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इलाज तो दूर, नहीं मिलता स्ट्रेचर

Fri, 12 Mar 2021 10:53 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Mar 2021 10:53 PM IST
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Treatment is not far, stretcher is not available
पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकार वार्ता करते अनुसूचित जाति/ जनजाति के सदस्य छविलाल सुदर्शन। - फोटो : UNNAO
उन्नाव। जिला अस्पताल में इलाज तो दूर मरीजों को स्ट्रेचर तक नहीं मिल रहा है। इसका खुलासा अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) आयोग के सदस्य के निरीक्षण के दौरान हुआ। सदस्य के सामने ही एक महिला मरीज को स्ट्रेचर नहीं मिला। इस पर कई महिलाएं उसे टांग कर अस्पताल ले जा रही थीं। यह देख सदस्य ने सीएमएस से नाराजगी जताई। मामला शासन तक पहुंचाने की बात कही।
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आयोग के सदस्य छविलाल सुदर्शन शुक्रवार दोपहर जिला अस्पताल पहुंचे। गेट पर पहुंचते ही उनके सामने एक महिला मरीज को चार महिलाएं टांगकर ले जाते मिलीं। पूछने पर बताया कि स्ट्रेचर नहीं मिला है। इस कारण इस हालत में ले जाना पड़ रहा है। सदस्य ने सीएमएस से नाराजगी जताई।
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उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत कर इलाज व डॉक्टर के व्यवहार के बारे में पूछा। मरीजों ने लापरवाही की जानकारी दी तो आयोग के सदस्य का पारा चढ़ गया। सफाई कर्मियों की संख्या के बारे में पता किया तो 20 बताई गई। ड्यूटी पर 11 ही मिले। उन्होंने कहा कि 20 के सापेक्ष 11 ही काम कर रहे हैं। इसका सीधा सा अर्थ है कि शेष सफाई कर्मियों का पैसा अधिकारी बंदरबांट कर रहे हैं। बताया कि पूरी रिपोर्ट शासन को देंगे।
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पीड़ितों को समय से आर्थिक लाभ देने को कहा
पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में सदस्य ने कहा कि समाज कल्याण विभाग की स्थिति संतोषजनक मिली है। यहां वर्ष 2020 में अनुसूचित जाति, जनजाति उत्पीड़न से जुड़े केवल छह मामले विचाराधीन हैं। शेष सभी का समाधान करा दिया गया है। कहा गया है कि उत्पीड़न में मिलने वाला आर्थिक लाभ तत्काल पीड़ितों को दिलाया जाए।

पूर्ति विभाग में राशनकार्डों के न बन पाने पर कहा कि डीएसओ को इस संबंध में निर्देशित किया गया है। सदस्य ने राजस्व, शिक्षा, पंचायतीराज, आबकारी, ग्राम विकास विभाग के अधिकारियों के साथा अनुसूचित जाति बाहुल्य इलाकों में कराए गए कार्यों की भी समीक्षा की। बिछिया विकासखंड की दो पंचायतों के एसटी के लिए आरक्षित किए जाने के मामले को उन्होंने दिखवाने की बात कही। यहां न्यायिक एसडीएम सदर अंकित शुक्ला, समाज कल्याण अधिकारी आनंद भदौरिया भी मौजूद रहे।
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