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Unnao News: कार्रवाई पर भी ओवरलोडिंग पर नहीं लगा अंकुश
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फोटो नंबर-20-हाईवे से निकलते खनिज लदे वाहन। संवाद
उन्नाव। जिले में ओवरलोडिंग का खेल अभी भी खुलेआम चल रहा है। कानपुर एसटीएफ की कार्रवाई में कुछ सिंडीकेट संचालकों के गुर्गों और परिवहन विभाग के तीन सिपाहियों के निलंबन के बाद भी ओवरलोडिंग जारी है। फर्क इतना है कि लखनऊ-कानपुर हाईवे के टोल प्लाजा से पहले जहां प्रतिदिन 300 ओवर लोड वाहन निकलते थे, वहीं अब 200 निकलते हैं। नियम के अनुसार प्रति गाड़ी 505 रुपये अतिरिक्त टैक्स लेकर उन्हें जाने दिया जाता है।
जिले के हाईवे और स्टेट हाईवे से मौरंग, गिट्टी, बालू आदि खनिज लदे औसतन 10 हजार ट्रक, डंपर रोज निकलते हैं। इनमें लगभग एक हजार वाहन ओवरलोड होते हैं जो सिंडीकेट के लिए काम करने वाले लोकेटरों की मदद से या परिवहन विभाग की सांठगांठ और तयशुदा रकम (इंट्री शुल्क) देकर बेखौफ होकर निकलते हैं। हैरानी की बात यह है कि वाहन की बॉडी से कई फीट ऊपर तक खनिज लादे ज्यादातर वाहनों में नंबर प्लेट नहीं होती और जिनमें होती वह नंबर प्लेट पर कपड़ा बांधकर या ग्रीस और मिट्टी पोतकर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर छिपा देते हैं।
हाईवे पर स्थित नवाबगंज टोल से रोज औसतन 25 हजार वाहनों का आवागमन होता है। इनमें लगभग 10 हजार भारी वाहन होते हैं। ओवरलोड होने पर टोल बूथ पर लगी वेट बीम और एआई कैमरे से इसका पता चलता है। अक्तूबर में रोज औसतन 300 ओवरलोड वाहन निकलते थे। इनसे एनएचएआई की ओर से निर्धारित 505 रुपये अतिरिक्त टैक्स लेकर जाने दिया जाता है। अगर कोई वाहन चालक ओवरलोड न होने का दावा करता है तो पास में ही लगे टोल कंपनी के धर्मकांटा पर वाहन की तौल भी कराई जाती है।
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टोल प्लाजा मैनेजर इरफान शेख ने बताया कि 11 नवंबर के बाद ओवर लोड वाहनों में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं है। ओवरलोड होने पर निर्धारित शुल्क बूथ पर जमा कराया जाता है।
तीनों प्रवर्तन अधिकारी छुट्टी पर, विभाग को एक करोड़ का नुकसान
एआरटीओ कार्यालय में तैनात एआरटीओ प्रवर्तन संजीव कुमार और पीटीओ शहपर किदवई 11 अक्तूबर के बाद से मेडिकल लीव पर हैं। एआरटीओ प्रवर्तन द्वितीय प्रतिभा गौतम सीसीएल पर हैं। इस कारण नवंबर में ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई नहीं हो पाई। इससे विभाग को करीब 1.2 करोड़ रुपये की चपत लगी है। फिलहाल एआरटीओ प्रशासन श्वेता वर्मा को तीनों अधिकारियों का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है लेकिन उनकी लॉगिन आईडी शुरू न होने से प्रवर्तन कार्रवाई नहीं हो पा रही है। नवंबर में प्रवर्तन की कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
परिवहन आयुक्त की ओर से दोनों एआरटीओ को 300-300 वाहनों का चालान, 150-150 वाहनों को सीज करने और दोनों को 36-36 लाख रुपये शमन शुल्क जमा करने का लक्ष्य दिया गया था। वहीं पीटीओ को 300 वाहनों के चालान, 125 वाहन सीज करने और 30 लाख रुपये शमन शुल्क जमा करने का लक्ष्य दिया गया था।
खनिज विभाग के एआई कैमरों को भी दे रहे चकमा
ओवरलोड वाहनों की निगरानी के लिए खनन विभाग ने हाईवे पर एआई तकनीक के कैमरे लगाए हैं। ये इंटरनेट के जरिए ट्रक का फोटो और उसमें लदे माल का फोटो, वीडियो कमांड सेंटर को भेज देते हैं। इसके बाद उसकी समीक्षा करके वाहन नंबर के आधार पर गाड़ी मालिक के खिलाफ जुर्माना व कार्रवाई होती है लेकिन जिन वाहनों के नंबर मिटे या छिपे होते हैं एआई कैमरे भी उनका ब्योरा नहीं दे पाते।
अक्तूबर में प्रवर्तन कार्रवाई पर एक नजर
एआरटीओ प्रवर्तन प्रथम-चालान 543, बंद किए वाहन 54, शमन शुल्क जमा हुआ 23.77 लाख रुपये।
एआरटीओ प्रवर्तन द्वितीय-चालान 269, बंद किए 42, शमन शुल्क जमा हुआ 14.79 लाख रुपये
पीटीओ-चालान 471, बंद किए 82, शमन शुल्क जमा हुआ 23.43 लाख रुपये
वर्जन...
