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Unnao News: 18 लाख आबादी को शुद्ध पानी के लिए करना होगा 22 माह इंतजार
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फोटो-11-हसनगंज के खपरा भाट में हैंडपंप पर पानी के लिए खड़े लोग। संवाद
उन्नाव। जिले की लगभग 18 लाख आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना फिर अधर में लटक गई है। जल जीवन मिशन (फेज-4) के तहत सतही स्रोत आधारित ग्राम समूह पेयजल योजना 26 जनवरी 2026 तक पूरी होनी थी जिसे अब दिसंबर 2027 तक बढ़ा दिया है। देरी का मुख्य कारण कार्यदायी संस्था को 16 महीने से लंबित 321 करोड़ रुपये का भुगतान न होना है। इस पर संस्था ने काम बंद कर दिया है, जबकि सरकार ने समय सीमा बढ़ा दी है जिससे ग्रामीणों की शुद्ध पानी के लिए जद्दोजहद जारी रहेगी।
यह योजना डेढ़ साल पहले शुरू हुई थी और इसका लक्ष्य 1037 ग्राम पंचायतों की लगभग 18 लाख की आबादी को नल से जल उपलब्ध कराना था। जिले में इस काम की जिम्मेदारी मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फर्म को सौंपी गई है। फर्म का दावा है कि उसने 40 फीसदी काम पूरा कर लिया है और जल निगम के माध्यम से पोर्टल पर करीब 321 करोड़ रुपये के बिल अपलोड किए हैं। हालांकि अक्तूबर 2024 से फर्म को भुगतान नहीं मिला है। केंद्र सरकार से भुगतान न होने के कारण फर्म ने काम रोक दिया है जिससे लगभग 60 फीसदी काम अभी भी शेष है। इसी स्थिति को देखते हुए, सरकार ने योजना की समय सीमा बढ़ाकर दिसंबर 2027 कर दी है।
पुरानी पेयजल परियोजनाओं की बदहाली, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
यह स्थिति केवल नई योजना तक सीमित नहीं है। वर्ष 1995 में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जिले की 72 ग्राम पंचायतों में पेयजल ट्यूबवेल और टंकियां स्थापित की गई थीं। जलनिगम ने आसपास के गांवों तक भूमिगत पाइप लाइनें बिछाकर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की थी। लेकिन, वर्तमान में इनमें से लगभग 41 टंकियां बंद पड़ी हैं। जलनिगम के तकनीकी अधिकारियों के अनुसार, इन पेयजल योजनाओं की मियाद 15 से 20 साल होती है, जो अब पूरी हो चुकी है। पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, मोटर खराब हो गई हैं, या बोरिंग चोक हो गई हैं। मरम्मत के अभाव में ये पुरानी परियोजनाएं जलापूर्ति करने में असमर्थ हैं। पुरानी योजनाओं के बंद होने और नई योजना में हो रही देरी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को दूरदराज के उन हैंडपंपों से पानी लाना पड़ रहा है, जिनका पानी पीने लायक है। जिन घरों में आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) की सुविधा है, वे वहां से भी पानी ला रहे हैं। यह स्थिति ग्रामीणों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
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योजना एक नजर में
कुल लागत-5.4 अरब, भुगतान लंबित-3.21 अरब
ग्राम पंचायत-1037, कुल आबादी-18 लाख, कुल घर-6.11 लाख
पाइप लाइन प्रस्तावित-12823 किमी, अब तक 6787 किमी का काम पूरा हुआ
कुल ओवरहेड टैंक व टंकियां-443-निर्माण कार्य शुरू हो पाया-394, पूरा एक भी नहीं
वर्जन...
कार्यदायी संस्था का भुगतान अक्तूबर 2024 से लंबित है। यह पूरे प्रदेश की स्थिति है। इसी कारण संस्था ने काम बंद कर दिया है। विभाग की ओर से भुगतान के लिए कई बार पत्राचार किया गया है। रिमाइंडर पत्र भी भेजे जा चुके हैं। फिलहाल भुगतान नहीं मिला है लेकिन समयावधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2027 कर दी गई है। -अजीत कुमार सिंह, एक्सईएन जलनिगम ग्रामीण।
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यह योजना डेढ़ साल पहले शुरू हुई थी और इसका लक्ष्य 1037 ग्राम पंचायतों की लगभग 18 लाख की आबादी को नल से जल उपलब्ध कराना था। जिले में इस काम की जिम्मेदारी मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फर्म को सौंपी गई है। फर्म का दावा है कि उसने 40 फीसदी काम पूरा कर लिया है और जल निगम के माध्यम से पोर्टल पर करीब 321 करोड़ रुपये के बिल अपलोड किए हैं। हालांकि अक्तूबर 2024 से फर्म को भुगतान नहीं मिला है। केंद्र सरकार से भुगतान न होने के कारण फर्म ने काम रोक दिया है जिससे लगभग 60 फीसदी काम अभी भी शेष है। इसी स्थिति को देखते हुए, सरकार ने योजना की समय सीमा बढ़ाकर दिसंबर 2027 कर दी है।
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पुरानी पेयजल परियोजनाओं की बदहाली, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
यह स्थिति केवल नई योजना तक सीमित नहीं है। वर्ष 1995 में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जिले की 72 ग्राम पंचायतों में पेयजल ट्यूबवेल और टंकियां स्थापित की गई थीं। जलनिगम ने आसपास के गांवों तक भूमिगत पाइप लाइनें बिछाकर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की थी। लेकिन, वर्तमान में इनमें से लगभग 41 टंकियां बंद पड़ी हैं। जलनिगम के तकनीकी अधिकारियों के अनुसार, इन पेयजल योजनाओं की मियाद 15 से 20 साल होती है, जो अब पूरी हो चुकी है। पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, मोटर खराब हो गई हैं, या बोरिंग चोक हो गई हैं। मरम्मत के अभाव में ये पुरानी परियोजनाएं जलापूर्ति करने में असमर्थ हैं। पुरानी योजनाओं के बंद होने और नई योजना में हो रही देरी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को दूरदराज के उन हैंडपंपों से पानी लाना पड़ रहा है, जिनका पानी पीने लायक है। जिन घरों में आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) की सुविधा है, वे वहां से भी पानी ला रहे हैं। यह स्थिति ग्रामीणों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
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योजना एक नजर में
कुल लागत-5.4 अरब, भुगतान लंबित-3.21 अरब
ग्राम पंचायत-1037, कुल आबादी-18 लाख, कुल घर-6.11 लाख
पाइप लाइन प्रस्तावित-12823 किमी, अब तक 6787 किमी का काम पूरा हुआ
कुल ओवरहेड टैंक व टंकियां-443-निर्माण कार्य शुरू हो पाया-394, पूरा एक भी नहीं
वर्जन...
कार्यदायी संस्था का भुगतान अक्तूबर 2024 से लंबित है। यह पूरे प्रदेश की स्थिति है। इसी कारण संस्था ने काम बंद कर दिया है। विभाग की ओर से भुगतान के लिए कई बार पत्राचार किया गया है। रिमाइंडर पत्र भी भेजे जा चुके हैं। फिलहाल भुगतान नहीं मिला है लेकिन समयावधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2027 कर दी गई है। -अजीत कुमार सिंह, एक्सईएन जलनिगम ग्रामीण।

फोटो-11-हसनगंज के खपरा भाट में हैंडपंप पर पानी के लिए खड़े लोग। संवाद