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Unnao News: 62 किमी. एक्सप्रेसवे पर सिर्फ दो जगह सीसीटीवी, कैसे रुकेगी वाहनों की रफ्तार
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फोटो-22-औरास के पास लगे स्पीड डिडेक्टर कैमरे। संवाद
उन्नाव। कोहरे में एक्सप्रेसवे पर हादसे रोकने के लिए वाहनों की गति सीमा 100 से घटाकर 60 किमी घंटा तो कर दी गई लेकिन इनकी निगरानी के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। आलम यह है कि जिले में 62 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर सिर्फ दो जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। कैमरे पुराने होने से ये वाहनों की स्पीड नहीं पकड़ पाते। इसके अलावा जहां सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, वहां चालक स्पीड कम कर देते हैं। इससे वाहनों की वास्तविक स्पीड नहीं पकड़ पाते। इसके अलावा हादसे होने पर सहायता के लेने के लिए लगाए गए अलार्म बॉक्स भी खराब पड़े हैं। टूटी सुरक्षा जाली से जानवर एक्सप्रेसवे पर धमाचौकड़ी कर रहे हैं।
फोटो नंबर-22-औरास के पास लगे स्पीड डिडेक्टर कैमरे। संवाद
पुराने स्पीड डिडेक्टर कैमरे कोहरे में काम नहीं करते
औरास। जिले में 62 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर केवल दो जगह ही वाहनों की रफ्तार जांचने वाले कैमरे लगे हैं। पहला लखनऊ टोल प्लाजा से आगे औरास के पास और दूसरा बांगरमऊ के देवखरी गांव के पास। यहां दोनों ही जगह दोनों दिशा के वाहनों पर की रफ्तार जांचने के लिए छह-छह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। हालांकि ये कैमरे पुरानी तकनीक के होने से घने कोहरे में काम नहीं कर पाते। इसके अलावा कई किलोमीटर पहले से नजर आने वाले इन कैमरों के पास पहुंचने से पहले चालक रफ्तार कम करने के बाद बैरियर पार करते ही फिर रफ्तार बढ़ा देते हैं। (संवाद)
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फोटो-23-गंजमुरादाबाद के पास खराब अलार्म बॉक्स। संवाद
आपात स्थित में मददगार अलार्म बॉक्स खराब
उन्नाव। एक्सप्रेसवे पर वाहन खराब होने, दुर्घटना होने या किसी तरह की अन्य आपात स्थिति में लोगों की मदद के लिए हर 10 किलोमीटर की दूरी पर पांच साल पहले लगए अलार्म बॉक्स खराब हैं। किसी का तार टूटा है तो किसी की बैटरी खराब हो गई है। मालूम हो कि आपातकालीन स्थिति में यात्रियों की मदद के लिए लगाए गए इन अलार्म बॉक्स की मदद से यात्री को बॉक्स में लगी बटन दबानी होती है। बीप सुनाई देने के साथ ही टोल बैरियर के कंट्रोलरूम, एंबुलेंस, गश्ती वाहनों को अलर्ट मैसेज पहुंच जाता है। रेस्क्यू टीमों को इसकी जानकारी हो जाती है कि सहायता मंगाने वाला व्यक्ति किस स्थान पर हैं। टीमें वहां पहुंचकर मदद कर सकती हैं लेकिन लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर यह व्यवस्था भी ध्वस्त है। (संवाद)
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फोटो- 24-आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर नसिरापुर के सामने घूमते छुट्टा मवेशी। संवाद
एक्सप्रेसवे पर घूमते छुट्टा मवेशी, होते हैं हादसे
गंजमुरादाबाद। एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर सुरक्षा जाली टूटी होने से मवेशी सड़क तक पहुंच जाते हैं इससे अक्सर हादसे होते हैं। बांगरमऊ क्षेत्र में नसिरापुर, हैबतपुर सहित कई स्थानों पर बैरीकेडिंग टूटी है। इससे मवेशी अक्सर इन्हीं रास्तों से एक्सप्रेसवे पर पहुंच जाते हैं। शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे नसिरापुर के सामने छुट्टा मवेशी नगर आए। गनीमत रही कि उस समय कोहरा नहीं था, वर्ना हादसा भी हो सकता था। (संवाद)
वर्जन...
एक्सप्रेसवे पर हादसों को रोकने के लिए वाहनों की गति सीमा घटाई गई है। साथ ही जहां भी मार्ग संकेतक या रिफ्लेक्टर की आवश्यकता है लगाए जा रहे हैं। टूटी बैरिकेडिंग और सुरक्षा जाली को भी दुरुस्त कराया जा रहा है। एक्सप्रेसवे के नवीनीकरण में अलार्म बॉक्स को भी ठीक कराया जाएगा। -आरके चंदेल, सुरक्षा अधिकारी यूपीडा
फोटो-24- नौ महीने बाद डायवर्जन हटने के बाद सीधे निकलते वाहन। संवाद
नौ महीने बाद डायवर्जन से मुक्त हुआ एक्सप्रेसवे
