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Unnao News: करोड़ों खर्च, फिर भी डेढ़ साल में नहीं बन सकी हाईवे की सड़क
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फोटो-26- कानपुर-लखनऊ हाईवे की अधूरी सड़क। संवाद
उन्नाव। लखनऊ-कानपुर हाईवे के सफर को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी को प्रति किलोमीटर एक करोड़ रुपये का ठेका दिया था। एजेंसी पर इसे बनाने के साथ ही पांच साल तक रखरखाव और मरम्मत की भी जिम्मेदारी है लेकिन काम में सुस्ती के चलते डेढ़ साल में सड़क और डिवाइडर में ग्रिल लगाने का काम ही नहीं पूरा हो सका। अभी मार्ग प्रकाश, संकेतकों और सड़क सुरक्षा के काम बाकी हैं।
लखनऊ-कानपुर हाईवे वर्ष 2022 से खस्ताहाल है। तमाम कवायदों के बाद एनएचएआई ने अप्रैल 2024 में एक एजेंसी को 92 किलोमीटर लंबे हाईवे के नवीनीकरण के लिए 92 करोड़ रुपये का ठेका दिया था। नवीनीकरण के साथ ही इस एजेंसी को पांच साल तक रखरखाव भी करने की जिम्मेदारी है। एजेंसी ने अक्तूबर 2024 से सड़क नवीनीकरण (ओवर-ले) का काम शुरू किया लेकिन अभी तक केवल एक परत बिछाई जा सकी है। लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन पर लखनऊ की ओर से 82 किलोमीटर में दोनों परत (ओवर-ले) का काम हुआ है जबकि कानपुर से लखनऊ लेन पर दूसरी परत का काम अभी केवल 30 किलोमीटर में ही हो सका है।
इन कामों में भी सुस्ती : हाईवे पर डिवाइडर पर ग्रिल का काम भी जगह-जगह अधूरा है। करीब 40 किलोमीटर में ही ग्रिल लग पाई है। जबकि सड़क मार्किंग (सफेद व पीली पट्टी), मार्ग संकेतक, प्रमुख चौराहों और तिराहों व ब्लैक स्पॉट वाले स्थानों पर हाईमास्ट लाइटें नहीं लग पाई हैं।
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हालात यह है कि शहर के पास आवास विकास बाईपास तिराहा के पास स्थित आरओबी पर भी लाइट लगाने का काम पूरा नहीं हो सका है। जलभराव की समस्या से निपटने के लिए बंथर, आशा खेड़ा और सोहरामऊ के पास हाईवे के दोनों तरफ नाला बनाने का काम भी केवल बंथर के पास हो पाया है। जबकि सोहरामऊ के पास काफी सुस्त है। कई स्थानों पर जानवरों को रोकने के लिए लगाई जा रही स्टील ग्रिल का काम भी बाकी है।
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लखनऊ-कानपुर हाईवे वर्ष 2022 से खस्ताहाल है। तमाम कवायदों के बाद एनएचएआई ने अप्रैल 2024 में एक एजेंसी को 92 किलोमीटर लंबे हाईवे के नवीनीकरण के लिए 92 करोड़ रुपये का ठेका दिया था। नवीनीकरण के साथ ही इस एजेंसी को पांच साल तक रखरखाव भी करने की जिम्मेदारी है। एजेंसी ने अक्तूबर 2024 से सड़क नवीनीकरण (ओवर-ले) का काम शुरू किया लेकिन अभी तक केवल एक परत बिछाई जा सकी है। लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन पर लखनऊ की ओर से 82 किलोमीटर में दोनों परत (ओवर-ले) का काम हुआ है जबकि कानपुर से लखनऊ लेन पर दूसरी परत का काम अभी केवल 30 किलोमीटर में ही हो सका है।
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इन कामों में भी सुस्ती : हाईवे पर डिवाइडर पर ग्रिल का काम भी जगह-जगह अधूरा है। करीब 40 किलोमीटर में ही ग्रिल लग पाई है। जबकि सड़क मार्किंग (सफेद व पीली पट्टी), मार्ग संकेतक, प्रमुख चौराहों और तिराहों व ब्लैक स्पॉट वाले स्थानों पर हाईमास्ट लाइटें नहीं लग पाई हैं।
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हालात यह है कि शहर के पास आवास विकास बाईपास तिराहा के पास स्थित आरओबी पर भी लाइट लगाने का काम पूरा नहीं हो सका है। जलभराव की समस्या से निपटने के लिए बंथर, आशा खेड़ा और सोहरामऊ के पास हाईवे के दोनों तरफ नाला बनाने का काम भी केवल बंथर के पास हो पाया है। जबकि सोहरामऊ के पास काफी सुस्त है। कई स्थानों पर जानवरों को रोकने के लिए लगाई जा रही स्टील ग्रिल का काम भी बाकी है।

फोटो-26- कानपुर-लखनऊ हाईवे की अधूरी सड़क। संवाद