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Unnao News: कक्षा तीन की कॉपी-किताबें चार हजार और आठवीं की सात हजार में

Tue, 07 Apr 2026 12:50 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2026 12:50 AM IST
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उन्नाव। निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावकों पर किताबों और यूनिफॉर्म का भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। संचालक अभिभावकों को अपनी बताई दुकानों और स्कूलों से महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। नामी स्कूलों का आलम यह है तीसरी कक्षा की किताबों और कॉपियों का पूरा सेट चार हजार रुपये में मिल रहा है। आठवीं कक्षा की किताबों पर सात हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। अन्य कक्षाओं की किताबों का भी यही हाल है।
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नया सत्र शुरू होने के बाद से ही कॉपी-किताब की दुकानों पर अभिभावकों की भीड़ है। निजी स्कूलों की किताबें केवल उन्हीं दुकानों पर उपलब्ध हैं, जिनके नाम स्कूल की दी गई पुस्तक सूची में हैं। अभिभावक निजी प्रकाशनों की महंगी किताबें खरीदने के लिए विवश हैं।
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पीडी नगर स्थित एक स्कूल की किताबें उसी कॉलोनी के एक घर में बेची जा रही हैं। इस स्कूल ने दी गई पर्ची में स्टेशनरी पर 20 फीसदी छूट का वादा किया था। हालांकि विक्रेता कॉपियां खत्म होने की बात कहकर अभिभावकों को लौटा रहा है। ऐसे में लोगों को दूसरी दुकानों से कॉपियां खरीदनी पड़ रही हैं। अभिभावक सोनम सिंह, शालिनी सिन्हा, राजीव सिंह, दिनेश गुप्ता और उमेश कुमार ने बताया कि यूकेजी की किताब-कॉपी बिना स्टेशनरी के 2200 से 2500 रुपये तक में मिलीं। आरोप लगाया कि स्कूल संचालक कमाई के चक्कर में अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं।
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पुरानी किताबों नहीं आ रहीं दूसरों के काम

निजी स्कूलों की मनमानी के कारण एक ही स्कूल में पढ़ने वाले बड़े भाई की किताबें छोटे भाई के काम नहीं आ रही हैं। अभिभावक रजनी रावत, शिवमोहन सिंह और महेंद्र पाल ने बताया कि निजी स्कूल हर साल किताबों में कुछ पाठ बदल देते हैं। कभी-कभी प्रकाशन भी बदल दिया जाता है जिससे किताबें अगले साल उपयोग लायक नहीं रहतीं। प्रदीप शुक्ला ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबें निजी प्रकाशकों की किताबों से चार से पांच गुना सस्ती होती हैं।



आदेशों का उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई : बीएसएबेसिक शिक्षाधिकारी शैलेश कुमार पांडेय ने जिले के सभी प्री-प्राइमरी, प्राइमरी, जूनियर सहित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र को किसी विशेष विक्रेता से पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। विद्यालयों में शुल्क संग्रह की प्रक्रिया खुली और पारदर्शी रखी जाए। किसी भी छात्र को पुस्तकें, जूते, मोजे या यूनिफॉर्म आदि किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए मजबूर न किया जाए। विद्यालयों के वार्षिक शुल्क में वृद्धि नवीनतम उपलब्ध वार्षिक प्रतिशत पांच फीसदी शुल्क से अधिक नहीं होनी चाहिए। इन आदेशों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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