बेहटा मुजावर। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर शादीपुर गांव के पास नौ महीने से लागू डायवर्जन से शुक्रवार को मुक्ति मिल गई। मालूम हो कि यूपीडा ने यहां लगातार हो रहे हादसे और इस समय कोहरा होने से खतरा और बढ़ने से दो महीने के लिए डायवर्जन को खत्म कर दिया है। मालूम हो कि निर्माणानधीन गंगा एक्सप्रेसवे को इस एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए इंटरचेंज (उतार-चढ़ाव का स्थान) बनाया जा रहा है। यूपीडा के एएई आरपी सिंह ने बताया कि शुक्रवार को डायवर्जन को खत्म कर दोनों लेन के वाहनों को अलग-अलग लेन से निकाला जा रहा है। (संवाद)
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फोटो नंबर-22-औरास के पास लगे स्पीड डिडेक्टर कैमरे। संवाद
पुराने स्पीड डिडेक्टर कैमरे कोहरे में काम नहीं करते
औरास। जिले में 62 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर केवल दो जगह ही वाहनों की रफ्तार जांचने वाले कैमरे लगे हैं। पहला लखनऊ टोल प्लाजा से आगे औरास के पास और दूसरा बांगरमऊ के देवखरी गांव के पास। यहां दोनों ही जगह दोनों दिशा के वाहनों पर की रफ्तार जांचने के लिए छह-छह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। हालांकि ये कैमरे पुरानी तकनीक के होने से घने कोहरे में काम नहीं कर पाते। इसके अलावा कई किलोमीटर पहले से नजर आने वाले इन कैमरों के पास पहुंचने से पहले चालक रफ्तार कम करने के बाद बैरियर पार करते ही फिर रफ्तार बढ़ा देते हैं। (संवाद)
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फोटो-23-गंजमुरादाबाद के पास खराब अलार्म बॉक्स। संवाद
आपात स्थित में मददगार अलार्म बॉक्स खराब
उन्नाव। एक्सप्रेसवे पर वाहन खराब होने, दुर्घटना होने या किसी तरह की अन्य आपात स्थिति में लोगों की मदद के लिए हर 10 किलोमीटर की दूरी पर पांच साल पहले लगए अलार्म बॉक्स खराब हैं। किसी का तार टूटा है तो किसी की बैटरी खराब हो गई है। मालूम हो कि आपातकालीन स्थिति में यात्रियों की मदद के लिए लगाए गए इन अलार्म बॉक्स की मदद से यात्री को बॉक्स में लगी बटन दबानी होती है। बीप सुनाई देने के साथ ही टोल बैरियर के कंट्रोलरूम, एंबुलेंस, गश्ती वाहनों को अलर्ट मैसेज पहुंच जाता है। रेस्क्यू टीमों को इसकी जानकारी हो जाती है कि सहायता मंगाने वाला व्यक्ति किस स्थान पर हैं। टीमें वहां पहुंचकर मदद कर सकती हैं लेकिन लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर यह व्यवस्था भी ध्वस्त है। (संवाद)
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फोटो- 24-आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर नसिरापुर के सामने घूमते छुट्टा मवेशी। संवाद
एक्सप्रेसवे पर घूमते छुट्टा मवेशी, होते हैं हादसे
गंजमुरादाबाद। एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर सुरक्षा जाली टूटी होने से मवेशी सड़क तक पहुंच जाते हैं इससे अक्सर हादसे होते हैं। बांगरमऊ क्षेत्र में नसिरापुर, हैबतपुर सहित कई स्थानों पर बैरीकेडिंग टूटी है। इससे मवेशी अक्सर इन्हीं रास्तों से एक्सप्रेसवे पर पहुंच जाते हैं। शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे नसिरापुर के सामने छुट्टा मवेशी नगर आए। गनीमत रही कि उस समय कोहरा नहीं था, वर्ना हादसा भी हो सकता था। (संवाद)
वर्जन...
एक्सप्रेसवे पर हादसों को रोकने के लिए वाहनों की गति सीमा घटाई गई है। साथ ही जहां भी मार्ग संकेतक या रिफ्लेक्टर की आवश्यकता है लगाए जा रहे हैं। टूटी बैरिकेडिंग और सुरक्षा जाली को भी दुरुस्त कराया जा रहा है। एक्सप्रेसवे के नवीनीकरण में अलार्म बॉक्स को भी ठीक कराया जाएगा। -आरके चंदेल, सुरक्षा अधिकारी यूपीडा
फोटो-24- नौ महीने बाद डायवर्जन हटने के बाद सीधे निकलते वाहन। संवाद
नौ महीने बाद डायवर्जन से मुक्त हुआ एक्सप्रेसवे
बेहटा मुजावर। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर शादीपुर गांव के पास नौ महीने से लागू डायवर्जन से शुक्रवार को मुक्ति मिल गई। मालूम हो कि यूपीडा ने यहां लगातार हो रहे हादसे और इस समय कोहरा होने से खतरा और बढ़ने से दो महीने के लिए डायवर्जन को खत्म कर दिया है। मालूम हो कि निर्माणानधीन गंगा एक्सप्रेसवे को इस एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए इंटरचेंज (उतार-चढ़ाव का स्थान) बनाया जा रहा है। यूपीडा के एएई आरपी सिंह ने बताया कि शुक्रवार को डायवर्जन को खत्म कर दोनों लेन के वाहनों को अलग-अलग लेन से निकाला जा रहा है। (संवाद)

फोटो-22-औरास के पास लगे स्पीड डिडेक्टर कैमरे। संवाद

फोटो-22-औरास के पास लगे स्पीड डिडेक्टर कैमरे। संवाद

फोटो-22-औरास के पास लगे स्पीड डिडेक्टर कैमरे। संवाद