ओवरलोड वाहनों को पास कराने के प्रकरण में एसटीएफ खुद जांच कर रही है। वहीं परिवहन के अधिकारियों की भूमिका की विभाग भी कर रहा है। ऐसे में अलग से जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है। शासन से कोई निर्देश मिलता है तो उस आधार पर कदम उठाए जाएंगे।-गौरांग राठी, डीएम।
फोटो नंबर-23- दहीचौकी पुलिस द्वारा सीज किया गया डंपर। संवाद
नंबर प्लेट पर कालिख लगाने पर डंपर सीज
सोनिक। दही क्षेत्र के पुरवा मोड़ पर पुलिस ने खाली डंपर की नंबर प्लेट पर काला पेंट देख उसे सीज कर दिया है। हाईवे पर दौड़ रहे अधिकतर डंपरों की नंबर प्लेट या तो टूटी होती या फिर उस पर काला पेंट लगा होता है। ऐसे में इन डंपरों से अगर कोई घटना होती है तो पकड़ में नहीं आते। मंगलवार को भी कानपुर-लखनऊ हाईवे पर दही थानाक्षेत्र के पुरवा मोड़ पर लखनऊ की तरफ से मौरंग उतार कर आ रहे खाली डंपर पर पुलिस की नजर पड़ी। डंपर के नंबर प्लेट पर काला पेंट लगा था। रुकवाने पर चालक सही जवाब नहीं दे पाया। इस पर डंपर को सीज कर दिया गया। थानाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि नंबर प्लेट पर पेंट लगाना गलत है, इस पर कार्रवाई की गई है। (संवाद)
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जिले के हाईवे और स्टेट हाईवे से मौरंग, गिट्टी, बालू आदि खनिज लदे औसतन 10 हजार ट्रक, डंपर रोज निकलते हैं। इनमें लगभग एक हजार वाहन ओवरलोड होते हैं जो सिंडीकेट के लिए काम करने वाले लोकेटरों की मदद से या परिवहन विभाग की सांठगांठ और तयशुदा रकम (इंट्री शुल्क) देकर बेखौफ होकर निकलते हैं। हैरानी की बात यह है कि वाहन की बॉडी से कई फीट ऊपर तक खनिज लादे ज्यादातर वाहनों में नंबर प्लेट नहीं होती और जिनमें होती वह नंबर प्लेट पर कपड़ा बांधकर या ग्रीस और मिट्टी पोतकर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर छिपा देते हैं।
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हाईवे पर स्थित नवाबगंज टोल से रोज औसतन 25 हजार वाहनों का आवागमन होता है। इनमें लगभग 10 हजार भारी वाहन होते हैं। ओवरलोड होने पर टोल बूथ पर लगी वेट बीम और एआई कैमरे से इसका पता चलता है। अक्तूबर में रोज औसतन 300 ओवरलोड वाहन निकलते थे। इनसे एनएचएआई की ओर से निर्धारित 505 रुपये अतिरिक्त टैक्स लेकर जाने दिया जाता है। अगर कोई वाहन चालक ओवरलोड न होने का दावा करता है तो पास में ही लगे टोल कंपनी के धर्मकांटा पर वाहन की तौल भी कराई जाती है।
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टोल प्लाजा मैनेजर इरफान शेख ने बताया कि 11 नवंबर के बाद ओवर लोड वाहनों में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं है। ओवरलोड होने पर निर्धारित शुल्क बूथ पर जमा कराया जाता है।
तीनों प्रवर्तन अधिकारी छुट्टी पर, विभाग को एक करोड़ का नुकसान
