कराया गया। भारी वाहनों की दिन-रात आवाजाही से हादसे बढ़े और सड़क फिर टूटने लगी तो एक महीने पहले तहसील और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त रूप से कदम उठाते हुए नवई गांव के पास हाइटगेज बैरियर लगवाया। भारी वाहनों ने टक्कर मार कर इसे दो महीने में तीन बार तोड़ दिया। क्षेत्र के रमेश, विनोद, राम पाल आदि ने बताया कि खनिज लदे वाहन लगातार निकल रहे हैं। एसडीएम प्रज्ञा पांडेय ने बताया कि परिवहन विभाग के माध्यम से कार्रवाई कराई जाएगी। (संवाद)
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फोटो-19-
नवाबगंज-लखनापुर मार्ग पर निकल रहे भारी वाहन। संवाद
सड़क-दो
चार साल में टूट गई 20 करोड़ की सड़क
नवाबगंज। टोल कर बचाने के लिए भारी व ओवरलोड ट्रक-डंपर चालकों ने लखनऊ जाने के लिए नवाबगंज-लखनापुर मार्ग को रास्ता बना लिया है। अजगैन-मोहान मार्ग को जोड़ने वाला यह मार्ग आठ किलोमीटर लंबा है। वर्ष 2022 में 20 करोड़ से मार्ग का नवनिर्माण हुआ था। दावा किया गया था कि पांच साल तक सड़क में एक भी गड्ढा नहीं होगा। हालांकि दावे तीन साल में ही हवा हो गए। वर्तमान में रोजाना औसतन 150 भारी वाहन इस मार्ग से निकलते हैं। लखनापुर निवासी अजय कुमार, शिवशंकर, दिनेश कुमार, सावित्री आदि ने बताया कि भारी वाहनों की दिन-रात आवाजाही से आए दिन हादसे होते हैं और सड़क भी क्षतिग्रस्त हो रही है। (संवाद)
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फोटो-20-बक्सर-बिहार दो लेन मार्ग, जिससे रोज निकलते हैं एक हजार वाहन। संवाद
सड़क-तीन
हर दिन निकलते हैं करीब एक हजार वाहन
पाटन। बीघापुर तहसील के बक्सर-बिहार मार्ग की लंबाई 23 किलोमीटर है। इस दो लेन मार्ग पर बुधवार को हुए हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी। मार्ग पर रोजाना औसतन एक हजार वाहनों की आवाजाही से रोज कोई न कोई हादसा होता है। यह वजह है कि इस दो लेन मार्ग की अक्तूबर 2024 में 24 करोड़ रुपये से मरम्मत कराई गई थी। इसके बाद यह फिर कई जगह उखड़ गया है। सड़क किनारे की कच्ची पटरी भी गायब है इससे भारी वाहनों को ओवरटेक करते समय अक्सर हादसे होते हैं। करीब 35 किलोमीटर की दूरी और चेकिंग व टोल शुल्क बचाने के लिए बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट, फतेहपुर आदि से खनिज लेकर लखनऊ जाने-आने के लिए कानपुर-लखनऊ हाईवे के बजाय इस मार्ग से प्रयागराज हाईवे पर चौडगरा चौराहा से बक्सर गंगा नदी पुल से ऊंचगांव, भगवंतनगर, मौरावां होते हुए मोहनलालगंज से लखनऊ जाते हैं।परिवहन विभाग के डिप्टी कमिश्नर राधेश्याम, आरटीओ प्रभात पांडेय ने बिहार बक्सर मार्ग पर हुए हादसे की जांच की थी। पाया कि मार्ग संकरा और अंधे मोड़ पर ओवरटेक के दौरान हादसा हुआ। इन जांच अधिकारियों ने दो लेन के इस बक्सर-बिहार मार्ग को खनिज वाहन चालकों द्वारा लखनऊ रूट के रूप में उपयोग को गलत पाया था। मार्ग पर वाहन चेकिंग कम होने और टोल बैरियर न होने से चालक इस मार्ग से निकलते हैं।
वर्जन...
खनिज लदे भारी वाहन दूसरे मार्गों से निकल जाने की वजह से टोल प्लाजा संचालन महंगा पड़ रहा है। रोज करीब 40 लाख रुपये का ठेका है लेकिन अक्सर इतना टैक्स जमा नहीं हो पाता। प्रशासन ग्रामीण व अन्य जिला मार्गों पर बैरियर लगाएं और परिवहन विभाग चेकिंग अभियान चलाए तो भारी वाहन हाईवे के रास्ते निकलेंगे। -दीपक यादव, टोल मैनेजर।
हाईवे के बजाय अनुपयुक्त मार्गों से भारी वाहनों का आवागमन खतरनाक होने के साथ ही सड़कों को भी नुकसान पहुंचता है। इस संबंध में परिवहन विभाग और पीडब्ल्यूडी से रिपोर्ट ली जाएगी और जो भी आवश्यक होंगे कदम उठाए जाएंगे। हाईटगेज बैरियर लगाना ही समस्या का हल नहीं है। बड़े वाहनों से आने वाला माल न पहुंच पाने पर क्षेत्र में रहने वाले लोगों को समस्या होगी जो भी संभव होंगे प्रयास किए जाएंगे। -सुशील कुमार गोंड, एडीएम
जिले में सड़क हादसों पर एक नजर
वर्ष-हादसे-मौत-घायल
2022-875-510-557
2023-868-478-721
2024-919-537-778
2025-1045-631-778
2026-210-093-122

फोटो-18-अजगैन-मोहान मार्ग जिसपर भारी वाहनों से अक्सर होते हैं हादसे। संवाद

फोटो-18-अजगैन-मोहान मार्ग जिसपर भारी वाहनों से अक्सर होते हैं हादसे। संवाद