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पीक सीजन में यूरिया का संकट
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sun, 11 Jan 2015 12:20 AM IST
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उन्नाव। पीक सीजन में एक बार फिर यूरिया का संकट गहरा गया है। जिले की साधन सहकारी समितियों से यूरिया गायब हो गई है।
किसान यूरिया के लिए समितियों का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। ऐसे में प्राइवेट कंपनी की यूरिया खरीदने के लिए ऊंची कीमत देने को मजबूर होेना पड़ रहा है।
जनपद में डीएपी के बाद अब यूरिया के लिए मारामारी मच गई है। गोदाम खाली पड़े हुए हैं। जिससे किसान केेंद्रों से खाली हाथ वापस लौटने को मजबूर हैं।
अधिकारी जल्द रैक आने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं। खाद न मिलने से फसलों खासकर गेहूं का उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, कई जगहों पर किसान ब्लैक में यूरिया खरीद रहे हैं। गोदाम कर्मचारी भी खाद न होने की बात कहकर किसानों को वापस लौटा रहे हैं।
जानकारों की मानें तो यूरिया की जबरदस्त किल्लत है। इससे पहले डीएपी के लिए भी किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। हालत यह थी किसानों ने ब्लैक में डीएपी खरीदकर खेतों में डाली थी। अब उन्हें यूरिया के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है।
बताया जाता है कि वर्तमान में प्रतिदिन करीब आधा दर्जन गाड़ियां आनी चाहिए, जिससे किसानों को समय पर यूरिया मिल सके।
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किसान यूरिया के लिए समितियों का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। ऐसे में प्राइवेट कंपनी की यूरिया खरीदने के लिए ऊंची कीमत देने को मजबूर होेना पड़ रहा है।
जनपद में डीएपी के बाद अब यूरिया के लिए मारामारी मच गई है। गोदाम खाली पड़े हुए हैं। जिससे किसान केेंद्रों से खाली हाथ वापस लौटने को मजबूर हैं।
अधिकारी जल्द रैक आने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं। खाद न मिलने से फसलों खासकर गेहूं का उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, कई जगहों पर किसान ब्लैक में यूरिया खरीद रहे हैं। गोदाम कर्मचारी भी खाद न होने की बात कहकर किसानों को वापस लौटा रहे हैं।
जानकारों की मानें तो यूरिया की जबरदस्त किल्लत है। इससे पहले डीएपी के लिए भी किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। हालत यह थी किसानों ने ब्लैक में डीएपी खरीदकर खेतों में डाली थी। अब उन्हें यूरिया के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है।
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बताया जाता है कि वर्तमान में प्रतिदिन करीब आधा दर्जन गाड़ियां आनी चाहिए, जिससे किसानों को समय पर यूरिया मिल सके।