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Unnao News: जिला अस्पताल में नहीं है दिल के दर्द का इलाज
Sat, 11 Nov 2023 11:30 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Sat, 11 Nov 2023 11:30 PM IST
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उन्नाव।
जिला अस्पताल में दिल के मरीजों के समुचित इलाज की व्यवस्था नहीं है। ह्रदयरोग विभाग में विशेषज्ञ नहीं हैं। रोजाना औसत दो मरीजों को कानपुर रेफर किया जा रहा है। जबकि 15 से 20 मरीजों का फिजीशियन, ईसीजी जांच और दवा देकर चलता करते हैं। जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी ह्रदय रोगियों की संख्या भी बढ़ेगी। यहां तैनात ह्रदयरोग विशेषज्ञ तीन महीने पहले सेवानिवृत्त हो गए थे। तब से किसी की तैनाती नहीं हो पाई है।
अनियमित खानपान और दिनचर्या होने से दिल की बीमारियां बढ़ी हैं। सर्दी के मौसम में हृदय संबंधित बीमारियां और तेज पकड़ती हैं। लेकिन जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों के इलाज के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां तैनात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.एसके पांडेय अगस्त माह में सेवा निवृत्त हो गए थे। तब से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी। ह्रदयरोग विभाग में पहुंचने वाले मरीज मायूस होते हैं। वहीं ओपीडी में फिजीशियन रोजाना औसतन 15 से 20 मरीज देखते हैं और दवा देते हैं। ज्यादा दिक्कत होने पर सुबह आठ से दोपहर दो बजे ईसीजी जांच की सुविधा मिल जाती है। वहीं इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने वाले गंभीर ह्रदय रोगियों को कानपुर कार्डियोलॉजी रेफर कर दिया जाता है। शनिवार को जिला अस्पताल में हृदय संबंधी रोग से पीड़ित 20 मरीज पहुंचे। इनमें कुछ को दवा दी, वहीं ज्यादा परेशानी होने पर पांच मरीजों की ईसीजी जांच के बाद कानपुर में इलाज कराने की सलाह दी गई।
1993 में शुरू हुआ था हृदय रोग विभाग
जिला अस्पताल में ह्रदयरोग विभाग का छह अगस्त 1993 में तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा ने शुभारंभ किया था। इसमें एक आईसीयू वार्ड, छह बेड के वार्ड सहित अन्य उपकरण भी हैं। यहां एक ह्रदयरोग विशेषज्ञ, दो स्टाफ नर्स, एक वार्ड ब्वाय, एक इसीजी टेक्नीशियन की तैनाती हुई थी। जबकि वर्तमान में एक एसीजी टेक्नीशियन, एक स्टाफ नर्स, एक बीपी मॉनीटर तैनात है।
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जिला अस्पताल में दिल के मरीजों के समुचित इलाज की व्यवस्था नहीं है। ह्रदयरोग विभाग में विशेषज्ञ नहीं हैं। रोजाना औसत दो मरीजों को कानपुर रेफर किया जा रहा है। जबकि 15 से 20 मरीजों का फिजीशियन, ईसीजी जांच और दवा देकर चलता करते हैं। जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी ह्रदय रोगियों की संख्या भी बढ़ेगी। यहां तैनात ह्रदयरोग विशेषज्ञ तीन महीने पहले सेवानिवृत्त हो गए थे। तब से किसी की तैनाती नहीं हो पाई है।
अनियमित खानपान और दिनचर्या होने से दिल की बीमारियां बढ़ी हैं। सर्दी के मौसम में हृदय संबंधित बीमारियां और तेज पकड़ती हैं। लेकिन जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों के इलाज के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां तैनात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.एसके पांडेय अगस्त माह में सेवा निवृत्त हो गए थे। तब से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी। ह्रदयरोग विभाग में पहुंचने वाले मरीज मायूस होते हैं। वहीं ओपीडी में फिजीशियन रोजाना औसतन 15 से 20 मरीज देखते हैं और दवा देते हैं। ज्यादा दिक्कत होने पर सुबह आठ से दोपहर दो बजे ईसीजी जांच की सुविधा मिल जाती है। वहीं इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने वाले गंभीर ह्रदय रोगियों को कानपुर कार्डियोलॉजी रेफर कर दिया जाता है। शनिवार को जिला अस्पताल में हृदय संबंधी रोग से पीड़ित 20 मरीज पहुंचे। इनमें कुछ को दवा दी, वहीं ज्यादा परेशानी होने पर पांच मरीजों की ईसीजी जांच के बाद कानपुर में इलाज कराने की सलाह दी गई।
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1993 में शुरू हुआ था हृदय रोग विभाग
जिला अस्पताल में ह्रदयरोग विभाग का छह अगस्त 1993 में तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा ने शुभारंभ किया था। इसमें एक आईसीयू वार्ड, छह बेड के वार्ड सहित अन्य उपकरण भी हैं। यहां एक ह्रदयरोग विशेषज्ञ, दो स्टाफ नर्स, एक वार्ड ब्वाय, एक इसीजी टेक्नीशियन की तैनाती हुई थी। जबकि वर्तमान में एक एसीजी टेक्नीशियन, एक स्टाफ नर्स, एक बीपी मॉनीटर तैनात है।
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