एआरटीओ कार्यालय में तैनात एआरटीओ प्रवर्तन संजीव कुमार और पीटीओ शहपर किदवई 11 अक्तूबर के बाद से मेडिकल लीव पर हैं। एआरटीओ प्रवर्तन द्वितीय प्रतिभा गौतम सीसीएल पर हैं। इस कारण नवंबर में ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई नहीं हो पाई। इससे विभाग को करीब 1.2 करोड़ रुपये की चपत लगी है। फिलहाल एआरटीओ प्रशासन श्वेता वर्मा को तीनों अधिकारियों का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है लेकिन उनकी लॉगिन आईडी शुरू न होने से प्रवर्तन कार्रवाई नहीं हो पा रही है। नवंबर में प्रवर्तन की कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
परिवहन आयुक्त की ओर से दोनों एआरटीओ को 300-300 वाहनों का चालान, 150-150 वाहनों को सीज करने और दोनों को 36-36 लाख रुपये शमन शुल्क जमा करने का लक्ष्य दिया गया था। वहीं पीटीओ को 300 वाहनों के चालान, 125 वाहन सीज करने और 30 लाख रुपये शमन शुल्क जमा करने का लक्ष्य दिया गया था।
खनिज विभाग के एआई कैमरों को भी दे रहे चकमा
ओवरलोड वाहनों की निगरानी के लिए खनन विभाग ने हाईवे पर एआई तकनीक के कैमरे लगाए हैं। ये इंटरनेट के जरिए ट्रक का फोटो और उसमें लदे माल का फोटो, वीडियो कमांड सेंटर को भेज देते हैं। इसके बाद उसकी समीक्षा करके वाहन नंबर के आधार पर गाड़ी मालिक के खिलाफ जुर्माना व कार्रवाई होती है लेकिन जिन वाहनों के नंबर मिटे या छिपे होते हैं एआई कैमरे भी उनका ब्योरा नहीं दे पाते।
अक्तूबर में प्रवर्तन कार्रवाई पर एक नजर
एआरटीओ प्रवर्तन प्रथम-चालान 543, बंद किए वाहन 54, शमन शुल्क जमा हुआ 23.77 लाख रुपये।
एआरटीओ प्रवर्तन द्वितीय-चालान 269, बंद किए 42, शमन शुल्क जमा हुआ 14.79 लाख रुपये
पीटीओ-चालान 471, बंद किए 82, शमन शुल्क जमा हुआ 23.43 लाख रुपये
वर्जन...
ओवरलोड वाहनों को पास कराने के प्रकरण में एसटीएफ खुद जांच कर रही है। वहीं परिवहन के अधिकारियों की भूमिका की विभाग भी कर रहा है। ऐसे में अलग से जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है। शासन से कोई निर्देश मिलता है तो उस आधार पर कदम उठाए जाएंगे।-गौरांग राठी, डीएम।
फोटो नंबर-23- दहीचौकी पुलिस द्वारा सीज किया गया डंपर। संवाद
नंबर प्लेट पर कालिख लगाने पर डंपर सीज
सोनिक। दही क्षेत्र के पुरवा मोड़ पर पुलिस ने खाली डंपर की नंबर प्लेट पर काला पेंट देख उसे सीज कर दिया है। हाईवे पर दौड़ रहे अधिकतर डंपरों की नंबर प्लेट या तो टूटी होती या फिर उस पर काला पेंट लगा होता है। ऐसे में इन डंपरों से अगर कोई घटना होती है तो पकड़ में नहीं आते। मंगलवार को भी कानपुर-लखनऊ हाईवे पर दही थानाक्षेत्र के पुरवा मोड़ पर लखनऊ की तरफ से मौरंग उतार कर आ रहे खाली डंपर पर पुलिस की नजर पड़ी। डंपर के नंबर प्लेट पर काला पेंट लगा था। रुकवाने पर चालक सही जवाब नहीं दे पाया। इस पर डंपर को सीज कर दिया गया। थानाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि नंबर प्लेट पर पेंट लगाना गलत है, इस पर कार्रवाई की गई है। (संवाद)

फोटो नंबर-20-हाईवे से निकलते खनिज लदे वाहन। संवाद

फोटो नंबर-20-हाईवे से निकलते खनिज लदे वाहन। संवाद

फोटो नंबर-20-हाईवे से निकलते खनिज लदे वाहन। संवाद