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Unnao News: स्वास्थ्य विभाग की सरकारी कॉलोनी में प्राइवेट एंबुलेंस का अड्डा, जिम्मेदार अनजान
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फोटो-1-जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय के पास डॉक्टर्स कॉलोनी में खड़ी प्राईवेट एंबुलेंस। संवाद
उन्नाव। स्वास्थ्य विभाग की सरकारी कॉलोनी में निजी एंबुलेंस का अवैध अड्डा चल रहा है। यह खेल जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय से कुछ ही दूरी पर खुलेआम जारी है। निजी एंबुलेंस चालक और दलाल मरीजों को बेहतर इलाज का झांसा देकर नर्सिंगहोम पहुंचाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या से अनजान बने हैं।
अवैध अड्डे पर दिन-रात प्राइवेट एंबुलेंस का जमावड़ा रहता है। दलाल सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को सरकारी सेवाओं की कमियां बताते हैं। वे उन्हें निजी नर्सिंगहोम भेजकर कमीशन कमाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में 51 नर्सिंगहोम दर्ज हैं जिनमें 19 शहर में हैं। हालांकि, 50 से अधिक नर्सिंगहोम बिना पंजीकरण के शहर में संचालित हैं।
निजी अस्पताल सामान्य बीमारी से लेकर ऑपरेशन तक के लिए कमीशन तय करते हैं। दलाल ओपीडी, जनरल वार्ड और इमरजेंसी वार्ड तक में सक्रिय रहते हैं। मरीजों को झांसे में लेते हैं। सरकारी अस्पताल में निशुल्क इलाज के बावजूद उन्हें गुमराह कर निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। जिला अस्पताल परिसर सीसीटीवी कैमरों से लैस है, फिर भी दलालों का हस्तक्षेप कम नहीं हो रहा है। अधिकारी इस स्थिति की अनदेखी कर रहे हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
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जिला अस्पताल और डॉक्टर्स कॉलोनी जैसे सरकारी परिसर में प्राइवेट एंबुलेंस खड़ी करना अवैध है। औचक निरीक्षण कर प्राइवेट एंबुलेंस चालकों और संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो भी प्राइवेट एंबुलेंस अस्पताल परिसर में खड़ी मिली उसे सीज कराया जाएगा। सुनिश्चित किया जाएगा कि जिला अस्पताल या आसपास प्राइवेट एंबुलेंस ना खड़ी हों। लोग सरकारी, निशुल्क एंबुलेंस सेवा, 108 और 102 का लाभ लें। -डॉ. सत्य प्रकाश, सीएमओ।
-जिले में 102 की 43 और 108 की 37 एंबुलेंस हैं। औसत रेस्पॉस टाइम सात मिनट है। मरीज को प्राइवेट अस्पताल लेकर जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस सेवा नहीं दी जाती है। कई बार तीमारदार, सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस का फार्म तो भरवा देते लेकिन बाद में नर्सिंगहोम ले जाने की बात कहकर प्राइवेट एंबुलेंस कर लेते हैं। -योगेंद्र सिंह, सुपरवाइजर, एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी
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अवैध अड्डे पर दिन-रात प्राइवेट एंबुलेंस का जमावड़ा रहता है। दलाल सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को सरकारी सेवाओं की कमियां बताते हैं। वे उन्हें निजी नर्सिंगहोम भेजकर कमीशन कमाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में 51 नर्सिंगहोम दर्ज हैं जिनमें 19 शहर में हैं। हालांकि, 50 से अधिक नर्सिंगहोम बिना पंजीकरण के शहर में संचालित हैं।
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निजी अस्पताल सामान्य बीमारी से लेकर ऑपरेशन तक के लिए कमीशन तय करते हैं। दलाल ओपीडी, जनरल वार्ड और इमरजेंसी वार्ड तक में सक्रिय रहते हैं। मरीजों को झांसे में लेते हैं। सरकारी अस्पताल में निशुल्क इलाज के बावजूद उन्हें गुमराह कर निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। जिला अस्पताल परिसर सीसीटीवी कैमरों से लैस है, फिर भी दलालों का हस्तक्षेप कम नहीं हो रहा है। अधिकारी इस स्थिति की अनदेखी कर रहे हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
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जिला अस्पताल और डॉक्टर्स कॉलोनी जैसे सरकारी परिसर में प्राइवेट एंबुलेंस खड़ी करना अवैध है। औचक निरीक्षण कर प्राइवेट एंबुलेंस चालकों और संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो भी प्राइवेट एंबुलेंस अस्पताल परिसर में खड़ी मिली उसे सीज कराया जाएगा। सुनिश्चित किया जाएगा कि जिला अस्पताल या आसपास प्राइवेट एंबुलेंस ना खड़ी हों। लोग सरकारी, निशुल्क एंबुलेंस सेवा, 108 और 102 का लाभ लें। -डॉ. सत्य प्रकाश, सीएमओ।
-जिले में 102 की 43 और 108 की 37 एंबुलेंस हैं। औसत रेस्पॉस टाइम सात मिनट है। मरीज को प्राइवेट अस्पताल लेकर जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस सेवा नहीं दी जाती है। कई बार तीमारदार, सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस का फार्म तो भरवा देते लेकिन बाद में नर्सिंगहोम ले जाने की बात कहकर प्राइवेट एंबुलेंस कर लेते हैं। -योगेंद्र सिंह, सुपरवाइजर, एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी