फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Unnao News ›   The same family spent 37 years in development

एक ही परिवार ने 37 साल चलाई प्रधानी

Fri, 16 Apr 2021 10:46 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 16 Apr 2021 10:46 PM IST
विज्ञापन
The same family spent 37 years in development
गौरा गांव मुख्य मार्ग पर बना ऊधौ सिंह स्मृति द्वार। - फोटो : UNNAO
नवाबगंज। ग्राम पंचायत गौरा कठेरवा में एक ही परिवार के सदस्यों ने 37 साल गांव की प्रधानी चलाई। सबसे अधिक समय तक इस परिवार का ब्लाक प्रमुख पद पर भी कब्जा रहा। इस परिवार ने पंचायत चुनाव के हर पद पर चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की।
विज्ञापन

भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व ब्लाक प्रमुख रहे स्व. अवधेश प्रताप सिंह का पैतृक गांव गौरा कठेरवा है। 1952 में इनके पिता स्व. उधौ सिंह गांव के प्रधान बने थे और 1962 तक प्रधानी चलाई थी। वर्ष 1988 से उधौ सिंह के तीसरे नंबर के बेटे विजय प्रताप सिंह के हाथ प्रधानी की बागडोर आई और 17 साल यानि 2005 तक रही। 2005 से 2010 तक विजय की पत्नी शकुंतला देवी प्रधान रहीं।
विज्ञापन

2010 में सीट आरक्षित हुई तो इस परिवार ने अपने यहां काम करने वाले नीरज लोधी को जितवाकर प्रधान बनाया। 2015 में महिला सीट होने पर विजय प्रताप सिंह ने अपनी पुत्रवधू विनीता सिंह को मैदान में उतारकर ग्राम प्रधान की कुर्सी पर कब्जा किया। उधौ सिंह के परिवार में पुत्र, पुत्रवधू व पौत्रवधू ने 37 साल ग्राम प्रधानी चलाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

1962 तक प्रधानी (सरपंची) करने के बाद क्षेत्र पंचायतों का गठन हुआ तो 1964 में ऊधौ सिंह ने ब्लॉक प्रमुखी में हाथ आजमाया और पहले प्रमुख बनने का गौरव हासिल किया। वह लगातार छह बार ब्लाक प्रमुख रहे। 12 जनवरी 1985 को उधौ सिंह की मृत्यु हो गई। इसके बाद शेष दो साल का कार्यकाल गौरी निवासी ज्येष्ठ प्रमुख रहे रामशंकर अवस्थी ने संभाला था। वर्ष 1989 में उधौ सिंह के बड़े बेटे अवधेश प्रताप सिंह ब्लाक के सातवें प्रमुख चुने गए। वह लगातार दो बार कुर्सी पर काबिज रहे।
2000 में सीट आरक्षित होने से लगा था झटका
साल 2000 में ब्लाक प्रमुख पद एससी के लिए आरक्षित हो गया था। इसमें पैथर निवासी रामनरेश विमल सेवरा निवासी राजमोहन को लाटरी में मात देकर नौवें ब्लाक प्रमुख चुने गए थे। चार साल बाद जुलाई 2004 में क्षेत्र पंचायत परिसर में ही रामनरेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

रामनरेश की हत्या के बाद शेष कार्यकाल अवधेश प्रताप सिंह के बेटे धीरेंद्र प्रताप सिंह ने संभाला था। 2006 के चुनाव में सीट पिछड़ी जाति में आरक्षित होने पर अवधेश ने अपने खास मनोज कुमार सोनी को ब्लाक प्रमुख बनवाया था। साल 2010 में महिला सीट आरक्षित होने पर पत्नी माया देवी निर्विरोध जीत हासिल कर ब्लाक प्रमुख बनी थी। हालांकि 2016 में गौरा परिवार को शिकस्त मिली और तब अरुण सिंह ब्लाक प्रमुख बने थे। ऊधौ सिंह के चौथे नंबर के बेटे बालेंद्र प्रताप सिंह चार बार जिला पंचायत सदस्य रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed