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सरकारी अस्पतालों में मरीजों को न दवाएं मिलीं न जांच

Wed, 21 Sep 2016 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव Updated Wed, 21 Sep 2016 12:53 AM IST
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There were no medicines to patients in government hospitals not check
जिला अस्पताल में धरने पर बैठे फार्मासिस्ट - फोटो : अमर उजाला
बारह दिन बाद भी मांगों को लेकर सरकार के  सजग न होने पर डिप्लोमा फार्मासिस्ट व लैब टेकभनीशियन एसोसिएशन के पदाधिकारी अनिश्चतकालीन हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से न तो मरीजों को दवाएं मिल पाईं न ही कोई जांच हो सकी। इससे कई गंभीर मरीजों को बाहर से जांच करानी पड़ी। यह हाल जिला अस्पताल सहित सभी सीएचसी व पीएचसी का रहा।
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डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. अशोक कुुमार सिंह का कहना है कि फार्मासिस्ट संवर्ग की वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए। ब्लड बैंक व पोस्टमार्टम हाउस में फार्मासिस्टों की तैनाती की गई है। उनसे निर्धारित स्थानों पर काम नहीं लिया जा रहा है। महानिदेशालय से पदोन्नतियां नहीं की जा रही हैं। शासन की ओर से पद सृजन किए जाने के उद्देश्यों का उल्लंघन हो रहा है।
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इन मांगों को लेकर नौ सितंबर को सीएमओ कार्यालय के बाहर धरना दिया गया था। इसके बाद लगातार 16 सितंबर से दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया गया। मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अब अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी गई है। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, हड़ताल चलती रहेगी। धरने का उप्र राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष उमा निवास बाजपेई व उप्र मेडिकल एंड पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह ने भी समर्थन किया।  
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नवाबगंज प्रतिनिधि के अनुसार हड़ताल के चलते मरीजों को न तो दवा का वितरण हुआ और न ही जांचें र्हुइं। सीएचसी में गौरी गांव निवासी रामरती बुखार आने पर सीएचसी दिखाने आईं। डाक्टर ने ब्लड की जांच लिखी।  पैथालॉजी बंद होने से जांच नहीं हो पाई। वहीं कपूरखेड़ा की निशा पेट दर्द होने पर दवा लेने आई थीं। मेडिसिन कक्ष में ताला लटकता देख यह बैरंग हो गईं। भजनखेड़ा की अनीत को दस्त व फीवर होने पर परिजन जिला अस्पताल लाए। यहां उपचार तो हुआ लेकिन ब्लड की जांच नहीं हो पाई।

औरास प्रतिनिधि के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र  में सुबह से मरीज दवा के लिए भटकते रहे। बुखार से पीड़ित मरीजों के ब्लड की जांच नहीं हो पाई। यहां एचआईवी की जांच कराने के लिए जिले से टीम भेजी गई थी। स्वास्थ्य कर्मी रामप्रसाद के नेतृत्व में पहुंची टीम ने 40 लोगों की एचआईवी जांच की। अन्य जांचों के न होने से मरीज या तो घर लौट गए या फिर बाहर की पैथोलॉजी में जाकर जांच कराई।

इन जांचों के लिए भटके मरीज

जिला अस्पताल व सीएचसी, पीएचसी में मरीजों को ‘हीमोग्लोबिन, मलेरिया, टीबी, एमपी विडाल, जीबीपी, सीबीसी एचआईवी प्रथम व द्वितीय’ की जांचों के लिए भटकना पड़ा। वहीं ओपीडी में दिखाने आए मरीजों को मेडिसिन कक्ष में ताला बंद होने से दवा नहीं मिल पाईं।
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